पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद सोशल मीडिया पर फेक न्यूज का एक बड़ा और गंभीर नेटवर्क सक्रिय हो गया है। जांच एजेंसियों और पुलिस के सामने आए तथ्यों ने बड़ी साजिश को उजागर किया है। दरअसल, भारतीय यूजर्स के भेष में पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे संदिग्ध अकाउंट्स देश में भ्रम और दहशत फैलाने की कोशिश में जुटे हैं। खास बात यह है कि ये वही नेटवर्क है जिसने हाल ही में नोएडा मजदूर प्रोटेस्ट के दौरान भी खूनी अफवाहें फैलाकर माहौल बिगाड़ा था।
‘Anushi Tiwari’ के भेष में पाकिस्तानी ऑपरेटर
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लगातार भ्रामक जानकारी पोस्ट की जा रही है। कोलकाता पुलिस की जांच में ‘Anushi tiwari proud Indian’ नाम का एक संदिग्ध हैंडल सामने आया है। पहली नजर में यह अकाउंट किसी भारतीय देशभक्त का लगता है, लेकिन तकनीकी जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। यह हैंडल कई महीनों से पाकिस्तान से ऑपरेट किया जा रहा है। इस अकाउंट को चलाने वाले लोग अपनी असली लोकेशन छिपाने के लिए VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि भारतीय एजेंसियां उन्हें ट्रेस न कर सकें।
बंगाल को लेकर फैलाई गई भयावह फर्जी खबरें
इस हैंडल द्वारा पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद कई सनसनीखेज और झूठे दावे किए गए:
- मौत का झूठा आंकड़ा: एक पोस्ट में दावा किया गया कि चुनावी नतीजों के बाद हुई हिंसा में 19 लोगों की मौत और 98 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।
- सेना तैनाती की अफवाह: एक अन्य पोस्ट में कोलकाता में हिंसा के बाद भारतीय सेना को बुलाए जाने का दावा किया गया। यह खबर काफी तेजी से वायरल हुई, लेकिन जांच में यह भी फर्जी साबित हुई।
नोएडा प्रोटेस्ट: जहां पहले भी खेला गया खूनी खेल
जांच में एक और बड़ा और डरावना कनेक्शन सामने आया है। नोएडा में हाल ही में मजदूरों के प्रोटेस्ट के दौरान जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव था, तब इसी नेटवर्क ने एक ऐसी खबर वायरल की जिसने आग में घी का काम किया।
इन हैंडल्स ने दावा किया था कि “पुलिस ने मजदूरों पर गोली चला दी, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई है।” यह खबर 100 प्रतिशत झूठी थी, लेकिन इसके वायरल होते ही नोएडा में स्थिति तेजी से बिगड़ गई और कई जगहों पर हिंसा भड़क गई थी। बाद में पुलिस ने इस खबर को बाहरी ताकतों द्वारा फैलाई गई साजिश करार दिया था।
एक सुनियोजित नेटवर्क की तरह काम करते हैं ये अकाउंट्स
नोएडा और कोलकाता पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि ये कोई एक अकाउंट नहीं, बल्कि एक पूरे नेटवर्क का हिस्सा हैं। ये अलग-अलग अकाउंट्स एक साथ मिलकर एक ही तरह की फर्जी खबरों को बढ़ावा देते हैं। इस तकनीक को ‘Coordinated Inauthentic Behavior’ कहा जाता है, जिसका मकसद झूठी खबर को इतना वायरल करना है कि लोग उसे सच मान लें और सरकार एवं कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने लगें।
पुलिस-प्रशासन की अपील
पश्चिम बंगाल और नोएडा पुलिस लगातार इन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, इस तरह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर रोक लगाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। अधिकारियों ने आम जनता से गुजारिश की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी सनसनीखेज खबर, तस्वीर या वीडियो को बिना आधिकारिक पुष्टि के शेयर न करें। फेक न्यूज सिर्फ भ्रम नहीं, बल्कि जान-माल को नुकसान पहुंचाने वाली हथियार के रूप में काम करती है। सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।


























