Mahashtami Katha Path: चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन यानी महाअष्टमी का बड़ा धार्मिक महत्व है। इस बार 26 मार्च, गुरुवार को महाअष्टमी मनाई जा रही है। इस दिन नवदुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना का विधान है। मान्यता है कि मां महागौरी की विधिवत पूजा और व्रत कथा सुनने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें रोग-दोषों से मुक्ति मिलती है।
क्यों है व्रत कथा का विशेष महत्व?
धर्म ग्रंथों के अनुसार, महाअष्टमी के दिन केवल पूजा करना ही काफी नहीं है, बल्कि व्रत कथा का पाठ करना भी अनिवार्य माना गया है। बिना कथा के पूजा को अधूरा माना जाता है। इस दिन मां महागौरी के साथ-साथ कन्या पूजन का भी विशेष फल मिलता है।
मां महागौरी की व्रत कथा (Mahagauri Vrat Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए अत्यंत कठोर तपस्या की थी। तपस्या के दौरान उन्होंने अन्न और जल का भी त्याग कर दिया था। लंबे समय तक चली इस तपस्या के कारण मां का गौर वर्ण काला पड़ने लगा था।
यह भी पढ़ें : आज इन राशियों की बदलेगी तकदीर, करियर और कारोबार में आएगी तेजी
अंत में, मां की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसके बाद भगवान शिव ने अपनी जटाओं में स्थित गंगा जल से मां पार्वती का स्नान कराया। गंगाजल के स्पर्श मात्र से मां का शरीर पुनः अत्यंत गौर और कांतिमय हो गया। मां पार्वती के इसी देदीप्यमान और गौर स्वरूप को ‘महागौरी’ के नाम से पूजा जाता है।
जाने पूजन का फल
बता दें कि माना जाता है कि महाअष्टमी के दिन इस कथा का पाठ करने और मां महागौरी की विधिवत पूजा करने से भक्तों को आत्मिक ज्ञान और शक्ति की प्राप्ति होती है। मां महागौरी अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर करती हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि लाती हैं।






















