अंतरिक्ष में दो ग्रहों की भीषण टक्कर, वैज्ञानिकों ने कैमरे में कैद किया नजारा

अंतरिक्ष में दो ग्रहों की टक्कर (फाइल फोटो)

ऋषी तिवारी


अंतरिक्ष की गहराइयों में वैज्ञानिकों (Scientists) ने एक ऐसी दुर्लभ और चौंकाने वाली घटना को देखा है, जिसका अनुमान तक लगाना मुश्किल था। पृथ्वी से करीब 11,000 प्रकाश-वर्ष दूर दो ग्रह आपस में टकरा गए, जिसके परिणामस्वरूप विशाल धूल और मलबे का बादल बन गया। खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने इस भीषण टक्कर के बाद के नजारे को सफलतापूर्वक कैप्चर कर लिया है।

कैसे मिली यह खोज?

यह खोज तब हुई जब ‘Gaia20ekh’ नामक एक तारे का व्यवहार अचानक बदलने लगा। पुपिस (Pupis) तारामंडल में स्थित यह सूर्य जैसा तारा पहले सामान्य रूप से चमक रहा था, लेकिन 2016 के बाद इसकी चमक में अजीब तरह की गिरावट दर्ज की गई। यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के रिसर्चर त्ज़ानिडाकिस ने बताया कि शुरुआत में तारे की रोशनी स्थिर थी, लेकिन फिर अचानक इसकी चमक में तीन बार गिरावट आई और 2021 के आसपास स्थिति और बेतरतीब हो गई।

धूल का गुबार बना सुराग

शोधकर्ताओं ने शुरुआत में सोचा कि यह तारे की आंतरिक प्रक्रिया का नतीजा हो सकता है, लेकिन गहराई से अध्ययन के बाद सच्चाई सामने आई। तारे के सामने बड़ी मात्रा में धूल और चट्टानों का विशाल गुबार आ गया था, जो उसकी रोशनी को ढक रहा था। जब भी यह मलबा पृथ्वी और तारे के बीच आता, तारे की रोशनी कम दिखाई देती थी।

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आगे की जांच में पता चला कि यह धूल और चट्टानें अचानक नहीं आईं, बल्कि उस तारे की परिक्रमा कर रहे दो ग्रहों की आपसी टक्कर का परिणाम थीं। इस टक्कर से भारी मात्रा में मलबा अंतरिक्ष में फैल गया, जिसका आकार लगभग 15 करोड़ किलोमीटर चौड़ा (पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी के बराबर) है।

पृथ्वी-चंद्रमा के निर्माण जैसी स्थिति

त्ज़ानिडाकिस ने इस घटना को ‘अद्भुत’ बताते हुए कहा कि अलग-अलग दूरबीनों ने इस टक्कर को लगभग असली समय में दर्ज किया। यह खोज इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारे सौर मंडल के इतिहास से मिलती-जुलती है। लगभग 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी को भी एक विशाल पिंड से टक्कर का सामना करना पड़ा था, जिसके मलबे से ही चंद्रमा का निर्माण हुआ था।

वैज्ञानिकों (Scientists) का मानना है कि ऐसी टक्करें ब्रह्मांड में आम हो सकती हैं, लेकिन उन्हें देख पाना बहुत मुश्किल होता है। यह घटना खगोल विज्ञान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो यह समझने में मदद करेगी कि ग्रहों का निर्माण और विकास कैसे होता है।

Sandhya Samay News

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