संध्या समय न्यूज
दिल्ली की विषैली हवा को साफ करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए शुरू किए गए ‘इनोवेशन चैलेंज’ ने अब अपने अगले और निर्णायक चरण में प्रवेश कर लिया है। देश भर से मिली 284 प्रविष्टियों में से चुने गए 22 अभिनव उपकरण (डिवाइसेज) अब जल्द ही दिल्ली के प्रदूषण हॉटस्पॉट्स पर जमीनी परीक्षण (ग्राउंड ट्रायल) के लिए लगाए जाएंगे।
क्या है पूरा खेल?
दिल्ली सरकार के इस अभियान का उद्देश्य ऐसी तकनीक को खोजना है, जो प्रदूषण को कम करने में वैज्ञानिक रूप से साबित हो सके। चयनित 22 डिवाइसेज को आने वाले हफ्तों में शहर के उन इलाकों में लगाया जाएगा, जहां प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक दर्ज किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य पार्टिकुलेट मैटर (PM) और अन्य प्रदूषणकारी तत्वों पर इन मशीनों के असर को वैज्ञानिक तरीके से मापना है।
284 में से चुनी गईं 22 बेहतरीन तकनीकी
पर्यावरण विभाग की ओर से देश भर में इस इनोवेशन चैलेंज के तहत कुल 284 एंट्री प्राप्त हुई थीं। विशेषज्ञ तकनीकी समिति की सख्त स्क्रीनिंग के बाद सिर्फ 22 डिवाइस को ट्रायल-रन के लिए चुना गया है। इन डिवाइसेज को दो बड़ी श्रेणियों में बांटा गया है:
- वाहनों के प्रदूषण पर नियंत्रण (13 डिवाइस): इनमें व्हीकल-माउंटेड एयर प्यूरीफायर, रेट्रोफिट एमिशन-कंट्रोल सिस्टम और बसों-ट्रकों के लिए विशेष स्क्रबर शामिल हैं। ये वाहनों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करने पर केंद्रित हैं।
- खुली हवा को साफ करने के लिए (9 डिवाइस): इनमें स्मॉग-कंट्रोल टेक्नोलॉजी, मॉड्यूलर एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम और डस्ट सप्रेशन यूनिट शामिल हैं। इन्हें खुले स्थानों, सड़कों और निर्माण स्थलों पर इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है।
मंत्री सिरसा ने की समीक्षा बैठक
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए एक अहम बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने टेस्टिंग प्रोटोकॉल, डिवाइस की तैयारी और इनोवेटर्स के साथ तालमेल जैसे मुद्दों पर गहरी चर्चा की। मंत्री सिरसा ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि यह ट्रायल ‘वैज्ञानिक रूप से मजबूत’ और ‘पूरी तरह पारदर्शी’ होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि तय तरीके से निर्णय लेना होगा कि राष्ट्रीय राजधानी के लिए कौन सा समाधान सबसे प्रभावी साबित हो सकता है।
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‘सबूत होगा एकमात्र मानक’
पर्यावरण मंत्री ने कहा, “यह इनोवेशन चैलेंज जमीन पर प्रदूषण कम करने वाले वास्तविक समाधान खोजने का एक मिशन है। जब ये 22 डिवाइस दिल्ली के सबसे प्रभावित इलाकों में ट्रायल के लिए लगाए जाएंगे, तब हमारा एक ही मानक होगा – सबूत। देखा जाएगा कि कौन-सी टेक्नोलॉजी प्रदूषण में साफ और लगातार कमी दिखाती है।” उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार कई मोर्चों पर साथ-साथ काम कर रही है, जिसमें मॉनिटरिंग को मजबूत करना, नियमों का कड़ा पालन और नई तकनीक को बढ़ावा देना शामिल है।
























