Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ राज्य की करोड़ों महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई है। हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक मदद मिलने से गृहणियों के स्वावलंबन को बल मिला है। लेकिन, हाल के दिनों में लाखों महिलाओं के खातों में यह राशि नहीं पहुंची, जिससे उनमें चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। कई जगहों पर खबरें उड़ीं कि सरकार बड़ी संख्या में आवेदन रद्द कर रही है और पात्र महिलाओं को भी इस योजना से बाहर किया जा रहा है।
इन सभी अफवाहों और चिंताओं के बीच, महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने योजना के तहत किस्तों के रुकने और आवेदनों की स्थिति को लेकर एक विस्तृत जानकारी साझा की है। मंत्री ने साफ किया है कि सरकार का किसी भी पात्र महिला के खिलाफ कोई भेदभाव नहीं है, लेकिन तकनीकी और पात्रता के कुछ कारणों से आवेदनों पर रोक लगाई गई है।
आइए, मंत्री अदिति तटकरे द्वारा बताई गई उन 4 बड़े वजहों पर एक नज़र डालते हैं, जिनकी वजह से लाडकी बहिन योजना की किस्त रुकी है और साथ ही जानते हैं कि अगर आप गलती से प्रभावित हुई हैं तो आपको क्या करना चाहिए।
सच क्या है? क्या आवेदन रद्द कर दिए गए हैं?
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि लगभग 80 लाख आवेदन रद्द कर दिए गए हैं। मंत्री अदिति तटकरे ने इन रिपोर्टों को बेबुनियाद बताते हुए स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा पूरी तरह से सच नहीं है। उन्होंने कहा कि हमने किसी भी पात्र महिला का आवेदन खारिज नहीं किया है। जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे उन महिलाओं के हैं जिन्होंने अभी तक आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं की है या जिनमें कुछ तकनीकी खामियां पाई गई हैं।
किस्त रुकने की 4 बड़ी वजहें
मंत्री ने डेटा विश्लेषण के आधार पर आवेदनों में आई असंगतियों को लेकर 4 मुख्य कारणों की ओर इशारा किया है:
1. ई-केवाईसी पूरी न होना
सबसे बड़ी वजह है ई-केवाईसी प्रक्रिया का अधूरा होना। सरकार ने महिलाओं को अपना ई-केवाईसी पूरा करने के लिए लगभग 8 से 10 महीने का समय दिया था। इतनी लंबी अवधि के बावजूद, बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है। बैंक खाते को आधार से लिंक कराना (e-KYC) धनराशि ट्रांसफर करने के लिए अनिवार्य है। जिन महिलाओं ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की, उनकी किस्त जारी नहीं की गई है।
2. आयकर की सीमा से ऊपर आय
योजना का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं को मिलना है जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। आयकर विभाग के डेटा के मिलान के दौरान पता चला है कि लगभग 11.5 से 12 लाख आवेदकों की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक है। योजना के नियमों के अनुसार, आयकर दाता या इससे अधिक आय वाली महिलाएं इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
3. आयु सीमा का नियम
इस योजना का लाभ 21 से 65 वर्ष की आयु की महिलाओं को मिलता है। डेटा स्क्रीनिंग में पाया गया कि करीब 4.75 से 5 लाख आवेदक ऐसे हैं जिनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक है। निर्धारित आयु सीमा से अधिक होने के कारण उनके आवेदनों पर रोक लगाई गई है।
4. चार पहिया वाहन का मालिक होना
आर्थिक स्थिति का आकलन करने के लिए सरकार ने आरटीओ के रिकॉर्ड को भी खंगाला है। जांच में खुलासा हुआ है कि सवा तीन लाख (3.25 लाख) से अधिक आवेदकों के नाम पर वाहन (ज्यादातर चार पहिया) पंजीकृत हैं। वाहन का मालिक होना भी आपकी आर्थिक सक्षमता को दर्शाता है, जिस कारण ऐसे आवेदक योजना के दायरे से बाहर माने गए हैं।
अतिरिक्त कारण: सरकारी कर्मचारी
इनके अलावा, लगभग 14,500 ऐसे सरकारी कर्मचारियों की पहचान की गई है जिन्होंने गलत तरीके से इस योजना का लाभ उठाया था। अब सरकार उनसे यह राशि वसूल करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है, क्योंकि सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारी इस गरीबी रेखा आधारित योजना के पात्र नहीं होते।
पात्र होने के बावजूद किस्त रुकी है? यहाँ करें संपर्क
मंत्री अदिति तटकरे ने स्पष्ट कहा है कि अगर कोई महिला योजना की पात्र है, लेकिन फिर भी उसका लाभ रुक गया है, तो वह निराश न हो। डेटा में तकनीकी गलतियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
यदि आपके पास वाहन नहीं है, आपकी आय 2.5 लाख से कम है और आपने e-KYC पूरी कर ली है, तो आपको तुरंत **महिला एवं बाल विकास विभाग से संपर्क करना चाहिए। सरकार ऐसे सभी मामलों की पुनः जांच कराएगी।
‘संजय गांधी निराधार’ और ‘लाडकी बहिन’ योजना का फैसला
कई महिलाएं ऐसी हैं जो पहले से ‘संजय गांधी निराधार योजना’ का लाभ ले रही हैं। ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि क्या उन्हें लाडकी बहिन का पैसा नहीं मिलेगा? इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का मकसद है कि कोई भी महिला खाली हाथ न रहे। जो महिलाएं दोनों योजनाओं के दायरे में आती हैं, उन्हें कम से कम एक योजना का लाभ मिलना सुनिश्चित किया जाएगा। नियमों के तहत एक साथ दो योजनाओं का लाभ न मिल पाने की स्थिति में, उन्हें जिस योजना में अधिक लाभ मिलता हो, वह जारी रहेगा।
























