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नोएडा की हाईप्रोफाइल सोसाइटी में RWA चुनाव पर विवाद

Noida News: जैसे ही यह जानकारी सामने आई, चुनाव मैदान में कूदे प्रत्याशियों ने मोर्चा खोल दिया। प्रत्याशी राकेश पति त्रिपाठी ने इन अवैध संशोधनों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव अधिकारी किसी विशेष गुट या अन्य उम्मीदवारों के दबाव में आकर विधि विरुद्ध कार्य कर रहे थे।

नोएडा सेक्टर-93 की सोसाइटी में चुनावी बवाल, RWA चुनाव निरस्त

HIGHLIGHTS

  • ₹75 हजार खर्च फिर भी निष्पक्ष चुनाव नहीं, उठे गंभीर सवाल
  • एक्सप्रेस व्यू सोसाइटी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल
  • प्रत्याशियों के विरोध के बाद रद्द हुआ RWA चुनाव
  • वोटर लिस्ट विवाद ने रोका एक्सप्रेस व्यू का चुनाव
  • RWA चुनाव में फर्जीवाड़े का आरोप, जांच की मांग तेज

Noida News: नोएडा के सेक्टर-93 स्थित प्रतिष्ठित एक्सप्रेस व्यू अपार्टमेंट में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के चुनाव को लेकर हड़चूड़ी मची हुई है। चुनाव प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं और संवैधानिक उल्लंघन के गंभीर आरोपों के चलते चुनाव को अंततः रद्द करना पड़ा है। इस घटनाक्रम के बाद सोसाइटी के निवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। निवासियों और प्रत्याशियों का आरोप है कि चुनाव अधिकारी ने मनमानी ढंग से काम किया और नियमों की धज्जियां उड़ाईं। इस पूरे मामले को लेकर अब प्रशासनिक अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए जा रहे हैं।

वोटर लिस्ट में हेराफेरी का बड़ा खुलासा

चुनाव रद्द होने की प्रमुख वजह वोटर लिस्ट में की गई गलत हेराफेरी बताई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार, चुनाव अधिकारी ने आरडब्ल्यूए की मूल वोटर लिस्ट में बिना किसी वैधानिक आधार के 76 नामों का बदलाव कर दिया। यह कदम सोसाइटी के संविधान के खिलाफ माना जा रहा है। नियमों के अनुसार, किसी भी वोटर लिस्ट में बदलाव करने से पहले उसे नोएडा अथॉरिटी की तात्कालिक सूची के साथ मिलाना अनिवार्य होता है, लेकिन यहाँ यह प्रक्रिया पूरी तरह से दरकिनार कर दी गई।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि चुनाव अधिकारी ने बिना सत्यापन के कई किरायेदारों (Tenants) के नाम भी वोटर लिस्ट में शामिल कर दिए। आरडब्ल्यूए के संविधान के तहत किरायेदारों को वोट का अधिकार नहीं होता या फिर इसके लिए विशेष प्रक्रिया अपनानी होती है, जिसका पालन यहाँ नहीं किया गया। इसे संवैधानिक उल्लंघन की श्रेणी में रखा जा रहा है।

प्रत्याशियों ने किया पुरजोर विरोध, चुनाव अधिकारी घिरे

जैसे ही यह जानकारी सामने आई, चुनाव मैदान में कूदे प्रत्याशियों ने मोर्चा खोल दिया। प्रत्याशी राकेश पति त्रिपाठी ने इन अवैध संशोधनों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव अधिकारी किसी विशेष गुट या अन्य उम्मीदवारों के दबाव में आकर विधि विरुद्ध कार्य कर रहे थे। राकेश पति त्रिपाठी और अन्य जागरूक निवासियों ने जब चुनाव अधिकारी के सामने साक्ष्यों के साथ इस मामले को रखा और इन बदलावों का जवाब मांगा, तो वह कोई संतोषजनक उत्तर देने में नाकाम रहे।

निवासियों के एक समूह द्वारा की गई कड़ी आपत्ति और आक्रामक रुख के बाद मामला बिगड़ गया। अंततः, अपनी साख बचाने और बढ़ते विरोध को देखते हुए चुनाव अधिकारी को यह कदम उठाना पड़ा और उन्होंने चुनाव रद्द करने की घोषणा कर दी। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी और सोसाइटी में अविश्वास का माहौल पैदा हो चुका था।

आर्थिक अनियमितता के भी उठे सवाल

यह मामला केवल वोटर लिस्ट तक सीमित नहीं है; आर्थिक पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। निवासियों और प्रत्याशियों ने चुनाव प्रक्रिया में हुए व्यय पर भी सवाल खड़े किए हैं। यह बताया जा रहा है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही सभी प्रत्याशियों से नामांकन के समय एक तय राशि जमा कराई जा चुकी है।

इतना ही नहीं, चुनाव संपन्न कराने के लिए आरडब्ल्यूए (RWA) के फंड से ₹75,000 की एक बड़ी राशि भी निकाली गई थी। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी जब निष्पक्ष और नियमों के अनुसार चुनाव कराना संभव नहीं हुआ, तो निवासियों में आक्रोश स्वाभाविक है। लोगों का कहना है कि अगर इतनी बड़ी राशि ली जाती है, तो उसके बदले में एक पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया का होना जरूरी था, जो पूरी तरह से विफल रही।

सोसाइटी की व्यवस्था अधर में, CDO को सौंपा ज्ञापन

चुनाव रद्द होने के बाद एक्सप्रेस व्यू अपार्टमेंट की वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है। चुनाव रद्द होने से सोसाइटी की प्रशासनिक व्यवस्था अधर में लटक गई है। किसी भी सोसाइटी के सुचारू संचालन के लिए एक मजबूत RWA का होना आवश्यक होता है, लेकिन विवादों के चलते अभी कोई नया आयोग गठित नहीं हो पाया है। वर्तमान स्थिति से निवासियों में गहरी निराशा है।

इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रत्याशी राकेश पति त्रिपाठी ने एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने दावा किया है कि उनके पास चुनाव अधिकारी द्वारा की गई मनमानी और नियम विरुद्ध कार्रवाइयों के सभी साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने अपनी बात को बड़े स्तर पर रखने के लिए इस संबंध में एक विस्तृत ज्ञापन नोएडा प्राधिकरण के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को सौंप दिया है।

मांग: जांच और दोषियों पर कार्रवाई

CDO को दिए गए ज्ञापन में मांग की गई है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। प्रत्याशियों ने मांग की है कि जो भी अधिकारी या व्यक्ति इस धांधली में शामिल है, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, जल्द से जल्द एक पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव अधिकारी नियुक्त किया जाए ताकि सोसाइटी का कामकाज पुनः पटरी पर आ सके।

निवासियों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखते हैं, लेकिन कुछ लोगों की मनमानी ने उनके विश्वास को धक्का पहुंचाया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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