Delhi News: दिल्ली में गैंगस्टरों और अपराधियों पर नकेल कसने के अभियान में दिल्ली पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। रोहिणी जिला पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर दिनेश कराला के गिरोह पर जोरदार शिकंजा कसते हुए उसके 5 बड़े गुर्गों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में अत्याधुनिक विदेशी हथियार और कारतूस बरामद किए गए हैं, जिससे गिरोह की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पुलिस के लिए यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि यह ऑपरेशन थाना स्तर पर किया गया है। ज्वाइंट सीपी विजय कुमार ने इसे थाना स्तरीय पुलिसिंग की एक ‘दुर्लभ और बड़ी कामयाबी’ बताया है।
ये हैं बरामद हथियार और गाड़ियां
इस ऑपरेशन में पुलिस ने कुल 17 अत्याधुनिक विदेशी पिस्तौलें बरामद की हैं। इनमें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में शुमार ग्लॉक (Glock), बेरेटा (Beretta) और टर्किश पिस्टल शामिल हैं। हथियारों के साथ 106 जिंदा कारतूस भी बरामद हुए हैं, जिनमें 9 एमएम और .32 बोर की गोलियां हैं।
इसके अलावा, गैंगस्टरों की घूमने-फिरने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक महिंद्रा थार और एक स्कॉर्पियो गाड़ी को भी जब्त किया गया है। पुलिस को शक है कि ये लग्जरी वाहन फर्जी नामों और पहचान पर रजिस्टर्ड कराए गए थे।
कौन हैं ये गुर्गे?
गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है, राहुल माथुर उर्फ डोगर (पुराना अपराधी), आदित्य उर्फ बॉबी (22 वर्षीय, हाल में गैंग में शामिल), कुणाल उर्फ कुकू (22 वर्षीय, हाल में गैंग में शामिल), सुरेंद्र उर्फ काला (पुराना अपराधी), इकबाल (मेरठ से गिरफ्तार, हथियार सप्लायर)। पुलिस के मुताबिक, राहुल, सुरेंद्र और इकबाल पहले से अपराध जगत में सक्रिय थे, जबकि आदित्य और कुणाल नए भर्ती किए गए युवक हैं, जिन्हें गैंग ने बड़ी वारदातों को अंजाम देने के लिए तैयार किया था।
जेल से चल रहा था पूरा नेटवर्क
जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि यह पूरा अपराधिक नेटवर्क कुख्यात गैंगस्टर दिनेश कराला द्वारा जेल की चारदीवारी के अंदर बैठकर संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने बताया कि इस गैंग का मुख्य धंधा बाहरी दिल्ली के कराला, कंझावला और नरेला इलाकों में अवैध कब्जा करना, लोगों को धमकाकर रंगदारी (फिरौती) वसूलना और फर्जी दस्तावेज बनाकर लाखों की जमीनें हड़पना था।
प्लॉट विवाद में हत्या थी ट्रिगर
दिल्ली पुलिस को इस गैंग की पता लगाने की पहली लीड तब मिली, जब कुछ महीने पहले एक प्लॉट विवाद में एक व्यक्ति प्रदीप की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। इस मामले की जांच के दौरान परत-दर-परत खुलती गई और सामने आया कि यह सिर्फ कब्जे का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े हथियारों के तस्करी और रंगदारी नेटवर्क का हिस्सा है।

























