दिल्ली: वकीलों के विरोध से दिल्ली की सभी जिला अदालतों में सुनवाई प्रभावित

Delhi News: बार एसोसिएशनों की प्रमुख मांगों में जिला अदालतों के ढांचागत स्तर (इंफ्रास्ट्रक्चर) को आधुनिक और बेहतर बनाना शामिल है। वकीलों का कहना है कि अदालत परिसरों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है, जिसके कारण न्यायिक कार्यों में बाधा आती है।

बार एसोसिएशनों की हड़ताल से दिल्ली की अदालतों में कामकाज बाधित

HIGHLIGHTS

  • दिल्ली की जिला अदालतों में वकीलों की हड़ताल
  • दिल्ली कोर्ट्स में आज नहीं हुआ नियमित कामकाज
  • हजारों पक्षकारों को हुई भारी परेशानी
  • दिल्ली की सभी जिला अदालतों में वकीलों की हड़ताल
  • दिल्ली की अदालतों में वकीलों का बहिष्कार

Delhi News: दिल्ली की सभी जिला अदालतों में आज गुरुवार को न्यायिक कार्य पूरी तरह से ठप रहा। ‘ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली’ की को-ऑर्डिनेशन कमेटी के आह्वान पर वकीलों ने अदालतों के कामकाज का बहिष्कार किया। इस हड़ताल के चलते बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई, जिससे हजारों पक्षकारों (लिटिगेंट्स) को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

जाने क्या है मुख्य मांगें

बता दें कि बार एसोसिएशनों की प्रमुख मांगों में जिला अदालतों के ढांचागत स्तर (इंफ्रास्ट्रक्चर) को आधुनिक और बेहतर बनाना शामिल है। वकीलों का कहना है कि अदालत परिसरों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है, जिसके कारण न्यायिक कार्यों में बाधा आती है। इसके अलावा, जिला अदालतों की वित्तीय क्षेत्राधिकार सीमा (फाइनेंशियल ज्यूरिस्डिक्शन) को वर्तमान दो करोड़ रुपये से बढ़ाकर बीस करोड़ रुपये या फिर पूरी तरह से अनलिमिटेड (असीमित) करने की मांग भी की गई है।

बार एसोसिएशनों ने लगाए गंभीर आरोप

को-ऑर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन डीके शर्मा और सेक्रेटरी विजय बिश्नोी द्वारा जारी एक नोटिस में कहा गया है कि बार एसोसिएशनों की मांगों और सुझावों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका आरोप है कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले बिना बार एसोसिएशनों से किसी भी तरह की सलाह-मशविरा किए लिए जा रहे हैं, जिससे वकीलों में काफी नाराजगी बढ़ रही है।

न्यायिक प्रक्रिया पर असर

हड़ताल के चलते दिल्ली की सभी जिला अदालतों में नियमित सुनवाई, जमानत याचिकाओं और अन्य महत्वपूर्ण न्यायिक प्रक्रियाओं पर गंभीर असर पड़ा। अदालत परिसरों में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन भी किया और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालांकि, बार एसोसिएशनों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य न्याय व्यवस्था को बाधित करना नहीं है, बल्कि इसे और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सशक्त बनाना है, ताकि आम जनता को बेहतर न्याय मिल सके।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now