Mahavir Jayanti 2026:31 मार्च को पूरे देशभर में जैन धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक ‘महावीर जयंती’ की धूम मची हुई है। जैन समुदाय के लिए इस दिन का अत्यंत महत्व है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म हुआ था। उनका जीवन और शिक्षाएं आज भी पूरी विश्व को अहिंसा और नैतिकता का पाठ पढ़ाती हैं।
इक्ष्वाकु वंश में जन्मे थे ‘वर्धमान’
इतिहास के अनुसार, भगवान महावीर का जन्म इक्ष्वाकु वंश के क्षत्रिय राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के घर वैशाली (वर्तमान बिहार) में हुआ था। बचपन में उनका नाम ‘वर्धमान’ था। राजघराने की सभी सुख-सुविधाओं के बीच बड़े हुए वर्धमान ने मात्र 30 वर्ष की आयु में सांसारिक मोह और माया को त्याग दिया। उन्होंने संन्यास का मार्ग अपनाकर आत्मज्ञान और मोक्ष की खोज में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
क्या है जैन धर्म के ‘पंचशील सिद्धांत’?
भगवान महावीर ने जीवन भर लोगों को सही मार्ग दिखाने के लिए ‘पंचशील सिद्धांत’ की शिक्षा दी। ये पांच सिद्धांत मानव जीवन को उत्कृष्ट बनाने के आधार हैं:
- अहिंसा (Non-violence): भगवान महावीर ने सबसे अहम सिद्धांत अहिंसा को दिया। उनका संदेश था कि मनुष्य को हिंसा से पूरी तरह दूर रहना चाहिए और जाने-अनजाने में भी किसी जीव को कोई कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए।
- सत्य (Truth): उन्होंने सत्य को सबसे बड़ा तत्व बताया। उनके अनुसार, “हे पुरुष! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ। जो बुद्धिमान सत्य के सानिध्य में रहता है, वह मृत्यु रूपी समुद्र को तैरकर पार कर जाता है।”
- अचौर्य या अस्तेय (Non-stealing): इस सिद्धांत के अनुसार, किसी भी मनचाही चीज को हथियाने के लिए गलत रास्ता अपनाना नहीं चाहिए। जो लोग इस नियम का पालन करते हैं, उनकी इंद्रियों पर संयम बना रहता है और वे पवित्र जीवन जीते हैं।
- ब्रह्मचर्य (Celibacy): भगवान महावीर ने पवित्र गुणों को अपनाने पर जोर दिया। उनका मानना था कि केवल शरीर की शुद्धि ही नहीं, बल्कि मन की शुद्धि पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
- अपरिग्रह (Non-attachment): यह पांचवां और अंतिम सिद्धांत है, जो चारों सिद्धांतों को जोड़ता है। अपरिग्रह का अर्थ है लगाव से मुक्त होना। इसका पालन करने से चेतना जागृत होती है और व्यक्ति सांसारिक भौतिक सुखों का त्याग कर आंतरिक शांति पाता है।
कैसे मनाई जाती है महावीर जयंती?
इस पवित्र अवसर पर जैन समुदाय द्वारा त्योहार की भव्य तैयारियां की जाती हैं। दिन की शुरुआत सुबह की प्रभात फेरी से होती है। इसके बाद सड़कों पर भव्य शोभायात्रा और पालकी यात्रा निकाली जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
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मंदिरों में भगवान महावीर की प्रतिमाओं का सोने और चांदी के कलशों से विधि-विधान से अभिषेक किया जाता है और मंदिरों के शिखरों पर ध्वजा फहराई जाती है। इसके अलावा दिनभर धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचनों का आयोजन होता रहता है। लोग भगवान महावीर की शिक्षाओं को याद करते हुए अपने जीवन में उन्हें उतारने का संकल्प लेते हैं।






















