केजरीवाल का ममता को फोन: बंगाल चुनाव से पहले विपक्षी एकता को नई धार

Bengal Elections: फोन पर हुई इस चर्चा का दायरा सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रहा। दोनों नेताओं के बीच 'संघीय ढांचे' (Federal Structure) की रक्षा और केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग को लेकर एक जैसा रुख देखा गया। भारतीय राजनीति में ममता और केजरीवाल को 'स्ट्रीट फाइटर्स' के रूप में देखा जाता है।

केजरीवाल ने ममता के साथ खड़े होने का दिया संदेश

HIGHLIGHTS

  • चुनाव से ठीक पहले अरविंद केजरीवाल का बड़ा दांव, ममता बनर्जी को दिया समर्थन
  • बंगाल में सियासी हलचल: आप पार्टी ने ममता के साथ मिलाया हाथ
  • विपक्षी गठजोड़ को मजबूती: केजरीवाल का ममता बनर्जी के प्रति खुला समर्थन
  • बंगाल चुनाव से पहले बदले समीकरण, केजरीवाल-ममता बातचीत बनी चर्चा का केंद्र
  • सियासत में नई चाल: केजरीवाल का फोन कॉल और ममता को समर्थन

Bengal Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक एक दिन पहले, विपक्षी एकता के सियासी समीकरणों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। आप पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फोन कर उनका कुशलक्षेम पूछा और चुनाव में उनके प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। चुनावी रणनीतिकारों की मानें तो यह कदम सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि एक सटीक राजनीतिक चाल भी है।

सियासी दांव से अधिक दिखा ‘पारिवारिक’ रिश्ता

सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत लगभग 15 से 20 मिनट तक चली। इस दौरान मंचों पर दिखने वाली सियासी तल्खी की जगह ‘पारिवारिक’ और भावनात्मक गर्माहट देखने को मिली। केजरीवाल ने उन बीते हुए दिनों को याद किया, जब ममता बनर्जी दिल्ली में उनके मुख्यमंत्री पद के धरने के समय समर्थन जुटाने पहुंची थीं। केजरीवाल ने खुद इस पूरी बातचीत को साझा कर इस रिश्ते की गहराई को रेखांकित किया है।

हिंदी भाषी वोटरों पर क्या होगा असर?

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि मतदान से ऐन पहले केजरीवाल का यह फोन एक सोची-समझी रणनीति है। पश्चिम बंगाल में हिंदी भाषी मतदाताओं का एक बड़ा और निर्णायक वर्ग है, जहां अरविंद केजरीवाल की एक अलग छवि है। चुनावी माहौल में केजरीवाल के खुलकर समर्थन से तृणमूल कांग्रेस (TMC) को हिंदी भाषी वोटरों में मनोवैज्ञानिक लाभ मिल सकता है।

‘संघीय ढांचे’ की रक्षा और ‘स्ट्रीट फाइटर्स’ की जोड़ी

फोन पर हुई इस चर्चा का दायरा सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रहा। दोनों नेताओं के बीच ‘संघीय ढांचे’ (Federal Structure) की रक्षा और केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग को लेकर एक जैसा रुख देखा गया। भारतीय राजनीति में ममता और केजरीवाल को ‘स्ट्रीट फाइटर्स’ के रूप में देखा जाता है।

राजनीतिक विश्लेषक मनोज मिश्र के अनुसार कि ममता दीदी और केजरीवाल का रिश्ता केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। यह दो ऐसे नेताओं का मिलन है जिन्होंने अपनी जमीन शून्य से तैयार की है। केजरीवाल बखूबी समझते हैं कि बंगाल में ममता की जीत उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर संजीवनी का काम करेगी और विपक्ष को नई ऊर्जा देगी।

भाजपा का पलटवार- ‘यह है डर का गठबंधन’

वहीं, इस ‘इमोशनल कार्ड’ पर भाजपा ने निशाना साधा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस पूरी बातचीत को निराशा और डर का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ममता सरकार के कुशासन, तोलाबाजी और भ्रष्टाचार से पूरी तरह ऊब चुकी है। अब चाहे वह समर्थन दिल्ली से आए या कहीं और से, बंगाल में परिवर्तन निश्चित है। भाजपा ने आगे कहा कि यह बातचीत दो ऐसे नेताओं के बीच है, जो अपनी राजनीतिक जमीन खिसकते देखकर एक-दूसरे का सहारा ढूंढ रहे हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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