UP News: उत्तर प्रदेश के मेरठ से चिकित्सा व्यवस्था की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। परतापुर स्थित एक नामचीन अस्पताल में 65 वर्षीय बुजुर्ग की पित्त की थैली निकालने के लिए ऑपरेशन शुरू किया गया, लेकिन डॉक्टरों ने पेट काटने के बाद अचानक सर्जरी बीच में ही रोक दी और उस पर टांके लगा दिए। परिजनों का आरोप है कि सर्जरी अनुभवी डॉक्टरों की बजाय ‘सीखने वाले’ डॉक्टरों ने की, जिससे मरीज की जान जोखिम में पड़ गई है। वहीं, मामला सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों का हंगामा और न्याय की गुहार लगाने लगे।
क्या है पूरा मामला?
मामला परतापुर स्थित आर्यावर्त अस्पताल का है। मंगलवार दोपहर 12 बजे 65 वर्षीय वेद प्रकाश को ओटी (ऑपरेशन थियेटर) में ले जाया गया। डॉक्टर विवेक बंसल और डॉक्टर मलेश शर्मा ने मरीज के पेट में चीरा लगाया, लेकिन कुछ देर बाद ही यह कहकर प्रक्रिया रोक दी कि वे पथरी (गॉलब्लैडर) तक नहीं पहुंच पाए। इसके बाद बिना सर्जरी पूरी किए उन्होंने मरीज के पेट में टांके लगा दिए और तीमारदारों को इस बारे में कोई सही जानकारी भी नहीं दी।
डॉक्टरों पर अभद्रता का आरोप
मरीज के दामाद विजय कुमार ने बताया कि ससुर के पेट में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया था। सभी जांचें पूरी होने के बाद ही ऑपरेशन शुरू हुआ। लेकिन जब परिजनों ने ऑपरेशन अधूरा छोड़ने का कारण पूछा, तो डॉक्टरों ने उनके साथ अभद्रता की। विजय कुमार के अनुसार, डॉक्टरों ने साफ तौर पर कहा, “हमसे ऑपरेशन नहीं होगा, जो करना है कर लो।” इस लापरवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां परिजन तड़पते हुए बुजुर्ग के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
‘सीखने वाले डॉक्टरों’ से कराई गई सर्जरी?
परिजनों ने सबसे बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है कि सर्जरी किसी सीनियर या एक्सपर्ट डॉक्टर ने नहीं, बल्कि सीखने की स्टेज पर खड़े ट्रेनी डॉक्टरों ने की थी। इस खिलवाड़ के चलते बुजुर्ग का ‘सत्यानाश’ हो गया है। फिलहाल वेद प्रकाश गहरी बेहोशी की हालत में है और होश में नहीं आया है, जिससे परिवार में मातम का माहौल है।
परिजनों ने की कार्रवाई की मांग
विजय कुमार ने साफ कहा है कि वे इस मामले को शांत नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा, “जिन डॉक्टरों ने मरीज के जीवन के साथ खिलवाड़ किया है, उनका लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।” परिजनों ने मंगलवार शाम तक अस्पताल में जमकर हंगामा किया और आने वाले समय में पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने की बात कही है।
सीएमओ ने दिया जांच का आश्वासन
इस पूरे विवाद पर मेरठ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉक्टर अशोक कटारिया ने कहा कि अभी उनके पास इस मामले की कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। हालांकि, मामला उनके संज्ञान में आ गया है। सीएमओ ने आश्वासन दिया है कि जैसे ही परिजनों की ओर से शिकायत मिलेगी, पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी।
डॉ. कटारिया ने कहा, “ऑपरेशन थियेटर के अंदर आखिर क्या हुआ और सर्जरी को बीच में क्यों रोका गया, इसकी वास्तविक वजह वहां मौजूद डॉक्टरों को ही बतानी होगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कोई भी कड़ी कार्रवाई करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।”























