Iran US War:पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों में एक बार फिर भूचाल आ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जो शांति की पतली धागे पर बातचीत चल रही थी, वह शुक्रवार तड़के एक बड़ी घटना के बाद से खतरे में पड़ती नजर आ रही है। खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में तनाव का माहौल बन गया है, जब ईरान ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने बुशहर प्रांत के आसमान में एक अमेरिकी सैन्य विमान को मार गिराया है। हालांकि, इस दावे के कुछ ही देर बाद अमेरिका ने इसे झूठ बताकर अपने विमानों की सुरक्षा का हवाला दिया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम और हॉर्मुज जलमार्ग को लेकर एक अहम शांति समझौते की खबरें थीं।
बुशहर में गूंजी विस्फोट की आवाजें
शुक्रवार की सुबह ईरान के तटीय प्रांत बुशहर और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ क्षेत्र में अचानक धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। आसमान में मिसाइलों की रोशनी और भारी गोलीबारी की आवाजों ने आम नागरिकों में दहशत पैदा कर दी। ईरान की प्रमुख समाचार एजेंसियों ‘तस्नीम’ और ‘फार्स’ ने तत्काल इस घटना की जानकारी देते हुए दावा किया कि यह कोई साधारण गतिविधि नहीं, बल्कि एक सफल सैन्य कार्रवाई थी।
बता दें कि ईरानी स्टेट टीवी के मुताबिक, बुशहर प्रांत के जाम काउंटी के गवर्नर मसूद तंगेस्तानी ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि आज रात उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने एक दुश्मन के लड़ाकू विमान को इंटरसेप्ट (रोका) कर सफलतापूर्वक मार गिराया है। गवर्नर तंगेस्तानी के बयान में साफ तौर पर कहा गया, “आज रात एयर डिफेंस सिस्टम ने एक दुश्मन के लड़ाकू विमान को इंटरसेप्ट कर सफलतापूर्वक मार गिराया है।” ईरानी मीडिया ने इस विमान को ‘अमेरिकी’ करार दिया है, हालांकि उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि मार गिराया गया विमान किस प्रकार का था—ड्रोन या मानवसहित लड़ाकू जेट।
अमेरिका ने किया साफ इनकार
ईरान के इस बड़े दावे के बीच अमेरिकी प्रशासन ने स्थिति को संभालते हुए तुरंत सफाई दी। अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) और अन्य अधिकारियों ने ईरान की इस बात को सिरे से खारिज कर दिया। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने साफ किया कि इस क्षेत्र में अमेरिका के किसी भी विमान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनकी सभी विमानें सुरक्षित हैं और क्षेत्र में उनकी कोई भी गतिविधि संचालित है। अमेरिका ने ईरान के इन दावों को ‘झूठा’ और ‘प्रोपेगैंडा’ करार देते हुए कहा कि ऐसी कोई घटना घटित नहीं हुई है। अमेरिका के इनकार के बाद अब यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर आसमान में उड़ने वाली वह वस्तु क्या थी जिसे ईरान ने मार गिराया? क्या वह कोई ड्रोन था या फिर यह पूरा मामला ईरान की ओर से अपनी ताकत दिखाने का जरिया था?
शांति समझौते पर पानी
हैरानी की बात यह है कि यह तनावपूर्ण घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब मध्य-पूर्व में शांति की उम्मीदें पल्लवित हो रही थीं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के अस्थाई युद्धविराम और हॉर्मुज जल मार्ग को खोलने को लेकर एक ‘शांति समझौते’ पर सहमति बनने के कगार पर थी। यह समझौता दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने का एक बड़ा कदम माना जा रहा था।
लेकिन, जहां एक तरफ राजनयिक मेज पर शांति का खाका तैयार हो रहा था, वहीं दूसरी ओर खाड़ी क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं की गतिविधियों ने स्थिति को एक बार फिर गर्मा दिया है। यह घटना शांति वार्ताओं पर सवालिया निशान लगा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर दोनों पक्ष एक-दूसरे के दावों को लेकर सख्त रुख अपनाते हैं, तो शांति समझौते की डोर टूट सकती है।
अमेरिका की कठोर कार्रवाई: तेल पर नई पाबंदियां
इस सैन्य तनाव के बीच, अमेरिका ने आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को अमेरिकी सरकार ने ईरान के तेल कारोबार पर नई और कठोर पाबंदियां लगाने का ऐलान किया। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (वित्त विभाग) ने ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई में शामिल आठ जहाजों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
यह कार्रवाई ईरान की अर्थव्यवस्था के रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले ऊर्जा क्षेत्र को सीधे निशाने पर लेती है। ब्लैकलिस्ट किए गए जहाजों में मार्शल आइलैंड्स, कोमोरोस और पनामा में पंजीकृत टैंकर शामिल हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस प्रतिबंध का औचित्य जताते हुए कहा कि इन प्रतिबंधों का एक ही मकसद है—ईरान को तेल राजस्व के जरिए अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने से रोकना। अमेरिका का कहना है कि वह ईरान को उन धनराशियों से वंचित करेगा, जिसका उपयोग वह क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने और आतंकवाद को प्रायोजित करने में करता है।
समुद्र में भारी गोलीबारी और मिसाइलें
शुक्रवार की घटनाओं के सिलसिले में ईरान की ‘फार्स’ न्यूज एजेंसी ने एक और चौंकाने वाली रिपोर्ट दी। एजेंसी के अनुसार, ईरानी सशस्त्र बलों ने देश के दक्षिणी हिस्सों से कई मिसाइलें लॉन्च की हैं। हालांकि, इन मिसाइलों के सटीक ठिकानों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन इससे क्षेत्र में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।
वहीं, ‘तस्नीम’ एजेंसी के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी देने के लिए समुद्र में भारी गोलीबारी की गई है। इस गोलीबारी की आवाजें इतनी तेज थीं कि तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल बन गया। यह सैन्य कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कुछ घंटे पहले ही ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने हॉर्मुज के पास चार वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया था। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से कुछ जहाजों के संबंध अमेरिका से बताए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है।
फिलहाल, पूरा क्षेत्र एक तरह से ‘अनिश्चितता’ के बादलों में घिरा हुआ है। ईरान का दावा और अमेरिका का इनकार इस बात का प्रमाण है कि दोनों देश एक-दूसरे पर हावी होने की कोशिश में लगे हुए हैं। एक ओर जहां शांति वार्ताओं की राह खुलती नजर आ रही थी, वहीं दूसरी ओर सैन्य और आर्थिक मोर्चे पर तल्खी बढ़ती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है कि अगर यह तनाव थमता नहीं, तो यह न केवल क्षेत्रीय शांति बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था के लिए भी घातक साबित हो सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या राजनयिक स्तर पर यह संकट टाला जा सकेगा या फिर खाड़ी एक बार फिर युद्ध के मैदान में बदल जाएगी।
























