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जानें राष्ट्रपति के ‘द रिट्रीट’ की अनसुनी और दिलचस्प कहानी

President's Summer Residence News: भारत का राष्ट्रपति ग्रीष्मकालीन आवास हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से लगभग 13 किलोमीटर दूर 'मशोबरा' (Mashobra) में स्थित है। शिमला का यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। 'द रिट्रीट' नाम से मशहूर यह इमारत राष्ट्रपति का ग्रीष्मकालीन आधिकारिक आवास है।

राष्ट्रपति भवन नहीं, ये है राष्ट्रपति का ‘समर पैराडाइज’

HIGHLIGHTS

  • भूकंपरोधी तकनीक से बना राष्ट्रपति का ऐतिहासिक आवास
  • धज्जी शैली में बना राष्ट्रपति का ग्रीष्मकालीन महल
  • राष्ट्रपति का दूसरा घर, जहां आम लोग भी कर सकते हैं सैर
  • शिमला की वादियों में छुपा है राष्ट्रपति का आलीशान निवास
  • राष्ट्रपति का समर रिट्रीट अब पर्यटकों के लिए भी खुला

President’s Summer Residence News: भारत की राजधानी दिल्ली स्थित रायसीना की पहाड़ी पर बना ‘राष्ट्रपति भवन’, अपनी भव्यता और वास्तुकला के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यह भारत के प्रथम नागरिक का आधिकारिक कार्यालय और मुख्य आवास है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि दिल्ली की धूप और भीषण गर्मी से बचने के लिए राष्ट्रपति का एक और आधिकारिक निवास है? यह निवास दिल्ली की आबोहवा से कोसों दूर, पहाड़ों की गोद में बसा एक मनमोहक हिल स्टेशन है। जब गर्मियों में मैदानी इलाकों का पारा बढ़ता है, तो देश का सर्वोच्च पदासीन अधिकारी अपना तापमान कम करने और प्रकृति के करीब जाने के लिए इस खूबसूरत जगह पर शिफ्ट हो जाता है। आइए, जानते हैं इस खास जगह के बारे में, जिसे कहा जाता है-‘द रिट्रीट’ (The Retreat)।

मशोबरा में स्थित शांतिपूर्ण ठिकाना

भारत का राष्ट्रपति ग्रीष्मकालीन आवास हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से लगभग 13 किलोमीटर दूर ‘मशोबरा’ (Mashobra) में स्थित है। शिमला का यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। ‘द रिट्रीट’ नाम से मशहूर यह इमारत राष्ट्रपति का ग्रीष्मकालीन आधिकारिक आवास है। हर साल गर्मियों के मौसम में राष्ट्रपति अपने पूरे कार्यालयीन अमले और स्टाफ के साथ कुछ दिनों के लिए यहां आते हैं। यह केवल एक छुट्टी का स्थल नहीं है, बल्कि यहां से ही देश के प्रशासनिक, सांवैधानिक और सांस्कृतिक कार्यों का संचालन किया जाता है। पहाड़ों की ठंडी हवा और हरी-भरी वादियां राष्ट्रपति को दिल्ली की भीड़-भाड़ और गर्मी से मुक्ति दिलाती हैं।

ब्रिटिश काल की देन है यह परंपरा

शिमला में गर्मियों में राष्ट्रपति के ठहरने की यह परंपरा कोई आधुनिक योजना नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें ब्रिटिश शासन के समय से जुड़ी हुई हैं। आजादी से पहले, जब भारत पर अंग्रेजों का राज था, तब देश की राजधानी कोलकाता और बाद में दिल्ली हुआ करती थी। लेकिन भारत की भीषण गर्मी और उमस ब्रिटिश अधिकारियों के लिए बेहद नागवार गुजरती थी। इसी कारण साल 1863 में, तत्कालीन वायसराय जॉन लॉरेंस (John Lawrence) ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया और शिमला को भारत की ‘ग्रीष्मकालीन राजधानी’ (Summer Capital) घोषित कर दिया।

साल 1864 से, अंग्रेजों का पूरा सरकारी महकमा मई के महीने में बैलगाड़ियों और पालकियों के जरिए शिमला पहुंच जाता था। करीब 6 महीने तक यहां से ही भारत पर शासन चलता था। शिमला का ठंडा मौसम और शांत वातावरण अंग्रेजों को मंत्रिमंडल की बैठकें करने और फैसले लेने के लिए सबसे उपयुक्त लगता था। इस तरह, यह परंपरा भारत की राजनीतिक और प्रशासनिक विरासत का हिस्सा बन गई।

आजादी के बाद बदला स्वरूप

साल 1947 में जब भारत आजाद हुआ, तो ब्रिटिश सरकार ने भारत को सौंपी गई कई ऐतिहासिक इमारतों में यह रिट्रीट भी शामिल था। शुरुआती दौर में, आजाद भारत के राष्ट्रपतियों का यहां आना नियमित नहीं था। आजादी के बाद पहली बार साल 1951 में भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस एस्टेट का दौरा किया। वह यहां आने वाले पहले भारतीय राष्ट्रपति थे। उनके बाद धीरे-धीरे इस जगह को राष्ट्रपति के लिए एक आधिकारिक ग्रीष्मकालीन निवास के रूप में विकसित किया गया और यहां आने का सिलसिला शुरू हो गया।

1965: आधिकारिक दर्जा प्राप्ति

इस परंपरा को वास्तविक मजबूती और पहचान साल 1965 में मिली। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को यह जगह बेहद पसंद आई। उन्होंने मशोबरा स्थित इस आलीशान भवन को राष्ट्रपति का आधिकारिक ‘समर रिट्रीट’ (Official Summer Retreat) घोषित कर दिया। इस घोषणा के बाद से यह जगह सिर्फ एक आरामगाह नहीं रही, बल्कि इसे संवैधानिक महत्व प्राप्त हो गया। तब से लेकर आज तक, लगभग सभी राष्ट्रपतियों ने इस परंपरा का निर्वाहन किया है और गर्मियों में कुछ वक्त यहां बिताया है। कभी-कभी सुरक्षा व्यवस्था या राष्ट्रपति के स्वास्थ्य कारणों से यह दौरा रद्द हो जाता है, लेकिन यह प्रथा कभी बंद नहीं हुई।

वास्तुकला का अद्भुत नमूना: धज्जी शैली

मशोबरा का राष्ट्रपति निवास केवल अपने इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। यह लगभग 175 साल पुरानी एक भव्य विरासत है। यह भवन घने देवदार (Deodar) के जंगलों से घिरा हुआ है, जो इसे एक रहस्यमय और शांतिमय रूप प्रदान करते हैं।

इस इमारत की सबसे खास बात इसके निर्माण शैली में छुपी है। इसे पारंपरिक ‘धज्जी-दीवार’ (Dhajji style) शैली में बनाया गया है। इस शैली में लकड़ी और मिट्टी का एक विशेष मिश्रण और जोड़ प्रयोग किया जाता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह इमारत भूकंपरोधी है। हिमालय की तलहटी में होने के बावजूद, कई भूकंप आने के बाद भी यह इमारत आज भी मजबूती से खड़ी है। लकड़ी और पत्थर का यह जादुई मेल इसे गर्मियों में अंदर से ठंडा और सर्दियों में गर्म रखता है, जो प्राकृतिक रूप से जलवायु नियंत्रण का एक शानदार उदाहरण है।

आम जनता के लिए खुले द्वार

आमतौर पर राष्ट्रपति के आवास उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र होते हैं और आम नागरिकों के लिए प्रतिबंधित होते हैं। लेकिन ‘द रिट्रीट’ ने इस परंपरा को तोड़ा है। अब यह ऐतिहासिक भवन आम जनता और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। जब भी राष्ट्रपति यहां नहीं होते हैं, लोग इसकी सुंदरता को निहार सकते हैं।

पर्यटक अब ऑनलाइन या ऑफलाइन टिकट बुक करके इस परिसर का भ्रमण कर सकते हैं। यहां आने वाले पर्यटक देवदार के घने जंगलों, पुरानी ब्रिटिश शैली की वास्तुकला और राष्ट्रपति निवास के आलीशान अंदरूनी हिस्सों को देख सकते हैं। यह फैसला राष्ट्रपति भवन को लोगों के करीब लाने की एक सराहनीय पहल है, जिससे लोग अपनी इस धरोहर से जुड़ सकते हैं और इतिहास को समझ सकते हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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