Diwali 2026 Shubh Muhurt: कार्तिक मास की अमावस्या को दीपों का पर्व दीपावली पूरे देश में हर्षोल्लास से मनाई जाती है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार इस रात मां महालक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और जिन घरों में साफ-सफाई, रोशनी और श्रद्धा होती है, वहां स्वयं विराजमान होती हैं। पौराणिक कथाओं में इस दिन का संबंध भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने से भी जोड़ा जाता है। उनके स्वागत में नगरवासियों ने घर-घर दीप जलाए थे, तभी से यह पर्व प्रकाश, उत्सव और समृद्धि का प्रतीक बन गया। आइए जानते हैं दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त, सही पूजा विधि और मां लक्ष्मी की प्रिय चीजें।
दीपावली की रात क्यों है इतनी खास?
शास्त्रों में दीपावली की रात को ‘महानिशा’ कहा गया है। मान्यता है कि इसी रात मां लक्ष्मी निश्चिंत भ्रमण करती हैं और पूर्ण श्रद्धा से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है। विधि-विधान से पूजन करने से घर से दरिद्रता दूर होती है और पूरे वर्ष सुख, शांति तथा शुभ-लाभ बना रहता है। इसीलिए धन और समृद्धि की कामना के लिए दीपावली की रात सबसे उपयुक्त अवसर मानी जाती है।
लक्ष्मी जी के साथ गणेश पूजा क्यों जरूरी?
मां लक्ष्मी धन और संपत्ति की देवी हैं, जिनका संबंध ज्योतिष में शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है। इनकी उपासना से धन, मान-सम्मान, यश और दांपत्य जीवन में सुख मिलता है। लेकिन शास्त्र कहते हैं कि धन के बिना विवेक ही बर्बादी है — इसलिए लक्ष्मी पूजा से पहले भगवान गणेश की पूजा अनिवार्य मानी गई है। गणपति बुद्धि और विघ्नहर्ता हैं; उनकी कृपा से अर्जित धन का सही उपयोग होता है और कोई बाधा भी पूजा के मार्ग में नहीं आती।
दिवाली पर कैसे करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा?
दीपावली के दिन घर की पूर्व दिशा या ईशान कोण में साफ चौकी स्थापित करें। उस पर लाल या गुलाबी कपड़ा बिछाएं। सबसे पहले भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें और उनके बाईं ओर मां लक्ष्मी की प्रतिमा रखें। इसके बाद पूजा स्थल को फूलों से सजाएं। पूजा शुरू करने से पहले अपने ऊपर जल छिड़ककर संकल्प लें।
भगवान गणेश को फूल, अक्षत और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें। दोनों देवी-देवताओं को फल, फूल और मिठाई का भोग लगाएं। सबसे पहले गणेश जी के मंत्रों का जाप करें और फिर मां लक्ष्मी के मंत्रों का स्मरण करें। अंत में लक्ष्मी-गणेश की आरती करें और शंख बजाएं। पूजा पूरी होने के बाद घर के मुख्य द्वार, आंगन और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर दीपक जलाएं।
दिवाली 2026: कार्तिक अमावस्या की तिथि और समय
पंचांग के अनुसार इस बार अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर की रात 12:31 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर दीपावली का पर्व 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। चूंकि अमावस्या दोपहर से पहले शुरू हो रही है, इसलिए शाम के मुहूर्त में पूजा करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।
दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा के शुभ मुहूर्त
मुहूर्त | समय |
प्रदोष काल (लक्ष्मी पूजा) | शाम 5:34 बजे से रात 8:09 बजे तक |
वृषभ काल (सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त) | शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक |
निशीथ काल (मध्यरात्रि पूजा) | रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक |
अमावस्या तिथि प्रारंभ | 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे |
अमावस्या तिथि समाप्त | 9 नवंबर, रात 12:31 बजे |
यानी प्रदोष काल में भक्तों को पूजा के लिए कुल 2 घंटे 35 मिनट का शुभ समय मिलेगा। इसके भीतर शाम 5:54 से रात 7:50 बजे तक का वृषभ काल सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि यह स्थिर लग्न का काल होता है। ज्योतिष में इसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है — इस समय की गई पूजा का फल टूटता नहीं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। किसी कारण से शाम में पूजा न हो सके तो निशीथ काल यानी मध्यरात्रि में भी मां लक्ष्मी की आराधना की जा सकती है।
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा की सही विधि
- घर की पूर्व दिशा या ईशान कोण में चौकी रखें और उस पर लाल या गुलाबी रंग का कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें, फिर उनकी दाहिनी ओर मां लक्ष्मी की प्रतिमा रखें।
- आसन पर बैठकर चारों ओर जल का छिड़काव करें और संकल्प लें।
- पूजा स्थल पर घी का एक मुखी दीपक जलाएं।
- दोनों देवताओं को फूल, अक्षत और मिठाई अर्पित करें।
- सबसे पहले गणेश मंत्रों का जाप करें, इसके बाद लक्ष्मी मंत्रों का स्मरण करें।
- अंत में दोनों की आरती उतारें और शंख बजाकर परिवार को प्रसाद बांटें।
दीपक जलाते समय इस मंत्र का करें जाप
दीपावली दीपक के बिना अधूरी है। मुख्य पूजा स्थल पर मां लक्ष्मी के सामने घी का एक मुखी दीपक और गणपति के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। घर के अन्य कोनों, मंदिर और कुएं के पास तिल या सरसों के तेल के दीपक रखें। दीप जलाते समय यह मंत्र बोलें —
“शुभं करोति कल्याणम्, आरोग्यं धनसम्पदा। शत्रुबुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते॥”
मां लक्ष्मी की प्रिय चीजें और भोग
मां लक्ष्मी को कमल का फूल सबसे प्रिय है। कमल गट्टे (खूबसूरत गट्टे) की माला से पूजन और मंत्र जाप करने से माता प्रसन्न होती हैं और जीवन में धन की कमी नहीं रहती। भोग में चावल की खीर और मखाना अर्पित करें; इसके अलावा खील, बताशा, नारियल और मीठा पान भी शुभ माने जाते हैं।



























