Delhi News: दिल्ली में वाहन चोरी के बढ़ते मामलों और अपराधियों के जाल को तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस की दक्षिण-पश्चिम जिला एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड (AATS) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस सफल ऑपरेशन में छह अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें वाहन चोर, रिसीवर और गिरोह के मास्टरमाइंड शामिल हैं। इसके साथ ही पुलिस ने चोरी की कई कारें, फर्जी नंबर प्लेटें, डुप्लीकेट चाबी बनाने में इस्तेमाल होने वाले रिमोट, OBD स्कैनर और अन्य उपकरण भी बरामद किए हैं। इस कार्रवाई ने अंतरराज्यीय वाहन चोरी गिरोह के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो दिल्ली, मुंबई और जोधपुर जैसे शहरों में सक्रिय था।
वाहन चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी और पुलिस का सख्त कदम
दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले में लगातार वाहन चोरी की घटनाओं में वृद्धि देखने को मिली है। इन घटनाओं ने न केवल स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ाई है, बल्कि नागरिकों का सुरक्षित यात्रा का भरोसा भी कम कर दिया है। इस संदर्भ में, पुलिस ने विशेष टीम का गठन किया और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की। इंस्पेक्टर राम कुमार के नेतृत्व में और एसीपी ऑपरेशन संगमित्रा की देखरेख में गठित टीम ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी इनपुट और स्थानीय मुखबिरों की मदद से जांच तेज की।
गुप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस की टीम ने पालम विलेज में एक चोरी के वाहन के मामले में आरोपी काशिफ की पहचान की। उसके बाद, जाल बिछाकर तीन वाहन चोर रिजवान, तालिब और सिकंदर को गिरफ्तार किया गया। ये आरोपी दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय थे और अक्सर वाहन चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने एक चोरी की कार भी बरामद की, जो उन्होंने अपने नेटवर्क के माध्यम से हासिल की थी।
गिरोह का नेटवर्क और ऑपरेशन्स
पुलिस की जांच में पता चला है कि काशिफ इस गिरोह का मास्टरमाइंड था। वह चोरी की गाड़ियों को दिल्ली, मुंबई और जोधपुर जैसे शहरों में सप्लाई करता था। गिरोह के अन्य सदस्य— रिजवान, तालिब और सिकंदर— मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर से वाहनों की चोरी करते थे। ये आरोपी चोरी की गाड़ियों को अलग-अलग इलाकों में पहुंचाते थे, जहां उन्हें रिसीवर्स द्वारा संभाला जाता था। इरफान अहमद, जो शाहीन बाग का निवासी है, उसकी भूमिका इन गाड़ियों को काटने और स्पेयर पार्ट्स बेचने की थी। उसकी निशानदेही पर एक ऐसी कार भी बरामद की गई है, जिसमें वाहन के कटे हुए हिस्से थे।
पुलिस ने इस गिरोह के खिलाफ छापेमारी के दौरान कई खास उपकरण भी बरामद किए हैं। इनमें फर्जी नंबर प्लेटें, डुप्लीकेट चाबी बनाने वाले रिमोट, OBD स्कैनर और अन्य उपकरण शामिल हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल अपराधियों ने वाहनों की चोरी, फर्जी नंबर प्लेटें लगाने और डुप्लीकेट चाबियां बनाने में किया था। इन उपकरणों की मदद से वाहन चोरी की घटनाओं को अंजाम देना उनके लिए आसान हो गया था। पुलिस अब इन उपकरणों की मदद से गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश कर रही है।
गिरोह का मास्टरमाइंड और उसकी गतिविधियां
पुलिस का मानना है कि काशिफ इस गिरोह का मुख्य संचालक था, जो चोरी की गाड़ियों को दिल्ली, मुंबई और जोधपुर तक पहुंचाता था। गिरोह के बाकी सदस्य दिल्ली-एनसीआर में वाहन चुरा कर उन्हें नेटवर्क के माध्यम से आगे भेजते थे। इरफान अहमद की भूमिका इन गाड़ियों को काटने और उनके स्पेयर पार्ट्स बेचने की थी, जिससे गिरोह को आर्थिक लाभ होता था। कई आरोपी इससे पहले भी वाहन चोरी के मामलों में शामिल रह चुके हैं, जिससे पता चलता है कि यह गिरोह कितनी बड़े स्तर पर सक्रिय था।
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से एक सक्रिय अंतरराज्यीय वाहन चोरी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और चोरी की गाड़ियों के खरीदारों की तलाश में जुटी है। जांच जारी है और पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के कई और सदस्य अभी भी फरार हो सकते हैं। पुलिस की टीम इन आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और नेटवर्क के अन्य लिंक को खंगाल रही है, ताकि गिरोह का पूरा नेटवर्क उजागर किया जा सके।



























