ईरान और अमेरिका युद्ध का असर, पांचवें दिन बाजार लुढ़का

भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हमेशा से एक बुरी खबर मानी जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों ने साप्ताहिक आधार पर जबरदस्त उछाल लिया है।

सोने और चांदी सस्ती, लेकिन तेल ने शेयर बाजार जलाया

HIGHLIGHTS

  • कच्चे तेल की आग से डूबे 3 लाख करोड़ रुपये!
  • सेंसेक्स 76000 के नीचे, ट्रंप के टैरिफ ने बिगाड़ा खेल
  • क्रूड 100 डॉलर के पार, निफ्टी 23700 के नीचे लुढ़का
  • ट्रंप की 10% टैरिफ वार, शेयर बाजार में भारी हाहाकार
  • 3 लाख करोड़ डूबे, अब शेयर बाजार में क्या करें?

Share Market Crash: दलाल स्ट्रीट में इन दिनों खूनी सपाटा देखने को मिल रहा है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आग में झुलसकर भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें कारोबारी दिन भारी गिरावट के साथ लाल निशान पर खुला। बीते सत्र में बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 363 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,391 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50 शेयरों वाला इंडेक्स निफ्टी (Nifty 50) 126 अंक टूटकर 23,869 पर आ गया।

इस भारी उतार-चढ़ाव के बीच शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के निवेशकों की पूंजी पर बड़ा अटैक हुआ। मात्र कुछ ही मिनटों के कारोबार में बाजार से 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की चमत्कारिक रूप से वापसी देखने को मिली। इसके बाद बीएसई में लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर 4,73,39,533.09 करोड़ रुपये रह गया। आज के कारोबार की शुरुआत भी गिफ्ट निफ्टी के कमजोर संकेतों को देखते हुए भारी गैप-डाउन के साथ होने की प्रबल संभावना है।

आज के शेयर बाजार की चाल किन फैक्टर्स पर रहेगी निर्भर?

भारतीय शेयर बाजार की आज की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों के प्रभाव में तय होगी। इन्हें इस प्रकार समझा जा सकता है:

1. कच्चे तेल (Crude Oil) का तेज तूफान

भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हमेशा से एक बुरी खबर मानी जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों ने साप्ताहिक आधार पर जबरदस्त उछाल लिया है। गुरुवार को डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड में 6.2 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 7 प्रतिशत की भारी छलांग लगाकर 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार पहुंच गया है। इससे भारत के व्यापार घाटे (Current Account Deficit) बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जिसका सीधा असर रुपये (INR) और शेयर बाजार पर पड़ रहा है।

2. अमेरिका-ईरान युद्ध (US-Iran Conflict) का खतरा

मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। अमेरिकी सेना (US Army) ने स्पष्ट किया है कि उसने ईरान पर अपने ताजा हमलों का दौर पूरा कर लिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, यह लगातार 13वीं रात थी जब अमेरिका ने ईरान पर हमले किए। ये हमले दो घंटे से भी अधिक समय तक चले। इस युद्धकालीन स्थिति ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स में भारी डर पैदा कर दिया है, जिसका नतीजा रिस्क-ऑन (Risk-On) एसेट्स यानी इक्विटी मार्केट से पैसा निकलने के रूप में सामने आ रहा है।

3. ट्रंप टैरिफ (Trump Tariff) का व्यापारिक झटका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लाए गए नए टैरिफ नियमों ने वैश्विक व्यापार को झकझोर कर रख दिया है। अमेरिका ने ‘धारा 301’ के तहत दुनिया भर के 60 देशों पर 10 प्रतिशत से लेकर 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क का ऐलान किया है। इस सूची में भारत को भी शामिल किया गया है, जहां भारतीय निर्यात पर 10 प्रतिशत का बेस टैरिफ लगाया गया है। यह कदम भारतीय निर्यात आधारित कंपनियों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है।

4. एशियाई और अमेरिकी बाजारों का कमजोर प्रदर्शन

भारतीय बाजार को आज ग्लोबल क्यूज से कोई सहारा नहीं मिल रहा है। अमेरिकी शेयर बाजार पिछली रात भर भारी गिरावट झेलते रहे, जहां टेक्नोलॉजी भारी इंडेक्स नैस्डैक (Nasdaq) 2 प्रतिशत से अधिक नीचे आ गया। इसके अगले दिन एशियाई बाजारों ने भी खूनी शुरुआत की। जापान का निक्केई 225 2.85 प्रतिशत और टॉपिक्स 1.35 प्रतिशत लुढ़क गया। दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) में 2.91 प्रतिशत और कोस्डैक (Kosdaq) में 2.64 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी फ्यूचर्स मार्केट में कमजोर खुलने के संकेत दे रहा था।

5. इन्फोसिस (Infosys) के तिमाही नतीजों का असर

घरेलू मोर्चे पर आज आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी इन्फोसिस के Q1 नतीजों पर सबकी नजरें टिकी हैं। कंपनी के पहली तिमाही के नतीजे मिश्रित रहे हैं। इन्फोसिस का नेट प्रॉफिट तिमाही दर तिमाही आधार पर 8.6 प्रतिशत गिरकर 7,769 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, कंपनी का राजस्व 3.9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 48,211 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कंपनी ने इस दौरान 3.6 बिलियन डॉलर की बड़ी डील (Big Deal) भी बैग में डाली है। इन नतीजों का असर आज निफ्टी आईटी इंडेक्स और इन्फोसिस के शेयर पर साफ दिखेगा।

6. जापान की मुद्रास्फीति और सोने-चांदी के भाव

मैक्रो इकोनॉमी की बात करें तो जापान की मुख्य मुद्रास्फीति जून महीने में बढ़ी है। यह लगातार पांचवें महीना है जब यह जापान के केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। जून में सीपीआई 1.6 प्रतिशत रहा, जो मई के 1.4 प्रतिशत से ज्यादा है।

वहीं, सुरक्षित निवेश के विकल्प माने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में आज हल्की नरमी देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना (Spot Gold) 0.1 प्रतिशत गिरकर 4,042.77 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। अमेरिकी सोना वायदा भी 0.1 प्रतिशत टूटकर 4,045.60 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। स्पॉट सिल्वर में भी 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 57.56 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ।

निवेशकों के लिए आज क्या है रणनीति?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर बनी रहती हैं और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव जारी है, तब तक भारतीय शेयर बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव बना रहेगा। सेंसेक्स 76000 और निफ्टी 23700 के निचले स्तरों को तोड़ने के बाद तकनीकी रूप से बाजार में और गिरावट का दबाव देखा जा सकता है। ऐसे समय में निवेशकों को सटीक स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करके ही ट्रेडिंग करनी चाहिए और लंबी अवधि के निवेशकों को इस गिरावट को अच्छे शेयरों में निवेश का मौका तभी तलाशना चाहिए जब बाजार में कुछ स्थिरता दिखने लगे।

Sandhya Samay News

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