Delhi News: देश में बढ़ते ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के मद्देनजर, दिल्ली सरकार ने बिजली की बर्बादी रोकने और ऊर्जा संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी सरकारी कार्यालयों, विभागों और स्वायत्त निकायों के लिए एक कड़ा आदेश जारी किया है। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य सरकारी ढांचे में बिजली की खपत को नियंत्रित करना और अनावश्यक ऊर्जा के उपयोग पर रोक लगाना है।
इस नए दिशा-निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि दफ्तरों में दिन के समय अनावश्यक रूप से जलने वाली लाइटों को बंद कर दिया जाए। सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों को प्राकृतिक रोशनी का अधिकतम उपयोग करने की हिदायत दी है। यह कदम न सिर्फ बिजली बचाने में मदद करेगा, बल्कि ऊर्जा संकट से निपटने में भी सरकार की मदद करेगा।
ऊर्जा संकट के बीच सरकार की पहल
देश के कई हिस्सों में गर्मियों के मौसम में बिजली की मांग बढ़ जाती है, जिसके चलते कोयले की कमी और बिजली संकट की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे में दिल्ली सरकार का यह फैसला समय की मांग को देखते हुए लिया गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, GAD द्वारा जारी आदेश में सभी विभागाध्यक्षों और स्थानीय निकायों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने अधीन आने वाले सभी कार्यालयों में बिजली की खपत पर कड़ी नजर रखें।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन और ऊर्जा बचाने की अपील के अनुरूप है। केंद्र सरकार की ओर से ऊर्जा सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, और दिल्ली सरकार भी इसमें पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
AC और लाइटिंग पर सख्त पाबंदी
सरकार के इस नए आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात एयर कंडीशनर (AC) के उपयोग को लेकर है। आदेश के अनुसार, सभी सरकारी दफ्तरों में AC का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाएगा। अक्सर देखा जाता है कि दफ्तरों में AC को बहुत कम तापमान पर चलाया जाता है, जिससे बिजली की खपत काफी बढ़ जाती है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के अनुसार, AC का तापमान हर 1 डिग्री बढ़ाने पर लगभग 6 प्रतिशत बिजली की बचत होती है। इसलिए, 24-26 डिग्री पर AC चलाना न सिर्फ बिजली बचाएगा, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर माना जाता है।
इसके अलावा, आदेश में कहा गया है कि दफ्तरों में जरूरत से ज्यादा कूलिंग से बचा जाए। कार्यालय समय समाप्त होने के तुरंत बाद कूलर, एयर कंडीशनर, कंप्यूटर, प्रिंटर और फोटोकॉपी मशीन जैसे उपकरणों को बंद करना सुनिश्चित किया जाए।
प्राकृतिक रोशनी का प्रयोग और मास्टर स्विच
दिल्ली सरकार ने अपने आदेश में प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग पर विशेष जोर दिया है। दिन के समय जहां भी संभव हो, वहां प्राकृतिक रोशनी (धूप) का इस्तेमाल किया जाए। कमरों, गलियारों और ऑफिस परिसरों में जरूरत से ज्यादा रोशनी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। केवल काम की आवश्यकता के अनुसार ही लाइटें चालू रखी जाएंगी।
एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया है, जिसका पालन करना आसान है लेकिन इसका बड़ा प्रभाव पड़ता है। यह है—’मास्टर स्विच’ की व्यवस्था। सरकार ने कार्यालयों में मास्टर स्विच लगाने की सलाह दी है। इसका फायदा यह होगा कि जब काम खत्म होगा और कर्मचारी घर जाएंगे, तो एक ही स्विच दबाकर पूरी बिल्डिंग या विभाग के सभी बिजली उपकरणों को एक साथ बंद किया जा सकेगा। इससे अनावश्यक बिजली खपत में कमी आएगी और स्टैंडबाय मोड पर चल रहे उपकरणों की वजह से होने वाली बर्बादी पर रोक लगेगी।
दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन जरूरी
सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी है कि ये निर्देश उनके विभागों में पूरी तरह से लागू हों। अगर किसी भी दफ्तर में लापरवाही बरती गई, तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे। सरकार का मानना है कि सरकारी कार्यालयों में अनुशासन लाना और संसाधनों का सदुपयोग करना जनता के पैसे की बचत करने जैसा ही है।
पहले से लागू हैं संसाधन बचाने के उपाय
यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली सरकार ने संसाधनों की बचत के लिए कदम उठाए हैं। इससे पहले भी राजधानी में खर्च और ईंधन बचाने को लेकर कई अहम कदम उठाए जा चुके हैं। दिल्ली सरकार ने अपने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग अनिवार्य कर दिया था। मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री और अधिकारी अक्सर मेट्रो और बसों का उपयोग करते हुए देखे जाते हैं, जिससे ईंधन की बचत होती है और प्रदूषण भी कम होता है।
इसके अतिरिक्त, वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) की व्यवस्था और सरकारी वाहनों के सीमित उपयोग जैसे उपाय भी पहले ही अपनाए जा चुके हैं। ये सभी कदम कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और पर्यावरण के अनुकूल काम करने की दिशा में उठाए गए हैं।
भविष्य की रणनीति
दिल्ली सरकार का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक दबाव के इस दौर में, ऊर्जा संरक्षण अब केवल एक विकल्प नहीं बल्कि एक जरूरत बन चुका है। जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम के पैटर्न को देखते हुए यह आवश्यक है कि हम संसाधनों का संजीदगी से उपयोग करें।
अगले कुछ महीनों में, अगर ऊर्जा की मांग और बढ़ती है, तो सरकारी दफ्तरों में बिजली की बचत को लेकर यह अभियान और भी सख्ती से लागू किया जा सकता है। सरकार ने यह संकेत भी दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यह आदेश न केवल बिजली बचाएगा, बल्कि आम जनता के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा कि सरकार ऊर्जा संरक्षण को कितनी गंभीरता से ले रही है।





















