West Delhi News: पश्चिम दिल्ली में लोगों को स्वच्छ पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। नलों में गंदे और दूषित पानी की सप्लाई का मुख्य कारण सिर्फ तकनीकी खामी नहीं, बल्कि दिल्ली जल बोर्ड (DJR) और सीवर विभाग के अधिकारियों की मनमानी और भ्रष्टाचार है।
एक चौंकाने वाले खुलासे में सामने आया है कि समय पर सीवर की सफाई न कराने के चलते ओवरफ्लो हो रहा गंदा पानी सीधे पीने के पानी की पाइपलाइनों में घुस रहा है, लेकिन अधिकारी इसे लेकर पूरी तरह बेपरवाह हैं। यहां ऐसे ज्यादा देखने को मिलता है पश्चिम दिल्ली के मोहन गार्डन, बुद्ध् बाजार, उत्तम नगर, जनकपुरी और कई इलाको में।
समस्या की असली जड़: सीवर का गंदा पानी नल तक
जानकारों का मानना है कि जब तक सीवर की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक नलों के पानी को साफ करना संभव नहीं है। सीवर की सफाई न होने से आजू-बाजू के इलाकों में भयानक ओवरफ्लो होता है और यही गंदा पानी लीक होकर पीने के पानी की सप्लाई लाइन में मिल जाता है। हालांकि, लोगों की शिकायतों के बावजूद विभाग के पास इसके लिए कोई ठोस उपाय नजर नहीं आता।
अधिकारियों की ‘अनदेखी’ और ‘अभद्रता’ का खेल
दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों का रवैया शिकायतकर्ताओं के लिए किसी यातना से कम नहीं है। शिकायत दर्ज कराने पहुंचने वाले लोगों को बड़े अधिकारियों की अकड़ और अभद्र व्यवहार ही झेलना पड़ता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब मीडिया इस मामले की जानकारी लेने के लिए विभाग के दफ्तर पहुंचता है, तो अधिकारी जानबूझकर छिपने लगते हैं या फिर यह बहाना दे दिया जाता है कि “संबंधित अधिकारी छुट्टी पर हैं।”
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली सीवर विभाग के ये अधिकारी महीने के लगभग 15 दिन ‘आराम’ (छुट्टी) में ही बिताते हैं, जिसका खामियाजा आम आदमी को भरना पड़ता है।
मीडिया सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा: “पैसे दो, तभी सफाई होगी”
एक मीडिया सर्वे में इस पूरे खेल की पोल खुली है। सर्वे में खुलासा हुआ है कि अधिकारी जानबूझ कर शिकायतों पर ध्यान नहीं देते, ताकि सड़कों और गलियों में गंदगी ज्यादा फैल जाए। इसके पीछे की असली वजह है ‘रिश्वतखोरी’।
तथ्यों के मुताबिक, उन इलाकों में जहां लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है, वहां के लोगों या ठेकेदारों को अधिकारियों की ‘जेब भरनी’ पड़ती है। जैसे ही रिश्वत का सौदा पक्का होता है, सीवर की सफाई ‘तुरंत’ हो जाती है। इसके बाद सबसे बड़ा गंदा काम किया जाता है—उस शिकायत को आधिकारिक तौर पर ‘बंद’ कर दिया जाता है, जिसमें झूठ लिख दिया जाता है कि “वहां कोई समस्या नहीं है, शिकायत गलत है।”
बड़ा सवाल: क्या सरकार और प्रशासन सो रहा है?
दिल्ली जैसी मेट्रो सिटी में पीने का पानी सीवर के पानी से दूषित होना और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों का रिश्वतखोरी का खेल खेलना स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। आम जनता को जहरीला पानी पिलाकर अधिकारी अपनी जेब भर रहे हैं और छुट्टियां एंजॉय कर रहे हैं। अब देखना यह है कि दिल्ली सरकार और उच्चस्तरीय प्रशासन इन ‘सीवर माफिया’ अधिकारियों पर कब तक सख्त कार्रवाई करता है और दिल्लीवासियों को बिना किसी ‘रिश्वत’ के स्वच्छ पानी देने का इंतजाम कब करता है।

























