दिल्ली के जंतर-मंतर को इन दिनों देशभर के मेधावी छात्रों के गुस्से का प्रतीक बन चुका है। नीट (NEET-UG) परीक्षा में हुई व्यापक अनियमितताओं, पेपर लीक और रिजल्ट में अनचाहे उतार-चढ़ाव को लेकर यहां लगातार प्रदर्शन जारी है। छात्रों की मांग साफ है—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा और परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता। लेकिन, 20 जुलाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का बर्बर लाठीचार्ज इस आंदोलन का टर्निंग पॉइंट बन गया।
इसी लाठीचार्ख के बाद देशभर के सामाजिक और राजनीतिक तबकों में गहरा आक्रोश देखने को मिला, और अब इस आंदोलन में महाराष्ट्र के उस नेता की एंट्री हो रही है, जिसने अपने आंदोलन से सत्ता को पसीना आने पर मजबूर कर दिया था।
मनोज जरांजे पाटिल का दिल्ली दौरा: क्या है पूरा शेड्यूल?
मराठा क्रांति मोर्चे के संयोजक मनोज जरांगे पाटिल ने NEET छात्रों के संघर्ष को अपना 100 प्रतिशत नैतिक समर्थन देने का आधिकारिक ऐलान किया है। वे बुधवार (22 जुलाई) को खुद दिल्ली पहुंचकर मैदान में उतर रहे हैं।
उनके यात्रा कार्यक्रम के अनुसार सुबह 7 बजे वे जालना जिले स्थित अपने पैतृक गांव अंतरवाली सराटी से रवाना होंगे। वाया औरंगाबाद वहां से वे छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) होते हुए एक विशेष विमान के जरिए दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे। सुबह 11 बजे वे सीधे जंतर-मंतर के धरना स्थल पर पहुंचेंगे और वहां मौजूद छात्रों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे।
20 जुलाई की बर्बरता पर जरांजे का प्रतिक्रिया
जंतर-मंतर पर छात्रों पर बल प्रयोग को लेकर मनोज जरांगे अत्यंत भड़के हुए हैं। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 20 जुलाई को जिस तरह से निहत्थे छात्रों पर लाठियां चलाई गईं, वह लोकतंत्र की हत्या है।

उनका कहना है, “हमने अपने जीवन में इतनी निष्ठुर और क्रूर सरकार पहली बार देखी है। यह खूनी घटना पूरे देश के माता-पिता और युवाओं के दिल को तोड़ने वाली है।” उन्होंने एक तीखा सवाल उठाते हुए पूछा—अगर देश का भावी डॉक्टर अपनी जायज मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर नहीं उतर सकता, तो फिर इस देश में लोकतंत्र जीवित रहने का क्या अर्थ रह गया?
भाजपा सरकार को दी चुनावी चेतावनी
मनोज जरांगे पाटिल ने सत्ताधारी भाजपा (BJP) पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सत्ता के अहंकार में इतनी डूबी हुई है कि उसे छात्रों के दर्द का अहसास तक नहीं हो रहा।
उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने सोचा कि लाठियों के दम पर युवाओं की आवाज को दबा दिया जाएगा, तो यह उसकी भूल साबित होगी। जरांजे ने कहा कि अगर छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार नहीं मिलेगा, तो इस सरकार के अहंकार को तोड़ना पड़ेगा। इसका भारी खामियाजा बीजेपी को आगामी चुनावों में महाराष्ट्र समेत पूरे देश में भुगतना होगा।
इस समर्थन का राजनीतिक और सामाजिक महत्व क्या है?
मनोज जरांगे पाटिल का जंतर-मंतर आना केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसके कई बड़े संदेश छिपे हैं, मराठा आरक्षण आंदोलन ने दिखाया था कि जरांजे किस तरह युवाओं को एक सूत्र में बांध सकते हैं। NEET आंदोलन में उनकी मौजूदगी से यह विरोध अब किसी एक राज्य या जाति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह ‘युवा बनाम सरकार’ के रूप में एक राष्ट्रीय मुद्दा बन जाएगा।
सरकार पर दबाव बढ़ना केंद्र सरकार अब तक इस मुद्दे को एक ‘छात्रों की परेशानी’ के तौर पर देख रही थी, लेकिन एक बड़े सामाजिक नेता के शामिल होने से इस पर संसद में भी जोरदार बहस होने की संभावना बढ़ गई है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग अब और तेज होगी। जरांजे की आवाज अब विपक्ष के लिए भी एक बड़े हथियार के रूप में काम करेगी।
जब पूरे देश के लाखों छात्र अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर हों, और उन्हें किसी ऐसे नेता का साथ मिले जो खुद सरकार से टकराने की ताकत रखता हो, तो सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। आज सुबह 11 बजे जंतर-मंतर पर मनोज जरांजे पाटिल का भाषण इस बात की गवाही देगा कि NEET का यह आंदोलन अब केवल एक परीक्षा की उड़ान भरने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश के युवाओं का अपने अधिकारों के लिए एक बड़ा जंग है। अब देखना यह है कि क्या केंद्र सरकार इस बढ़ते हुए दबाव के आगे झुकती है या फिर अपने अड़ियल रवैये पर कायम रहती है।
























