Noida News: भारतीय किसान यूनियन मंच के बैनर तले नोएडा प्राधिकरण के अधिसूचित 81 गांवों के हजारों किसानों ने सोमवार को नोएडा प्राधिकरण की 222वीं बोर्ड बैठक को ‘किसान विरोधी’ करार देते हुए एक निंदा प्रस्ताव पारित किया। किसानों ने बैठक में उठाए गए किसी भी ठोस निर्णय की अनुपस्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
यह बैठक भारतीय किसान यूनियन मंच के प्रधान कार्यालय (शाहपुर गोवर्धनपुर, सेक्टर-128) स्थित शिव मंदिर पर आयोजित की गई, जिसमें संगठन के सभी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।
‘किसानों के साथ किया गया छल’
भारतीय किसान यूनियन मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल त्यागी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि नोएडा प्राधिकरण की 222वीं बोर्ड बैठक में किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बैठक के जरिए केवल किसानों को छला गया है। त्यागी ने कहा, “प्राधिकरण के अधिकारी केवल झूठे आश्वासन देकर किसानों को भटकाने का काम कर रहे हैं। इस किसान विरोधी नीति के कारण किसानों में भारी रोष है।”
उन्होंने बताया कि किसानों ने आपस में निर्णय लिया है कि जल्द ही गांव-गांव में ‘जन जागरण अभियान’ चलाया जाएगा और नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू की जा रही है।
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ये हैं किसानों की प्रमुख 8 मांगें
इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन मंच के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने नोएडा प्राधिकरण के समक्ष 81 गांवों के किसानों की प्रमुख मांगों को रखा, जिन्हें उन्होंने अनसुना बताया। उनकी मांगें इस प्रकार हैं:
- मूल 5 प्रतिशत प्लॉट: जिन किसानों को अब तक मूल 5 प्रतिशत के प्लॉट नहीं मिले हैं, उन्हें तुरंत आवंटित किया जाए।
- न्यायालय के आदेशों का पालन: जिन किसानों के पक्ष में न्यायालय (कोर्ट) से आदेश आ चुके हैं, उन्हें तुरंत अतिरिक्त 5 प्रतिशत का भूखंड या धनराशि दी जाए।
- सैक्टर वाले विकास का मॉडल: सभी 81 गांवों का विकास नोएडा के सैक्टरों की तर्ज पर किया जाए।
- 64.7% मुआवजा और 10% भूखंड: वर्ष 1997 से अब तक सभी किसानों को 64.7 प्रतिशत मुआवजा और 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिया जाए।
- आबादी विस्तार (450 मीटर से 1000 मीटर): नोएडा के सभी 81 गांवों की आबादी को 450 मीटर से बढ़ाकर एक हजार मीटर किया जाए ताकि आबादी का संपूर्ण समाधान हो सके।
- कोटा स्कीम: वर्ष 1976 से 1997 तक के सभी पात्र किसानों को कोटा स्कीम के तहत प्लॉट आवंटित किए जाएं।
- स्वामित्व योजना: गांवों में केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना को तत्काल लागू किया जाए।
- नक्शा नीति में छूट: गांवों में लागू नक्शा नीति को समाप्त किया जाए, क्योंकि यह ग्रामीण परिवेश में व्यावहारिक रूप से लागू नहीं हो सकती।
भारी किसान उपस्थिति रही
इस किसान महापंचायत और बैठक में संगठन के कई वरिष्ठ नेता और हजारों की संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों ने साफ किया कि अगर जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो वे नोएडा प्राधिकरण के मुख्यालय और सड़कों पर उतरकर आंदोलन को तेज करेंगे।


























