Delhi Uttam Nagar News: दिल्ली के उत्तम नगर में एक बिहारी युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले ने राजधानी की सियासत में भी भूचाल ला दिया है। शनिवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यालय में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार पर जमकर निशाना साधा। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक संजीव झा ने पुलिस पर मामले में लीपापोती करने और आरोपियों को बचाने का सीधा आरोप लगाया।
प्रेस वार्ता के दौरान मृतक युवक की मां की मौजूदगी माहौल को भावनात्मक बना गईू। आंसू बहाती हुई उस बूढ़ी मां ने अपने बेटे को खोने का दर्द बयां किया और न्याय की गुहार लगाई। वहीं, विधायक संजीव झा ने चेतावनी दी कि जब तक परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
आरोपी पुलिसकर्मी को बचाने की ‘साजिश’
आप पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मामले की जांच पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह मामला सीधे-सीधे एक पुलिसकर्मी की संलिप्तता का है, जिसके चलते पूरी पुलिसिया व्यवस्था इसे दबाने में लगी हुई है। उन्होंने बताया कि घटना के दौरान जब युवक से पूछा गया कि वह कहां का रहने वाला है, तो जैसे ही उसने अपनी पहचान ‘बिहारी’ बताई, उसे गालियां दी गईं और उस पर हमला कर दिया गया। इस घटना में एक अन्य युवक भी घायल हुआ है, जो इस बात का गवाह है कि किस तरह पूर्वांचल के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया, “दिल्ली पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाय लीपापोती में लगी हुई है। जांच एजेंसियों का रवैया ऐसा है जैसे उन्हें आरोपी को सजा दिलाने में कोई दिलचस्पी नहीं है।” उन्होंने टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया एक खेल बनकर रह गई।
टीआईपी में की गई ‘हेराफेरी’
भारद्वाज ने विस्तार से बताया कि चश्मदीदों को आरोपी की पहचान के लिए बुलाया गया था, लेकिन वहां एक चौंकाने वाला नजारा था। उन्होंने कहा, “आरोपी पुलिसकर्मी के साथ कई ऐसे लोग खड़े कर दिए गए थे जो उससे मिलते-जुलते थे। यही नहीं, सभी लोगों को एक जैसे कपड़े पहनाए गए थे, ताकि गवाह आरोपी को सही-सही पहचान न पाएं। यह साफ तौर पर आरोपी को बचाने की साजिश है।” उन्होंने कहा कि जब एक पुलिसकर्मी ही अपराधी हो, तो पीड़ित को न्याय मिलना मुश्किल हो जाता है, लेकिन आप इसे हर हाल में लड़ेगी।
पुलिस पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए भारद्वाज ने कहा कि पीड़ित परिवार को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जब वे लोग पीड़ित परिवार की मदद के लिए पहुंचे, तो पुलिस ने परिवार को थाने में घंटों बैठाकर रखा। इसका उद्देश्य सिर्फ यही था कि परिवार के सदस्य नेताओं से न मिल सकें और न ही जांच प्रक्रिया की खामियों के बारे में खुलकर बात कर पाएं।
“न्याय चाहिए, मुआवजा नहीं”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मृतक युवक की मां का रो-रोकर बुरा हाल था। अपने बेटे की फोटो को सीने से लगाए उन्होंने कहा कि उन्हें सरकारी मुआवजे या पैसे से कोई सरोकार नहीं है, उन्हें बस अपने बेटे को इंसाफ चाहिए। उन्होंने फूट-फूटकर बताया, “मेरा बेटा ‘मम्मी-मम्मी’ कहते हुए घर आता था। अब घर सूना हो गया है। बेटे को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।” उनकी यह बात सुनकर मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं।
युवक की गलती सिर्फ इतनी थी कि वह बिहारी था
विधायक संजीव झा ने इस पूरे मामले को सांप्रदायिक और क्षेत्रीय पूर्वाग्रह का मामला बताया। उन्होंने कहा कि मृतक युवक अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। परिवार में बीमार छोटा भाई और बुजुर्ग माता-पिता हैं, जिनकी पूरी जिम्मेदारी उसी पर थी। उन्होंने कहा, “इस युवक की गलती सिर्फ इतनी थी कि वह बिहार से था। क्या दिल्ली में रहने वाले बिहारियों या पूर्वांचल वालों को कोई सुरक्षा नहीं है?”

Justice for Bihar Youth: Parents Join AAP Leaders @Saurabh_MLAgk & @Sanjeev_aap in Important Press Conference | LIVE https://t.co/mCXp4REk7m
— AAP (@AamAadmiParty) May 23, 2026
संजीव झा ने बताया कि घटना के बाद से उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर परिवार को न्याय दिलाने की मांग की थी, लेकिन एक महीने बीत जाने के बावजूद किसी भी स्तर पर परिवार को कोई राहत नहीं मिली है।
संजीव झा की मांगें और चेतावनी
संजीव झा ने सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि आरोपी को फास्ट ट्रैक कोर्ट में लाकर सख्त सजा दी जाए। साथ ही, मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि परिवार का गुजारा हो सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे, तो पुलिस ने परिवार को थाने में बैठा लिया गया। इसके बाद जब उन्होंने अनशन शुरू किया, तो पुलिस ने उन्हें और उनके समर्थकों को देर रात तक हिरासत में रखा।
मुख्यमंत्री से मिलने जाएंगे, नहीं मिली तो धरना
संजीव झा ने अपनी अगली रणनीति के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मिलने जाएंगे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “यदि मुख्यमंत्री उनसे नहीं मिलतीं, तो मैं सीएम आवास के बाहर ही धरने पर बैठ जाऊंगा।”
आप नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार गरीब और पूर्वांचली समाज के लोगों के प्रति पूरी तरह से संवेदनशीलता खो चुकी है। पार्टी ने मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को तत्काल न्याय देने की मांग को लेकर सड़क पर उतरने की बात कही है। अब देखना यह है कि इस बढ़ते विवाद पर दिल्ली प्रशासन और सरकार क्या स्टैंड लेती है।






















