Delhi MCD Mayor News: दिल्ली एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) में आज (29 अप्रैल) को मेयर पद के चुनाव और मतगणना संपन्न होने के बाद दिल्ली को नया मेयर मिल गया है। भाजपा के प्रत्याशी प्रवेश वाही (Pravesh Wahi) ने बड़ी जीत दर्ज कर इस पद पर कब्ज़ा जमाया है। तीन बार के पार्षद प्रवेश वाही का राजनीतिक सफर किसी रोलर-कोस्टर से कम नहीं रहा है। आइए जानते हैं कैसे संघ की धरती से निकलकर ये नेता दिल्ली एमसीडी का सर्वोच्च पद हासिल करने में कामयाब हुआ है जिसे हम आपको आपको विस्तार के साथ बता रहे हैं।
संघ से निकलकर भाजपा की मुख्य धारा तक
बता दें कि प्रवेश वाही का राजनीतिक जीवन बिल्कुल ज़मीनी स्तर से शुरू हुआ। उन्होंने अपनी राजनीतिक नींव विश्व हिंदू परिषद (VHP) में खंड प्रमुख के रूप में संगठनात्मक कार्यों से रखी। सक्रियता और अच्छे संगठनात्मक कौशल के चलते वह भाजपा मंडल अध्यक्ष बने और पार्टी के युवा मोर्चा में भी अहम जिम्मेदारियां संभालीं।
रोहिणी से लगातार तीन बार जीत का परचम
वाही ने अपनी बढ़ती लोकप्रियता को साबित करते हुए पहला चुनाव साल 2007 में जीता था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2012 और फिर 2022 के निगम चुनावों में उन्होंने रोहिणी वार्ड से जीत हासिल कर लगातार तीन बार पार्षद चुने जाने का रिकॉर्ड बनाया।
निगम प्रशासन का गहरा अनुभव
मेयर बनने से पहले ही प्रवेश वाही निगम की कमान संभालने के अनुभव से खूब रूबरू थे। उन्होंने निगम में निर्माण समिति के चेयरमैन के रूप में काम किया और जोन चेयरमैन की जिम्मेदारी भी निभाई। सबसे खास बात यह है कि वर्ष 2016-17 में वह उत्तरी निगम की सर्वोच्च स्थायी समितिके चेयरमैन भी रह चुके हैं, जिससे उन्हें निगम की फाइलों और कार्यप्रणाली की बारीकियों की गहरी समझ है।
कैसे बनी जीत की गणितीय राह?
मेयर पद के चुनाव में कुल 165 वोट पड़े। इसमें भाजपा ने बेहद एकतरफा प्रदर्शन करते हुए 156 वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस के खाते में मात्र 9 वोट आए।
दिलचस्प बात यह रही कि मेयर बनाने के लिए जरूरी वोटों के समीकरण से भाजपा के पास पहले से ही बहुमत था। दूसरी ओर, आप पार्टी (AAP) के पास 105 वोटों (100 पार्षद, 2 राज्यसभा सदस्य और 3 विधायक) का दबदबा होने के बावजूद पार्टी ने चुनाव से पूरी तरह से दूरी बना ली। आप पार्टी के पार्षदों के सदन में अनुपस्थित रहने के कारण भाजपा के लिए यह जीत ‘एकतरफा’ और आसान हो गई।
अब सबकी नजरें नए मेयर प्रवेश वाही पर टिकी हैं कि वह अपने इस लंबे अनुभव का इस्तेमाल करके दिल्ली नगर निगम को किस नई दिशा में ले जाते हैं और राजधानी की बदहाल सफाई व विकास के मुद्दों को कैसे सुलझाते हैं।





















