Aquarius 2027:उत्तराखंड में आयोजित होने वाले पवित्र कुंभ मेला-2027 को लेकर प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह से चाक-चौबंद हो गई है। देश के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है, ऐसे में उनकी सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसी क्रम में गुरुवार (20 अगस्त) को सचिवालय में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य मेले के दौरान संभावित आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एक मजबूत और चुस्त रणनीति तैयार करना था।
प्राकृतिक चुनौतियों से निपटने के लिए खास रणनीति
उत्तराखंड का भूगोल हमेशा से प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील रहा है। कुंभ मेले के दौरान गंगा नदी में अचानक बाढ़ आने या भूकंप जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए प्रशासन को पहले से ही चौकन्ना रहना होगा। उन्होंने पूरे कुंभ क्षेत्र को सेक्टरों में बांटकर हर सेक्टर के लिए अलग से ‘निकासी योजना’ बनाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
सीबीआरएन समेत हर आपदा के लिए तैयार होगी एसओपी
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु क्राउड मैनेजमेंट, ट्रैफिक नियंत्रण और आग बुझाने की व्यवस्था रहा। मुख्य सचिव ने एक एकीकृत आपदा प्रबंधन योजना बनाने पर जोर दिया, जिसमें सामान्य आपदाओं के साथ-साथ केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) जैसे अत्यंत संवेदनशील आपातकालों को भी शामिल किया गया है। हर संभावित खतरे के लिए स्पष्ट और कारगर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) विकसित किए जाएंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर त्वरित निर्णय लिया जा सके।
सुरक्षा उपकरणों को लेकर ‘खरीदारी’ से आगे बढ़कर सोच रहा प्रशासन
अक्सर सरकारी विभागों में आपदा प्रबंधन के उपकरणों की खरीदारी को ही तैयारी मान लिया जाता है, लेकिन मुख्य सचिव ने इस परंपरा को तोड़ते हुए अधिकारियों को आगाह किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि महज मशीनों और उपकरणों को जमा कर देना काफी नहीं है। सबसे जरूरी है कि यह उपकरण पूरी तरह से ऑपरेशनल (काम करने लायक) हों। इसके लिए उनके नियमित रखरखाव और उन्हें चलाने वाले कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देने पर बल दिया गया। एसडीआरएफ (SDRF) के माध्यम से वर्तमान में मौजूद उपकरणों में आ रही कमियों (Gaps) की पहचान कर उन्हें तुरंत दूर किया जाएगा।
एटीएस और रेस्क्यू टीमों के लिए वास्तविक जैसी मॉक ड्रिल
किसी भी बड़े आपदा प्रबंधन में ‘रिस्पांस टाइम’ सबसे क्रूशियल होता है। इसे कम से कम करने के लिए मुख्य सचिव ने एंटी-टेररिस्ट स्क्वायड (ATS) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सक्रिय करने के आदेश दिए हैं। मेले के उन दिनों और समय पर जब भीड़ अपने चरम पर होगी, तब वास्तविक आपदाओं को दिमाग में रखकर नियमित मॉक ड्रिल किए जाएंगे। इस दौरान वैकल्पिक रास्तों और रेस्क्यू तंत्र की जमीनी परीक्षा ली जाएगी।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल डेटाबेस से मिलेगी ताकत
आधुनिक दौर में पारंपरिक तरीकों से करोड़ों लोगों की निगरानी करना संभव नहीं है। इसलिए बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष बल दिया गया। मेले के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा एकत्र किए जाने वाले डेटा को एक संरचित डेटाबेस के रूप में संजोया जाएगा। यह डेटाबेस भविष्य में होने वाले ऐसे बड़े आयोजनों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में काम करेगा। तकनीकी विशेषज्ञता के लिए आईटीडीए (ITDA) और आपदा प्रबंधन विभाग के साथ मिलकर काम किया जाएगा और जहां जरूरी हो, बाहर से विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जाएंगी।
टेलीकॉम नेटवर्क और अफवाह नियंत्रण पर विशेष फोकस
डिजिटल युग में अफवाहें किसी भी बड़ी घटना को दंगे का रूप दे सकती हैं। मुख्य सचिव ने कम्युनिकेशन मैनेजमेंट को चुस्त करने पर जोर देते हुए अफवाहों को तुरंत रोकने के लिए एक ठोस तंत्र खड़ा करने को कहा है। इसके अलावा, श्रद्धालुओं के कम्युनिकेशन की जरूरतों को देखते हुए टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मोबाइल नेटवर्क की क्षमता कई गुना बढ़ाएं। पीक टाइम में नेटवर्क न फंसे, इसके लिए अतिरिक्त मोबाइल टावर लगाने की योजना बनाई जा रही है।
























