नारद मुनि की जयन्ती: जब संवाद बना सृष्टि का आधार

Narada Jayanti 2026: नारद मुनि की विशेषता यह रही है कि वे समस्त प्रकार की सूचनाओं और जानकारियों के संचार के लिए लगातार ब्रह्माण्ड का भ्रमण करते रहते हैं। उनके लिए कोई भौगोलिक सीमा बाधा नहीं है।

स्वर्ग-पाताल और मर्त्यलोक के बीच सूचना के सेतु थे नारद मुनि, आज है नारद जयन्ती

HIGHLIGHTS

  • पत्रकारिता के इस अवतार को जानें
  • देवलोक के मुख्य सूचना स्रोत थे देवर्षि नारद
  • देवदूत से लेकर प्रथम पत्रकार तक
  • देवर्षि नारद के बहुआयामी व्यक्तित्व पर एक नजर
  • कृष्ण पक्ष प्रतिपदा पर नारद जयन्ती

Narada Jayanti 2026: देवर्षि नारद मुनि के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाने वाली ‘नारद जयन्ती’ आज पूरे देश में विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। पौराणिक मान्यताओं और वैदिक कथाओं के अनुसार, देवर्षि नारद को ब्रह्माण्ड के सार्वभौमिक देवदूत और देवताओं के लिए सूचनाओं के प्राथमिक स्रोत के रूप में जाना जाता है। आधुनिक परिप्रेक्ष्य में उन्हें ‘पृथ्वी के प्रथम पत्रकार’ का दर्जा भी प्राप्त है।

सूचना संचार के अविभाज्य अंग

नारद मुनि की विशेषता यह रही है कि वे समस्त प्रकार की सूचनाओं और जानकारियों के संचार के लिए लगातार ब्रह्माण्ड का भ्रमण करते रहते हैं। उनके लिए कोई भौगोलिक सीमा बाधा नहीं है; वे किसी भी समय स्वर्गलोक, पृथ्वीलोक और पाताललोक के बीच आसानी से यात्रा कर सकते हैं। इसी कारण उन्हें देवलोक और मर्त्यलोक के बीच सूचना का सेतु माना जाता है।

वाद-विवाद ब्रह्माण्ड के हित के लिए

अक्सर यह देखा गया है कि नारद मुनि द्वारा पहुंचाई गई खबरें या सूचनाएं वाद-विवाद का कारण बनती हैं। हालाँकि, पौराणिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद कभी भी व्यक्तिगत या नुकसानदेह नहीं होता, बल्कि यह ब्रह्माण्ड के व्यापक हित और धर्म की स्थापना के लिए होता है।

भगवान विष्णु के परम भक्त

धार्मिक दृष्टिकोण से देवर्षि नारद, भगवान नारायण (विष्णु) के परम भक्त हैं। भगवान विष्णु के नारायण रूप को सत्य का अवतार माना जाता है और नारद मुनि का सारा जीवन उसी सत्य के प्रचार-प्रसार में बीतता है।

कैलेण्डर के अनुसार तिथि का विशेष महत्व

नारद जयन्ती को लेकर अक्सर तिथिगत भ्रम रहता है, लेकिन ज्योतिष और पंचांग के अनुसार इसका निर्धारण बेहद स्पष्ट है। उत्तर भारतीय पूर्णिमान्त कैलेण्डर के अनुसार यह ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। वहीं, दक्षिण भारतीय अमवस्यान्त कैलेण्डर के अनुसार यह वैशाख माह की कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को पड़ती है। हालाँकि चन्द्र माह के नाम भिन्न होने के कारण लोगों को भ्रम होता है, किन्तु वास्तव में दोनों ही कैलेण्डरों में यह त्योहार एक ही दिन पड़ता है।

पत्रकारिता जगत में भी अनूठी प्रासंगिकता

आज के आधुनिक युग में जहाँ सूचना प्रसारण का माध्यम बदल गया है, वहीं नारद जयन्ती का महत्व मीडिया और पत्रकारिता जगत में और भी बढ़ गया है। पत्रकारिता के आदर्शों—सच्चाई, निष्पक्षता और सूचना के अधिकार के प्रतीक के रूप में आज भी देवर्षि नारद को याद किया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न साहित्यिक और पत्रकारिता संगठनों द्वारा भी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें सर्वश्रेष्ठ पत्रकारिता को सम्मानित किया जाता है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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