Delhi News: राजधानी की प्रमुख शिक्षण संस्था दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने कैंपस में विरोध-प्रदर्शन को लेकर अपनी नीति में बड़ा बदलाव किया है। हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने विरोध-प्रदर्शनों पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को हटाते हुए अब ‘अनुमति आधारित’ व्यवस्था लागू कर दी है। इस नए फैसले के साथ ही छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए नए नियम तय हो गए हैं।
क्या हैं नए नियम?
विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर कार्यालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब कैंपस में किसी भी तरह के धरने, प्रदर्शन, रैली या सभा के लिए पहले से अनुमति लेना अनिवार्य हो गया है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि बिना मंजूरी के कोई भी गतिविधि कैंपस में आयोजित नहीं की जा सकेगी। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे, जिसमें छात्रों का निष्कासन, कर्मचारियों की बर्खास्तगी और जरूरत पड़ने पर पुलिस कार्रवाई भी शामिल है।
यह भी पढ़ें : यूपी सरकार का AI दांव विवादों में, छोटे स्टार्टअप से बड़ा MoU चर्चा
आवेदन करने की प्रक्रिया
नए नियमों के तहत, किसी भी आयोजन के लिए आयोजकों को खुद प्रॉक्टर ऑफिस में जाकर हस्ताक्षर सहित आवेदन जमा करना होगा। यह आवेदन संबंधित पुलिस अधिकारियों को भी देना अनिवार्य होगा। प्रशासन का कहना है कि इससे जवाबदेही तय होगी और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सकेगा। आयोजकों को कार्यक्रम से कम से कम 72 घंटे पहले कार्यक्रम की पूरी जानकारी—जैसे आयोजन का स्वरूप, समय अवधि, प्रतिभागियों की संख्या और वक्ताओं का विवरण—देनी होगी। विश्वविद्यालय ने यह भी साफ किया है कि सोशल मीडिया पोस्ट या पोस्टर को अनुमति नहीं माना जाएगा। साथ ही, कैंपस में बाहरी लोगों की भागीदारी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
टिप्पणी के बाद नए नियम लागू
बता दें कि 13 फरवरी को UGC इक्विटी नियमों को लेकर DU में दो गुटों के बीच हंगामा हुआ था। इस घटना के बाद 17 फरवरी को विश्वविद्यालय ने एक महीने के लिए सभी प्रकार के विरोध प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई, जहां हाई कोर्ट ने इसे मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए आपत्ति जताई। कोर्ट की टिप्पणी के बाद ही विश्वविद्यालय प्रशासन को अपने आदेश में संशोधन करना पड़ा और नए नियम लागू किए गए।





















