संध्या समय न्यूज
महाराष्ट्र में सरोगेसी और आईवीएफ (IVF) के नाम पर एक बड़ा अवैध धंधा उजागर हुआ है। बदलापुर में चल रही स्त्रीबीज (Oocyte) तस्करी के तार नाशिक तक पहुंचने की बात सामने आई है, जिसके बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डॉ. अमोल पाटिल को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को शक है कि यह रैकेट अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला है।
जाने कैसे उजागर हुआ राज़?
मामले का खुलासा तब हुआ जब बदलापुर उप जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ज्योत्स्ना सावंत के नेतृत्व में एक टीम ने सुलक्षणा गाडेकर के घर पर छापा मारा। इस छापेमारी के दौरान स्त्रीबीज तस्करी का चौंकाने वाला मामला सामने आया। पुलिस ने इस प्रकरण में सुलक्षणा गाडेकर, अश्विनी चाबुकस्वार और मंजुषा वानखडे के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
नाशिक का संबंध और डॉक्टर की गिरफ्तारी
जांच में पता चला कि यह पूरा रैकेट बदलापुर से संचालित हो रहा था, लेकिन इसके सूत्र नाशिक से जुड़े थे। आरोपी आईवीएफ सेंटर के नाम पर जरूरतमंद महिलाओं को पैसों का लालच देकर उनके स्त्रीबीज अवैध तरीके से बेच रहे थे। इस सिलसिले में नाशिस्थित ‘मालती आईवीएफ सेंटर’ के संचालक डॉ. अमोल पाटिल को गिरफ्तार किया गया है। डॉ. पाटिल पर सरोगेट मदर और स्त्रीबीज की अवैध खरीद-फरोख करने का आरोप है।
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अंतरराष्ट्रीय तारों का शक
पुलिस की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह सिर्फ महाराष्ट्र या देश तक सीमित नहीं था। पुलिस को शक है कि इस रैकेट के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर से जुड़े हो सकते हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि विदेशों में मौजूद ग्राहकों को ये स्त्रीबीज लाखों रुपये में बेचे जा रहे थे, जबकि महिलाओं को मामूली रकम दी जाती थी।
दस्तावेजों की जांच शुरू
डॉ. अमोल पाटिल की गिरफ्तारी के बाद नाशिक नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मालती आईवीएफ सेंटर पर पहुंचकर अधिकारियों ने सेंटर के सभी दस्तावेज, मरीजों के रिकॉर्ड और स्त्रीबीज संग्रह की प्रक्रिया की वैधता की जांच शुरू कर दी है। पुलिस सभी संदिग्ध एजेंटों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस रैकेट के अन्य सदस्यों को भी पकड़ा जा सके।























