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जाने इंसान बिना सूर्य के कितने दिन जीवित रह सकता है?

Sun Science News: सूर्य के गायब होते ही आसमान का नजारा पूरी तरह से बदल जाएगा। चांद जो सूर्य की रोशनी को प्रतिबिंबित करके चमकता है, वह भी एकदम से गायब हो जाएगा। आसमान में सिर्फ तारे दिखाई देंगे, लेकिन वे भी उस घने अंधेरे में कहीं न कहीं खो जाएंगे।

सूर्य के गायब होने पर पृथ्वी का क्या होगा? जानें कितनी देर तक जिंदा रह सकेगा इंसान

HIGHLIGHTS

  • सूर्य के बिना पृथ्वी का ठंडा होना शुरू
  • तापमान में तेज गिरावट का खतरनाक असर
  • महासागरों का जमना और समुद्री जीवन का अंत
  • क्या पृथ्वी हमेशा के लिए बर्फ की दुनिया बन जाएगी?
  • सूर्य के बिना पृथ्वी की कक्षा का क्या होगा?

Sun Science News: हमारी सौर मंडल का सबसे महत्वपूर्ण तारा, सूर्य, जीवन का आधार है। हमारे अस्तित्व के लिए प्रकाश, ऊष्मा और ऊर्जा का यह एकमात्र प्राकृतिक स्रोत है। लेकिन कभी आपने सोचा है कि अगर एक दिन अचानक आसमान से सूर्य गायब हो जाए तो क्या होगा? क्या पृथ्वी पर अंधेरा छा जाएगा? क्या हम जमकर मर जाएंगे? और सबसे महत्वपूर्ण बात, इंसान इस विनाशकारी स्थिति में कितनी देर तक जीवित रह पाएगा? यह एक भयावह परिदृश्य है, लेकिन विज्ञान के नजरिए से इसका विश्लेषण करना बेहद दिलचस्प भी है। आइए जानते हैं कि सूरय के लुप्त होने के बाद पृथ्वी पर क्या-क्या घटित होगा और इंसानियत के सामने कौन-सी चुनौतियां आएंगी।

8 मिनट का खामोशी

सबसे पहले तो यह जान लेना जरूरी है कि सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक पहुंचने में लगभग 8 मिनट और 20 सेकंड का समय लेती है। इसका मतलब यह है कि अगर आज सुबह सूर्य गायब भी हो जाए, तो हमें इसकी जानकारी तब तक नहीं होगी जब तक वह 8 मिनट बाद अपना असर न दिखाए। उन 8 मिनटों तक सब कुछ सामान्य रहता है, पक्षी चहकेंगे और दिन की रोशनी बरकरार रहेगी। लेकिन उसके ठीक अगले पल, अचानक पूरी दुनिया घुप्प अंधेरे में डूब जाएगी।

अंधेरे में डूबा चांद और तारे

सूर्य के गायब होते ही आसमान का नजारा पूरी तरह से बदल जाएगा। चांद जो सूर्य की रोशनी को प्रतिबिंबित करके चमकता है, वह भी एकदम से गायब हो जाएगा। आसमान में सिर्फ तारे दिखाई देंगे, लेकिन वे भी उस घने अंधेरे में कहीं न कहीं खो जाएंगे। रात का आसमान, चाहे वह कितना भी साफ क्यों न हो, एकदम काले पत्थर जैसा महसूस होगा। इस अंधेरे के साथ ही पृथ्वी पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो जाएगा। लोग घबराहट का शिकार होंगे और दुनिया भर में अराजकता फैल जाएगी।

तापमान में भारी गिरावट

सबसे बड़ा खतरा होगा ठंड का। सूर्य के गायब होते ही पृथ्वी गर्म होना बंद कर देगी। शुरुआती 24 घंटे के अंदर ही पृथ्वी का औसत तापमान लगभग 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाएगा। शुरू में यह ठंड बर्दाश्त करने लायक लगेगी, लेकिन यह रुकने वाली नहीं है। उसके बाद के कुछ हफ्तों में पूरी दुनिया में जमा देने वाली ठंड फैल जाएगी। महासागरों की सतह पर बर्फ जमने लगेगी, जिससे समुद्री जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा। हालांकि, पृथ्वी का कोर गर्म रहेगा, लेकिन सतह पर जीवन के लिए हालात नामुमकिन होते जाएंगे।

गुरुत्वाकर्षण बल खत्म, पृथ्वी होगी बेघर

सूर्य केवल प्रकाश और ऊष्मा का स्रोत नहीं है, बल्कि यह हमारे सौर मंडल का गुरुत्वाकर्षण केंद्र भी है। सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के बिना पृथ्वी अपनी कक्षा (orbit) को छोड़ देगी। वह अंतरिक्ष में लगभग 29 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से बिना किसी निश्चित दिशा के भटकने लगेगी। पृथ्वी एक ‘रोग प्लैनेट’ (rogue planet) बन जाएगी। हालांकि, यह प्रक्रिया इतनी तेज होगी कि शायद हमें उसका एहसास भी न हो, क्योंकि ठंड और अंधेरे से पहले ही हमाबाला हमारा हो चुका होगा।

फोटोसिंथेसिस रुकने से खाद्य श्रृंखला का अंत

पृथ्वी पर जीवन का मुख्य आधार ‘फोटोसिंथेसिस’ है। सूर्य के गायब होते ही यह प्रक्रिया तुरंत रुक जाएगी। पेड़-पौधे प्रकाश के बिना अपना भोजन नहीं बना पाएंगे। बड़े पेड़ कुछ हफ्तों या महीनों तक अपने भंडारित ऊर्जा से जीवित रह सकते हैं, लेकिन छोटे पौधे कुछ ही दिनों में मर जाएंगे। जैसे ही पौधे मरेंगे, शाकाहारी जानवरों को भोजन नहीं मिलेगा और वे मरने लगेंगे। इसका असर मांसाहारी जानवरों पर पड़ेगा और आखिरकार पूरी खाद्य श्रृंखला भुखमरी की वजह से टूट जाएगी। इंसान भी इस श्रृंखला का हिस्सा है, इसलिए भुखमरी इंसानियत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाएगा।

इंसान कितनी देर तक जिंदा रह सकेगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इंसान इस त्रासदी से बच पाएगा? वैज्ञानिकों का मानना है कि सतह पर रहना लगभग असंभव हो जाएगा। जमीन की सतह पर जीवन जीना काफी ज्यादा ठंड की वजह से नामुमकिन हो जाएगा।

सबसे बड़ी आशा है वे शेल्टर जो जमीन के काफी नीचे बने हों। सिर्फ गहरे भूमिगत बंकर ही इंसानों को सालों तक जिंदा रख सकते हैं। लेकिन यह आसान नहीं होगा। इन शेल्टर्स को ऐसी ऊर्जा पर चलना होगा जो सूर्य पर निर्भर न हो। जियोथर्मल एनर्जी (पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा) या परमाणु ऊर्जा इस समय जीवन रक्षक साबित होंगी।

इन शेल्टर्स में लोगों को कृत्रिम रूप से खाना उगाना होगा और पानी की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि, भूमिगत जीवन भी लंबे समय तक संभव नहीं हो सकता है, क्योंकि संसाधन सीमित होंगे और तकनीकी खराबी का खतरा हमेशा बना रहेगा। लेकिन फिर भी, यही इंसानियत के अस्तित्व के लिए आखिरी उम्मीद होगी।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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