जिष्णू देव वर्मा ने महाराष्ट्र के राज्यपाल पद की शपथ ली

लोक भवन में भव्य समारोह आयोजित (फाइल फोटो)

संध्या समय न्यूज


महाराष्ट्र के राजनीतिक और संवैधानिक इतिहास में बुधवार को एक नया अध्याय जुड़ा। त्रिपुरा के दिग्गज नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री जिष्णू देव वर्मा ने महाराष्ट्र के नए राज्यपाल के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। मुंबई स्थित ‘लोक भवन’ (पूर्व में राजभवन) में आयोजित एक भव्य समारोह में बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने उन्हें शपथ दिलाई।

शपथ ग्रहण समारोह में कौन-कौन शामिल रहे?

इस ऐतिहासिक अवसर पर महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ राजनीति का समर्थ प्रदर्शन हुआ। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और विधानसभा परिषद के सभापति राम शिंदे सहित कई वरिष्ठ मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। राज्य के शीर्ष पदाधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम ने जिष्णू देव वर्मा के शासनकाल की शुरुआत का संकेत दिया। इससे पहले सोमवार को जब जिष्णू देव वर्मा अपनी पत्नी सुधा देव वर्मा के साथ मुंबई पहुंचे, तब हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री ने स्वयं उनका भव्य स्वागत किया। महाराष्ट्र पुलिस ने उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर सम्मानित किया, जो उनके आगमन के महत्व को दर्शाता है।

कौन हैं जिष्णू देव वर्मा?

15 अगस्त 1957 को अगरतला में जन्मे जिष्णू देव वर्मा की पृष्ठभूमि त्रिपुरा के ऐतिहासिक माणिक्य राजवंश से है। वे न केवल एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ हैं, बल्कि कला और संस्कृति के प्रति भी उनका गहरा झुकाव है। उन्होंने 1990 के दशक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी।वर्ष 2018 से 2023 के बीच उन्होंने त्रिपुरा के उपमुख्यमंत्री के रूप में वित्त, ऊर्जा और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला और राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य की कमान सौंपी गई है।

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तेलंगाना से महाराष्ट्र तक का सफर

महाराष्ट्र की कमान संभालने से पहले वर्मा तेलंगाना के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा किए गए हालिया फेरबदल के बाद उन्हें महाराष्ट्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गौरतलब है कि सी.पी. राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद से यह पद रिक्त था और इस दौरान गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत इसका अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।

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