Iran US War: अमेरिका—ईरान के बीच बीते समय में जो शांति की कड़ियाँ जुड़ रही थीं, वे एक बार फिर टूटती हुई नज़र आ रही हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो विश्व के तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है, एक बार फिर दो महाशक्तियों के बीच तनाव का केंद्र बन बैठा है। हालिया घटनाओं ने न केवल दोनों देशों के बीच चल रहे शांति समझौते को ठंडे बस्ते में डाल दिया है, बल्कि क्षेत्र में एक बड़े संघर्ष की आशंकाओं को भी हवा दे दी है ईरान द्वारा ड्रोन दागे जाने की खबरों के बीच अमेरिका ने भी चुप नहीं बैठने का फैसला किया है और उसने तेहरान की रणनीतिक रडार साइट्स पर जोरदार हमला कर दिया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मुठभेड़
अमेरिकी सेंट्रल कमान की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, शनिवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव चरम पर पहुँच बैठा है और अमेरिका का आरोप है कि ईरान की ओर से क्षेत्र में कई हमलावर ड्रोन उड़ाए गए, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा था। अमेरिकी सेना ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए आत्मरक्षा के तहत ईरान के चार ड्रोनों को मार गिराया है। लेकिन यहाँ मामला सिर्फ रक्षात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा।
आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिकी बलों ने ईरान की धरती पर स्थित तटीय निगरानी रडार स्थलों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने बताया कि भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसने गोरुक और केशम द्वीप पर स्थित ईरानी रडार साइट्स पर हमला किया है। यह द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये ईरान के प्रमुख बंदरगाह शहर ‘बंदर अब्बास’ और लारेक के नज़दीक हैं। रडार साइट्स को नष्ट करने का मतलब है ईरान की निगरानी क्षमता में कमी लाना, जिसे अमेरिका ने आत्मरक्षा का हिस्सा बताया है।
ट्रंप का बड़ा दावा और राजनीतिक बयानबाजी
इस सैन्य संघर्ष के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान भी सामने आ रहा है, जो इस समग्र घटनाक्रम की गंभीरता को और बढ़ाता है। इस ताजा घटनाक्रम से कुछ देर पहले एक टीवी इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्यवाही का असर ईरान की सैन्य क्षमता पर साफ़ दिख रहा है, उन्होंने कहा, ‘ईरान के पास अब बस 21-22 फीसदी ही मिसाइलें बची हैं।
ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब दोनों देशों के बीच सीजफायर (युद्धविराम) को बढ़ाने की कोशिशें की जा रही थीं। लेकिन हाल के हमलों ने राजनयिक मोर्चे पर हालात को और पेचीदा बना दिया है। इन हमलों से युद्धविराम के टूटने की नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। फिर भी, ट्रंप ने एक बार फिर विश्वास जताया है कि उनका प्रशासन इस संघर्ष को सफलतापूर्वक समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि ‘हम किसी न किसी तरह से जीतेंगे।’
कुवैत हमले का साया और क्षेत्रीय खतरा
इस हफ्ते की शुरुआत में हुआ कुवैत हवाई अड्डे पर हमला भी इस बढ़ते तनाव की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। ईरानी ड्रोन द्वारा किए गए इस हमले में कुवैत के मुख्य हवाई अड्डे पर स्थित एक यात्री टर्मिनल को भारी नुकसान पहुँचा था। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए, जिससे हवाई अड्डे को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा इस घटना ने न केवल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि युद्धविराम की संभावनाओं पर भी पानी फेर दिया। अमेरिका ने इस हमले को भी ईरान की आक्रामकता का हिस्सा माना है।
स्थिति को और जटिल बनाते हुए, पश्चिम एशिया के दूसरे हिस्सों में भी हालात बिगाड़ते जा रहे हैं। इजरायल और लेबनान के बीच भी युद्ध की आग भड़क रही है। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने दावा किया था कि लेबनानी सरकार और इजरायल के बीच युद्धविराम समझौता हो गया है, लेकिन ईरान समर्थित आतंकवादी संगठन हिज़्बुल्लाह ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। दोनों पक्षों ने एक बार फिर से नए हमले शुरू कर दिए हैं। इजरायली सेना ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है, जिससे वहाँ की स्थिति और भी गंभीर हो गई है।























