Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की देश की सबसे बड़ी पुलिस व्यवस्था का कमान संभालने वाले राजीव कृष्ण की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं रही है। एक ऐसे अफसर जिन्होंने अपनी कार्यशैली से हर जिम्मेदारी को लील लिया, चाहे वह जिले का एसपी हो या एटीएस को आधुनिक बनाने की चुनौती। 31 मई 2026 को उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्णकालिक डीजीपी की कुर्सी संभालने वाले राजीव कृष्ण, 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनकी इस यात्रा में लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण जिले में दो बार एसएसपी रहना और पेपर लीक मामले को सुलझाकर विवादों से पार पाना शामिल है।
एएसपी से लेकर पहले जिले तक
1991 बैच के राजीव कृष्ण के लिए पुलिस सेवा का आगाज बेहद रोचक रहा है और आईपीएस बनने के बाद उन्हें प्रदेश के कई प्रमुख जिलों में एएसपी के रूप में तैनात किया गया। इलाहाबाद, बरेली, कानपुर और अलीगढ़ जैसे संवेदनशील शहरों में उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने का काम किया। अक्टूबर 1995 से अगस्त 1996 तक उन्होंने एसपी सिटी अलीगढ़ के रूप में अपनी क्षमता का परिचय दिया।
राजीव कृष्ण के करियर का पहला बड़ा मौका तब आया जब उन्हें 10 मई 1997 को फिरोजाबाद का एसपी बनाया गया। फिरोजाबाद उनका पहला जिला था और यहीं से उनके प्रशासनिक कौशल की परख शुरू किया था। फिरोजाबाद के बाद उन्होंने इटावा, मथुरा, फतेहगढ़, बुलंदशहर, नोएडा और आगरा जैसे जिलों में एसएसपी के रूप में कार्य किया। हर जिले में उन्होंने अपराध पर नियंत्रण और जनता के साथ संवाद स्थापित करने पर जोर दिया।
लखनऊ कमान एक अनूठा रिकॉर्ड
राजीव कृष्ण के करियर का सबसे खास पड़ाव लखनऊ रहा है। वह देश के उन चुनिंदा आईपीएस अधिकारियों में शुमार हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दो बार एसएसपी बनने का अवसर मिला और पहली बार 1 दिसंबर 2006 को उन्हें लखनऊ का एसएसपी बनाया गया और वे 16 मार्च 2007 तक इस पद पर बने रहे।
उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब लखनऊ, कानपुर और मेरठ समेत कई बड़े शहरों में डीआईजी की व्यवस्था लागू हुई, तो फिर से राजीव कृष्ण को ही राजधानी की कमान सौंपी गई। दो बार राजधानी की पुलिस का मुखिया होना उनके अनुभव और प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण रहा है।
एटीएस को दिए आधुनिक रूप
राजीव कृष्ण की पुलिसिंग में सबसे महत्वपूर्ण योगदान उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) को देना है। उत्तर प्रदेश में सीरियल ब्लास्ट के बाद तत्कालीन मायावती सरकार ने जब एटीएस बनाने का ऐलान किया, तो इसकी कमान राजीव कृष्ण को सौंपी गई। उन्हें एटीएस का पहला डीआईजी नियुक्त किया गया।
बतौर डीआईजी एटीएस, राजीव कृष्ण ने विभाग को मजबूत नींव दी। उन्होंने यूपी एटीएस को आधुनिक संसाधनों और नई तकनीक से लैस किया। आतंकी गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए उन्होंने इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत किया और विभाग को एक हाईटेक इकाई के रूप में स्थापित किया। आज भी एटीएस के जो आधुनिक ढांचे और तकनीकी देखने को मिलती है, उसकी बुनियाद उन्हीं के कार्यकाल में पड़ी थी।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और वापसी
राजीव कृष्ण की विश्वसनीयता सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं थी। साल 2012 से 2017 तक वह भारत सरकार की प्रतिनियुक्ति पर बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) में तैनात रहे। केंद्रीय बल में उनके अनुभव ने उनके व्यक्तित्व को और व्यापक बनाया और उत्तर प्रदेश लौटने के बाद उन्हें 21 सितंबर 2017 को मुरादाबाद पुलिस अकादमी का एडीजी नियुक्त किया गया। इसके बाद 5 फरवरी 2018 को उन्हें लखनऊ एडीजी जोन बनाया गया। लगभग डेढ़ साल तक लखनऊ जोन का नेतृत्व करने के बाद, वे फिर से मुरादाबाद पुलिस अकादमी के प्रमुख बने, जहां उन्होंने लगभग दो साल कार्य किया।
फरवरी 2021 में राजीव कृष्ण को आगरा जोन का एडीजी बनाया गया, जहां उन्होंने पश्चिमी यूपी में कानून व्यवस्था को संभाला। उनकी ईमानदारी और स्वच्छ छवि को देखते हुए 19 अगस्त 2023 को उन्हें एडीजी विजिलेंस का दायित्व सौंपा गया। विजिलेंस विभाग में उनके कार्यकाल को भी काफी सराहा गया।
संकटमोचक: भर्ती बोर्ड की कमान
राजीव कृष्ण की काबिलियत की सबसे बड़ी परीक्षा मार्च 2024 में आई, जब उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती व प्रोन्नति बोर्ड द्वारा कराई गई सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हो गया था। यह प्रदेश के लिए एक बड़ा संकट था। इस मामले ने पूरे व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। ऐसे में सरकार ने भर्ती बोर्ड की कमान राजीव कृष्ण को सौंपी।
राजीव कृष्ण ने इस चुनौती को सिरे से निपटाया। बतौर डीजी भर्ती बोर्ड, उन्होंने न केवल परीक्षा को फिर से सुचारू रूप से कराया, बल्कि 60,244 पदों पर चयनित हुए अभ्यर्थियों का बिना किसी विवाद या देरी के रिजल्ट भी जारी किया। इस काम से उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे किसी भी संकट को संभालने में माहिर हैं और पारदर्शिता उनकी कार्यशैली का मूल मंत्र है।
यूपी पुलिस के मुखिया के रूप में नया सफर
राजीव कृष्ण की सेवानिवृत्ति तिथि करीब आ रही थी, लेकिन उनके अनुभव की मांग ऐसी थी कि बीते साल 31 मई 2025 को जब कार्यवाहक डीजीपी प्रशांत कुमार का रिटायरमेंट हुआ, तो राजीव कृष्ण को यूपी का कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया। कार्यवाहक डीजीपी का कार्यकाल पूरा होते ही, उनके काम को देखते हुए 31 मई 2026 को उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस का पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त कर दिया गया।
अब जब वे यूपी पुलिस के पूर्णकालिक प्रमुख हैं, उनके सामने प्रदेश की कानून व्यवस्था को और बेहतर बनाने की चुनौती है। राजीव कृष्ण का जून 2029 तक का कार्यकाल बाकी है। उनके पास एक अनुभवी अफसर के तौर पर उत्तर प्रदेश पुलिस को एक नई दिशा देने और आधुनिक पुलिसिंग के नए मानक स्थापित करने का सुनहरा अवसर है। उनकी नियुक्ति से यूपी पुलिस में एक नई ऊर्जा और विश्वास का संचार हुआ है।





















