Cake And Health: केक का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक मुलायम, मीठी और बेहद स्वादिष्ट बनावट का ख्याल आता है। चाहे जन्मदिन हो, कोई त्योहार हो, या ऑफिस में कोई खास उपलक्ष्य, खुशियों के इस उत्सव को केक के बिना अधूरा माना जाता है। लेकिन आज के दौर में जब लोग अपनी सेहत और फिटनेस को लेकर काफी सजग हो गए हैं, तो केक काटने से पहले एक आम सा लेकिन जरूरी सवाल मन में उठता है— **आखिर एग (अंडे) वाला केक हेल्दी है या फिर एगलेस (बिना अंडे वाला)?
ज्यादातर लोगों को लगता है कि एगलेस केक जरूर हल्का और हेल्दी होता है, जबकि अंडे वाला केक भारी पड़ता है। लेकिन आइए बिना किसी भ्रम में पड़े इस पूरे मामले को तथ्यों के आधार पर समझते हैं।
बिना अंडे वाला केक कम कैलोरी वाला होता है
सबसे पहले तो यह धारणा दिमाग से निकाल दीजिए कि केक से अंडा हट जाने से वह कोई ‘डाइट फूड’ बन जाता है। बेकिंग में अंडे का मुख्य काम बाइंडिंग (सामग्री को जोड़ना) और एयरेशन (केक को फूला हुआ और स्पंजी बनाना) का होता है।
जब केक से अंडा हटा दिया जाता है, तो उसी स्पंजी बनावट और मुलायमपन को बनाए रखने के लिए बेकर्स अन्य विकल्पों का सहारा लेते हैं। इनमें कंडेंस्ड मिल्क, तेल, वनस्पति घी (डाल्डा), अतिरिक्त बेकिंग पाउडर या दही का इस्तेमाल शामिल है। अगर आप एगलेस केक के पोषण तत्वों पर नजर डालेंगे, तो पाएंगे कि 100 ग्राम एगलेस केक में भी लगभग 350 से 370 कैलोरी और 35 से 40 ग्राम चीनी मौजूद होती है। यानी कैलोरी के मामले में यह अंडे वाले केक से कोई कम नहीं है।
अंडे वाले केक में थोड़ी बहुत ‘पोषण’ की भरपाई
अगर हम दोनों की तुलना करें, तो अंडे वाला केक पोषण संबंधी दृष्टिकोण से थोड़ा आगे नजर आता है। अंडा प्रोटीन, विटामिन बी12, विटामिन डी, कोलिन और हेल्दी फैट्स का एक बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत है। जब यह केक में शामिल होता है, तो बेशक उसकी मात्रा बहुत कम होती है, लेकिन फिर भी कुछ पोषक तत्व केक में जरूर आते हैं।
हालांकि, यहां सावधान रहने की जरूरत है। केक को कभी भी प्रोटीन या न्यूट्रिएंट्स का मुख्य स्रोत नहीं माना जा सकता। यह आखिरकार एक मिठाई ही है, जिसमें अंडे का इस्तेमाल सिर्फ बनावट के लिए किया जाता है, न कि हेल्दी डाइट के लिए।
असली खलनायक: मैदा, चीनी और क्रीम
सेहत के लिए केक को नुकसानदेह बनाने वाला असली कारण अंडा नहीं, बल्कि उसमें इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री है।
- मैदा (रिफाइंड फ्लोर): इसमें फाइबर और पोषक तत्वों का बिल्कुल अभाव होता है। यह शरीर में जल्दी पचकर ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ा देता है।
- चीनी: एक बड़े साइज के केक के एक पीस में आपकी पूरे दिन की शुगर खपत का एक बड़ा हिस्सा हो सकता है।
- बटर और क्रीम: केक को रिच और क्रीमी बनाने वाले ये तत्व सैचुरेटेड फैट्स और ट्रांस फैट्स से भरपूर होते हैं, जो हृदय रोगों और मोटापे का कारण बनते हैं।
तुलना करें तो एक एगलेस केक में अंडे की कमी को दूर करने के लिए अक्सर अतिरिक्त तेल या फैट का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे और भी हेवी बना देता है।
वजन और सेहत का ध्यान रखने वालों के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है?
अगर आप वजन कम कर रहे हैं या अपनी डाइट को स्ट्रिक्टली फॉलो कर रहे हैं, तो केवल ‘एग या एगलेस’ के आधार पर केक चुनना गलत होगा।
- समान सामग्री हो तो एग केक: अगर दोनों केक में चीनी, मैदा और फ्रॉस्टिंग की मात्रा बराबर है, तो आप थोड़े से प्रोटीन और न्यूट्रिएंट्स के चक्कर में अंडे वाले केक को चुन सकते हैं।
- वेजिटेरियन हों तो स्मार्ट चुनाव करें: अगर आप शुद्ध शाकाहारी हैं, तो बाजार में मिलने वाले भारी-भरकम एगलेस केक से बचें। आप होममेड ‘ओट्स एगलेस केक’, ‘गेहूं के आटे का बनावटी केक’ या ‘गुड़ (जैगरी) वाला केक’ ट्राई कर सकते हैं।
सेहतमंद तरीके से केक कैसे खाएं?
चूंकि कोई भी केक 100 प्रतिशत हेल्दी नहीं हो सकता, इसलिए इसे खाने का तरीका बदलना जरूरी है:
- पोर्शन कंट्रोल: पूरा केक खाने के बजाय एक छोटा सा पीस लें।
- क्रीम से दूरी: केक के ऊपर लगी मोटी क्रीम और फ्रॉस्टिंग को हटाकर खाएं, क्योंकि इसमें सबसे ज्यादा कैलोरी होती है।
- ड्राई केक चुनें: क्रीम रोल या पाउंड केक की जगह सूखी बिस्कुट जैसे ड्राई केक (जैसे रम केक या फ्रूट केक) का चयन करें।
- समय का ध्यान रखें: केक कभी भी खाली पेट न खाएं। इसे किसी भोजन के बाद डेजर्ट के रूप में लें, ताकि शुगर लेवल जल्दी न बढ़े।

























