US-Iran War: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे घातक युद्ध के 40वें दिन बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान किया है, जिसपर ईरान भी राजी हो गया है। हालांकि, इस बीच इजराइल ने साफ कर दिया है कि यह युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होगा।
इस ऐतिहासिक समझौते को लेकर सबसे बड़ी भूमिका पाकिस्तान की रही। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर की मध्यस्थता से यह डील तैयार हुई।
90 मिनट पहले टली तबाही की डेडलाइन
ट्रंप ने यह नाटकीय घोषणा ईरानी सभ्यता को “खत्म करने” की अपनी डेडलाइन खत्म होने से महज 90 मिनट पहले की। मंगलवार शाम (US टाइम) ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा, “आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा। मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो, लेकिन शायद हो जाए।”
हालांकि, इसके ठीक बाद उन्होंने सीजफायर की घोषणा करते हुए कहा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की रिक्वेस्ट पर मैंने आज रात ईरान भेजी जा रही नुकसान पहुंचाने वाली सेना को रोक दिया है।”
ईरान की बड़ी शर्त: खुलेगा होर्मुज का जलडमरू
सीजफायर के लिए ईरान ने अपनी एक बड़ी शर्त रखी है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने हमले रोकने के एवज में ईरान से ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर राजी होने को कहा है, जिसपर ईरान सहमत हो गया है।
इससे पहले ईरान के पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड ने सख्त चेतावनी दी थी कि अगर ट्रंप पावर प्लांट और पुलों पर हमले की धमकी को अंजाम देते हैं, तो ईरान अमेरिका और उसके सहयोगियों को सालों तक इस क्षेत्र के तेल और गैस से वंचित कर देगा। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी कहा था कि 1.4 करोड़ ईरानी युद्ध में अपनी मर्जी से जान कुर्बान करने के लिए तैयार हैं।
इजराइल का रुख: “लेबनान सीजफायर में शामिल नहीं”
जबकि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की खबर है, इजराइल ने अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया कि उनके लिए यह युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होगा।
नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में कहा, “हमारी सेना ने मंगलवार को ईरान में रेलवे और पुलों पर हमला किया, जिनका इस्तेमाल रिवोल्यूशनरी गार्ड्स करते थे। हम ईरान में आतंकी राज को और भी ज्यादा ताकत के साथ कुचल रहे हैं।” ईरानी अधिकारियों ने भी इन हमलों में कम से कम दो पुलों और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने की पुष्टि की है।
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पिछले 40 दिनों से जारी इस जंग ने पूरे वेस्ट एशिया को तबाही का गोलदान बना दिया है:
*ईरान: यहां 1,900 से ज्यादा लोग मारे गए हैं (हालांकि सरकार ने कई दिनों से आंकड़े अपडेट नहीं किए हैं)।
*लेबनान: 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 10 लाख (1 मिलियन) से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं। इस दौरान 11 इजराइली सैनिक भी मारे गए।
*इजराइल और अन्य: इजराइल में 23 लोगों की मौत की खबर है। खाड़ी अरब देशों और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में 24 से अधिक लोगों की जान गई। वहीं, 13 अमेरिकी सर्विस मेंबर्स भी इस युद्ध में अपनी जान गंवा चुके हैं।
वहीं, अमेरिका में डेमोक्रेट्स लगातार ट्रंप पर ईरानी सभ्यता को खत्म करने की “बेबुनियाद धमकियां” देने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। अब देखना है कि यह दो हफ्ते का सीजफायर क्या इस खूनी जंग को पूरी तरह थाम पाता है, या इजराइल के लेबनान में जारी अभियान से युद्ध का दायरा और बढ़ता है।
























