Bihar’s Cockroach Pandal: बिहार के कटिहार में इस बार दुर्गा पूजा का एक अनोखा पंडाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। विनोदपुर में तैयार किए गए कॉकरोच पंडाल में विशाल कॉकरोच की आकृतियां और मकड़ी के जाल जैसी सजावट की गई है। आम तौर पर कॉकरोच देखकर लोग उससे दूर भागते हैं, लेकिन यहां श्रद्धालु और स्थानीय लोग इन आकृतियों के साथ तस्वीरें खिंचवाने पहुंच रहे हैं। पंडाल की खास थीम ने इसे बच्चों, युवाओं और परिवारों के लिए एक आकर्षक सेल्फी पॉइंट बना दिया है।
देश में कॉकरोच को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पूजा समिति ने इस बार सजावट के लिए अलग विषय चुना। समिति का कहना है कि इस थीम का किसी राजनीतिक दल या विचारधारा से कोई संबंध नहीं है। इसका उद्देश्य केवल लोगों को आकर्षित करना, बच्चों का मनोरंजन करना और पूजा के अनुभव को यादगार बनाना है।
कॉकरोच और मकड़ी के जाल से सजा पंडाल
विनोदपुर के दुर्गा पूजा पंडाल में प्रवेश करते ही लोगों को सामान्य सजावट से अलग दृश्य देखने को मिलता है। पंडाल के भीतर मकड़ी के जाल जैसी संरचनाएं बनाई गई हैं और उनके बीच थर्मोकोल से तैयार किए गए बड़े कॉकरोच लगाए गए हैं। सजावट को इस तरह व्यवस्थित किया गया है कि वह देखने में रोचक लगे और लोगों को तस्वीरें लेने के लिए आकर्षित करे।
आजकल त्योहारों में पूजा-अर्चना के साथ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने का चलन भी बढ़ा है। पूजा समिति ने इसी रुचि को ध्यान में रखते हुए ऐसी थीम तैयार कराई है, जो बच्चों से लेकर युवाओं और परिवारों तक को पसंद आए। कॉकरोच की विशाल आकृतियां इस पंडाल की पहचान बन गई हैं और आगंतुकों के लिए खास फोटो स्पॉट का काम कर रही हैं।
1935 से जारी है पूजा की परंपरा
विनोदपुर दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष नवीन कुमार गोयनका के मुताबिक, यहां वर्ष 1935 से लगातार मां दुर्गा की पूजा की जा रही है। पहले इस इलाके को बंगाली टोला के नाम से जाना जाता था। उनके अनुसार, उनके पूर्वजों ने पूजा की जो परंपरा शुरू की थी, समिति आज भी उसे आगे बढ़ा रही है।
समय के साथ पंडाल की सजावट और प्रस्तुति में नए प्रयोग किए गए हैं, लेकिन पूजा की धार्मिक परंपरा कायम है। समिति का कहना है कि कॉकरोच थीम को मनोरंजन और कल्पनाशीलता के उद्देश्य से चुना गया है। इसका किसी राजनीतिक चर्चा या विचारधारा से संबंध नहीं है।
नवद्वीप के कारीगरों ने एक महीने में तैयार किया पंडाल
इस खास पंडाल को बनाने के लिए पश्चिम बंगाल के नवद्वीप से कारीगर बुलाए गए थे। पूजा समिति के सचिव अमर प्रताप के अनुसार, सजावट तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगा। कारीगरों ने थर्मोकोल और अन्य सजावटी सामग्रियों की मदद से कॉकरोच की आकृतियां तथा मकड़ी के जाल जैसी संरचनाएं तैयार कीं।
पंडाल की सजावट और मां दुर्गा की प्रतिमा सहित पूरे आयोजन का बजट लगभग पांच लाख रुपये बताया गया है। समिति के मुताबिक, प्रतिमा का कॉन्सेप्ट स्थानीय लोगों ने दिया था, जिसे कारीगरों ने अपनी कला के जरिए रूप दिया। आयोजन में सजावट की नवीनता के साथ धार्मिक परंपरा को भी प्राथमिकता दी गई है।
समिति ने राजनीतिक संबंध से किया इनकार
कॉकरोच थीम को लेकर अध्यक्ष नवीन कुमार गोयनका ने स्पष्ट किया कि इसका किसी राजनीतिक दल या विचारधारा को समर्थन देने अथवा विरोध करने से कोई लेना-देना नहीं है। उनके मुताबिक, देश में कॉकरोच को लेकर भले ही चर्चाएं हो रही हों, लेकिन विनोदपुर पूजा समिति ने यह विषय पूरी तरह काल्पनिक और मनोरंजन के उद्देश्य से चुना है।
समिति ने उम्मीद जताई है कि अनोखी सजावट पंडाल में आने वाले लोगों को आकर्षित करेगी। बच्चों के लिए विशाल कॉकरोच खास कौतूहल का विषय हैं, जबकि युवा और परिवार यहां तस्वीरें लेने में रुचि दिखा रहे हैं।
परंपरा के साथ नया प्रयोग
दुर्गा पूजा के पंडालों में अक्सर मंदिरों, धार्मिक प्रसंगों और पौराणिक कथाओं पर आधारित सजावट देखने को मिलती है। विनोदपुर के कॉकरोच थीम वाले दुर्गा पूजा पंडाल ने इससे अलग कल्पना को सामने रखा है। यहां मां दुर्गा की पूजा की पुरानी परंपरा के साथ सजावट में नया प्रयोग किया गया है।
जिस कॉकरोच से लोग आमतौर पर दूरी बनाते हैं, वही इस बार कटिहार के पंडाल में लोगों को आकर्षित कर रहा है। यह थीम कितनी लोकप्रिय होती है, इसका अंदाजा पूजा के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया से लगेगा। फिलहाल, विनोदपुर का यह पंडाल अपनी अनोखी सजावट और सेल्फी पॉइंट के कारण चर्चा में है।



























