Bihar News: बिहार की सियासत में इन दिनों सरकारी आवासों को लेकर तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश की एनडीए सरकार और विपक्षी दल आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) के बीच ’10, सर्कुलर रोड’ बंगले को लेकर जारी विवाद अब सड़क पर उतरता हुआ नजर आ रहा है। इस मामले में अब नया मोड़ तब आया है, जब आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सीएम सम्राट चौधरी को खुली चुनौती दे दी। उन्होंने सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर सरकार में असली हिम्मत है, तो उसे बंगला जबरन खाली कराकर दिखाए।
सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ हमला
दरअसल, पूर्व सीएम राबड़ी देवी को 10, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस मिलने के बाद मामला गरमाया गया है। इसी बीच रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के जरिए सरकार पर निशाना साधा और उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि यह सरकार जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। अगर सरकार में हिम्मत है, तो वह बंगला जबरन खाली कराकर दिखाए।
रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि बिहार में बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और बढ़ते अपराध जैसी समस्याओं से सरकार बच रही है। इन असफलताओं को छिपाने के लिए विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को परेशान किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह भाजपा और एनडीए की पुरानी कहानी है, जो सत्ता में आते ही बदले की राजनीति पर उतर आती है।
इस विवाद में पूर्व सीएम राबड़ी देवी का रुख भी साफ और काफी सख्त है। शनिवार को जब वह अवकाश से लौटीं और पत्रकारों ने उनसे बंगला खाली करने के आदेश पर सवाल पूछा, तो उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि सरकार चाहे तो उन्हें बलपूर्वक हटाकर दिखाए, लेकिन वह स्वयं यह बंगला खाली नहीं करेंगी।
उनका यह बयान साफ तौर पर सरकार को संदेश देने वाला है कि वह डरकर यहां से जगह नहीं छोड़ने वाली हैं। राबड़ी देवी वर्ष 2006 से लगातार इसी आवास में रह रही हैं और उनका कहना है कि उन्हें कहीं और जाने का कोई आदेश देने का हक सरकार को नहीं है।
‘तुगलकी फरमान’ बताकर घेरी सरकार
रोहिणी आचार्य ने भवन निर्माण विभाग के उस आदेश को ‘तुगलकी फरमान’ करार दिया है और जिसमें राबड़ी देवी को बंगला खाली करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस भेजकर किसी देश की पूर्व सीएम को उनके घर से बेदखल करने की कोशिश लोकतंत्र की हत्या है। यह सत्ता के अहंकार का प्रतीक है।
रोहिणी ने आगे कहा कि सरकार विपक्ष को निशाना बनाने में इतनी व्यस्त है कि उसे जनता की फिक्र नहीं है। राज्य में कानून व्यवस्था चौपट है, बेरोजगारी चरम पर है, लेकिन इनकी नजर सिर्फ हमारे बंगले पर है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और इसका उद्देश्य लालू प्रसाद यादव के परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना है।
गौरतलब है कि भवन निर्माण विभाग ने 27 मई को एक आदेश जारी किया था, जिसमें 10, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को डेयरी एवं मत्स्य मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया गया है। यह बंगला पटना के सबसे वीआईपी इलाकों में आता है, जो लोक भवन और मुख्यमंत्री आवास (1 एने मार्ग) के बिल्कुल नजदीक स्थित है।
इतना ही नहीं, इसी कड़ी में लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को भी अपना सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस मिला है। ऐसे में आरजेडी इसे एक सोची-समझी साजिश के रूप में देख रहा है। पार्टी का मानना है कि सत्तारूढ़ दल विपक्ष को अस्तित्वहीन करने के लिए ऐसे कदम उठा रहा है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और रोहिणी की वापसी
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह विवाद बिहार की राजनीति में एक नए समीकरण को दर्शाता है। विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार के बाद रोहिणी आचार्य ने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने और पारिवारिक मामलों से अलग रहने की घोषणा की थी। लेकिन, अब पारिवारिक किले (बंगले) पर हमले को लेकर वह फिर से मोर्चे पर आ गई हैं।
रोहिणी उस समय काफी सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने अपने बीमार पिता लालू प्रसाद यादव को किडनी दान की थी। इसके बाद उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण सीट से चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन, अब यह ‘बंगला विवाद’ उन्हें फिर से पार्टी की आक्रामक आवाज के रूप में स्थापित कर रहा है।























