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“इंसाफ या इंसानियत? हरीश राणा के मामले में कोर्ट का ऐतिहासिक और भावुक निर्णय”

हरीश राणा केस की लड़ाई और कोर्ट का वो भावुक फैसला

Harish Rana Health Update: एम्स में इलाजरत हरीश राणा को ‘सम्मानजनक मौत’ दिलाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सबको भावुक कर दिया। हालांकि, अदालत ने फैसला हरीश के पक्ष में दिया, लेकिन इस केस को लड़ने वाले वकील मनीष जैन के लिए यह जीत भी हार जैसी थी। मनीष जैन ने बताया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया, तो पूरी अदालत में करीब 15 मिनट तक सन्नाटा छाया रहा।

कोर्ट में क्या होता रहा 15 मिनट तक?

मनीष जैन ने टीवी इंटरव्यू में बताया कि जिस वक्त फैसला सुनाया जा रहा था, उस वक्त पूरी कोर्ट भरी हुई थी। कोर्ट रूम से लेकर गैलरी तक, हर तरफ भीड़ थी। सब टकटकी लगाए इंतजार में थे कि आखिर सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला सुनाएगा। फैसला सुनाते वक्त दोनों ही जज भी भावुक हो गए, उनके चेहरे पर ये भाव साफ नजर आ रहा था। उन्होंने कहा कि फैसले के बाद करीब 10 से 15 मिनट तक पूरी कोर्ट शांत हो गई थी। दोनों जजों ने फैसला सुनाने से पहले हरीश के परिवार से मुलाकात की थी और डॉक्टरों से हर पहलू की जानकारी ली थी।

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‘मैं जीत कर भी हार गया’

मनीष जैन ने अपने इस अनुभव को बयां करते हुए कहा कि शायद ऐसा पहली बार हुआ होगा कि कोई वकील मुकदमा जीत कर भी हारा महसूस कर रहा था। मैं जीत कर भी हार गया था। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी आंखों से हरीश को कई बार देखा था, मैं अच्छी तरीके से जानता था कि वह कितने कष्ट में है। 13 साल कोई कम नहीं होता। उसके माता-पिता और परिवार ने जिस तरह उसकी सेवा की, वो शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि अब सुकून बस इस बात का है कि अदालत ने स्थिति को समझा और एक ऐसा फैसला दिया जो देश की न्यायपालिका की इतिहास में नजीर पेश करेगा।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने 338 पन्ने के फैसले में कई अहम निर्देश दिए हैं।

  • पैसिव यूथेनेशिया नहीं कहा: कोर्ट ने इसे ‘पैसिव यूथेनेशिया’ मानने से इनकार किया है। मनीष जैन ने स्पष्ट किया कि यूथेनेशिया का मतलब एक्टिविटी होना है, और एक्टिविटी पूरे देश में मनाही है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘विद होल्डिंग’ (With Holding) और ‘विद ड्राइंग’ (With Drawing) कहा है। हरीश राणा के केस में यह ‘विद ड्राइंग’ होगा, यानी उसके शरीर में जो भी ट्यूब लगी है, उसे रिमूव किया जाएगा।
  • CMOs को निर्देश: कोर्ट ने देश भर के सभी जिलों के चीफ मेडिकल ऑफिसर्स (CMOs) को प्राइमरी और सेकेंडरी मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश दिया है। अब अगर कोई लंबे समय से बीमार मरीज आएगा, तो मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर ही जुडिशियल मजिस्ट्रेट संज्ञान लेंगे। इससे मरीजों को कोर्ट का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
  • समय सीमा: अदालत ने सभी CMOs को एक महीने के भीतर (11 अप्रैल से पहले) अपनी रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कराने को कहा है।

हरीश राणा की स्थिति

हरीश राणा 14 मार्च से एम्स के पैलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती हैं। उनके शरीर में तीन ट्यूब लगी हैं- गले से बलगम निकालने के लिए, पेट में फीडिंग के लिए और यूरिन के लिए। इन्हें चरणबद्ध तरीके से निकाला जाएगा। मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होने के कारण हरीश की स्थिति के बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं दी जा रही है। वकील मनीष जैन ने बताया कि उन्होंने परिवार से हरीश का हाल-चाल पूछना बंद कर दिया है, क्योंकि इस स्थिति में कुछ पूछना ठीक नहीं है।

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कैसे मिला परिवार को कानूनी सहायता?

मनीष जैन ने बताया कि हरीश का परिवार ब्रह्मकुमारी के जरिए उनके संपर्क में आया था। सिस्टर लवली ने हरीश के पिता से उनकी मुलाकात कराई थी। उन्होंने कहा कि यह केस अन्य लोगों के लिए नजीर साबित होगा, जो लंबे समय से इच्छा मृत्यु की आस लगाए बैठे हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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