श्रद्धा तिवारी
Mumbai News: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, मुंबई ने एक नई शुरुआत की है जो टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। टेक्सटाइल कमिश्नर वृंदा देसाई की अध्यक्षता में, रीफाइबर (ReFiber) और ओटररी (OterRi) ने मिलकर एक मेगा अपसाइक्लिंग पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य पुराने कपड़ों का पुन: उपयोग, कचरे में कमी और सृजनात्मक रोजगार को बढ़ावा देना है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल पर्यावरण संरक्षण है, बल्कि यह समाज को सशक्त बनाने और उद्योग में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने का भी प्रयास है।
अपसाइक्लिंग अभियान शुरू
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर, ओटररी (OterRi) द्वारा संचालित रीफाइबर (ReFiber) ने एक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुंबई का बड़ा पोस्ट-कंज्यूमर टेक्सटाइल वेस्ट (इस्तेमाल किए गए कपड़ों का कचरा) संग्रह और अपसाइक्लिंग अभियान शुरू किया। इस पहल का उद्देश्य पुराने और उपयोग किए गए कपड़ों को इकट्ठा करना, उन्हें पुनः उपयोग के लिए तैयार करना और उनसे नए उपयोगी उत्पाद बनाना है।
इसके माध्यम से कपड़ों के कचरे को कम करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और समाज के लिए सकारात्मक प्रभाव पैदा करने का प्रयास किया जाएगा। इस पहल के तहत, रीफाइबर (ReFiber) 5 जून से 12 जून तक पूरे मुंबई में पुराने कपड़े इकट्ठा करने का विशेष अभियान चलाएगा। इस दौरान नागरिकों, संस्थाओं और विभिन्न समुदायों से अपील की जाएगी कि वे अपने इस्तेमाल किए हुए कपड़े रीफाइबर के कलेक्शन सेंटरों या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से दान करें।
प्रोडक्ट्स मार्केटप्लेस का शुभारंभ
कार्यक्रम में रीफाइबर अपसाइक्ल्ड प्रोडक्ट्स मार्केटप्लेस का भी शुभारंभ किया गया। इस मंच पर टिसर (Tisser) से जुड़ी महिला कारीगरों द्वारा बनाए गए हस्तनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए गए। यह प्लेटफॉर्म पुराने कपड़ों और कपड़ा कचरे को उपयोगी और मूल्यवान उत्पादों में बदलने के लिए बनाया गया है। साथ ही, यह देशभर के स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) को रोजगार के अवसर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में मदद करेगा।
कार्यक्रम में टेक्सटाइल कचरा प्रबंधन के लिए तकनीक आधारित समाधानों, भारत के वस्त्र उद्योग में सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने और भविष्य में ‘जीरो-वेस्ट’ (शून्य कचरा) व्यवस्था बनाने के लिए साझेदारी बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई।
टेक्सटाइल कमिश्नर वृंदा देसाई ने बताया
इस अवसर पर महाराष्ट्र सरकार की टेक्सटाइल कमिश्नर वृंदा देसाई ने कहा कि भारत ने कपड़ा रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकॉनमी के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है, लेकिन हमारे घरों से निकलने वाले पुराने कपड़ों को दोबारा उपयोग में लाने की अभी भी बहुत बड़ी संभावना है। रीफाइबर जैसे संग्रह और अपसाइक्लिंग अभियान यह दिखाते हैं कि सरकार, उद्योग और नागरिक मिलकर कपड़ों के कचरे को एक मूल्यवान संसाधन में बदल सकते हैं और साथ ही टिकाऊ रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं। जागरूकता, नवाचार और लोगों की भागीदारी बढ़ाकर हम एक अधिक टिकाऊ और सर्कुलर टेक्सटाइल व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ सकते हैं।”
टिसर (Tisser) की संस्थापक डॉ. मेघा फणसलकर ने कहा, “टिसर में हमारा मानना है कि कचरा वास्तव में एक ऐसा संसाधन है जिसे नए रूप में उपयोग किया जा सकता है। टेक्सटाइल अपसाइक्लिंग के माध्यम से हम फेंके गए कपड़ों और कपड़ों के टुकड़ों को उपयोगी और मूल्यवान उत्पादों में बदल रहे हैं। इसके साथ ही हम महिलाओं को रोजगार के अवसर देकर उन्हें सशक्त भी बना रहे हैं। रीफाइबर जैसी पहल लोगों के लिए सर्कुलर इकॉनमी का हिस्सा बनना और कपड़ा कचरा कम करने में योगदान देना आसान बनाती है। एक टिकाऊ और बेहतर भविष्य बनाने के लिए सभी की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। हर वह कपड़ा जो कचरे के ढेर (लैंडफिल) में जाने से बचाया जाता है, एक अधिक जिम्मेदार और पर्यावरण-अनुकूल दुनिया की ओर बढ़ाया गया कदम है।”























