Iran US War: तीन महीने से जारी घातक जंग को थामने के लिए चल रही संवेदनशील शांति वार्ता के बीच अमेरिका ने एक बड़ा सैन्य कदम उठाया है। मध्य-पूर्व में तनाव को और भड़काते हुए अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर स्थित सैन्य ठिकानों पर नए हमले किए हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दुनिया की बड़ी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए अपने बयान में इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कार्रवाई उस समय की गई जब इलाके में अमेरिकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ रही थीं।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने बुधवार की रात या गुरुवार की सुबह हुई इस कार्रवाई में ईरान के एक ऐसे सैन्य अड्डे को निशाना बनाया, जिस पर आरोप है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूद अमेरिकी नौसैनिक बलों और व्यावसायिक जहाजों के लिए सीधा खतरा पैदा कर रहा था। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया इस युद्धग्रस्त क्षेत्र में शांति स्थापित करने की कोशिशों में जुटी हुई है।
होर्मुज की रक्षा के लिए ‘रक्षात्मक हमला’
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह हमला पूरी तरह से रक्षात्मक प्रकृति का था। अमेरिका का कहना है कि उसकी खुफिया एजेंसियों ने ईरानी सेना की ओर से कुछ संदिग्ध और आक्रामक गतिविधियों को पकड़ा था, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। अमेरिका के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी दी है कि सेना ने हवा में ही चार ईरानी ड्रोन को नष्ट कर दिया, जबकि एक सैन्य बेस को ऐसे समय में निशाना बनाया गया जब वह पांचवें ड्रोन को लॉन्च करने की तैयारी में था।
अधिकारियों ने बताया कि ये ड्रोन और सैन्य साइट्स होर्मुज स्ट्रेट के लिए एक ‘स्पष्ट और आसन्न खतरा’ थे। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का ऐसा महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जिससे होकर वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। किसी भी तरह की अशांति या आक्रामकता यहां न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था के लिए भी घातक साबित हो सकती है। अमेरिका ने साफ किया कि बुधवार (27 मई) को किया गया यह कदम अपने सैनिकों की जान बचाने और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक था। यह पिछले कुछ समय में ईरान पर किया गया अमेरिका का दूसरा बड़ा रक्षात्मक हमला है।
वार्ता के बीच बढ़ता संकट
यह सैन्य एक्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उस समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस संघर्ष को खत्म करने के लिए राजनयिक स्तर पर वार्ताएं चल रही हैं। यह युद्ध इसी साल 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर एक बड़ा हवाई हमला किया था। पिछले तीन महीनों में इस जंग ने भयावह रूप ले लिया है।
संघर्ष वाले इलाकों से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है और नागरिकों के नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम या शांति समझौते को लेकर चल रही बातचीत अभी नाजुक दौर में है। ऐसे में अमेरिका का यह नया हमला शांति प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा सकता है। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि वह शांति चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।
ऊर्जा कीमतों पर पड़ेगा असर
इस सैन्य टकराव का सबसे बड़ा असर दुनिया की ऊर्जा मंडी पर देखने को मिल सकता है। होर्मुज स्ट्रेट का इलाका ऊर्जा व्यापार के लिए अति संवेदनशील माना जाता है। जैसे ही खबर फैली कि अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया। विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह तनाव इसी तरह बना रहा या बढ़ा, तो यह कच्चे तेल की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है, जिससे पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसे दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं बर्दाश्त नहीं करना चाहेंगी।
भविष्य की राह
अमेरिका और ईरान के बीच यह नया टकराव बताता है कि मध्य-पूर्व में स्थिरता लाना अभी भी एक दूर का सपना है। जहां एक ओर राजनयिक बातचीत के जरिए जंग को खत्म करने की कोशिशें हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर मैदान में सैन्य गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह की आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या ईरान इस हमले का जवाब देता है या फिर वार्ता की प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए संयम बरतता है। फिलहाल, होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते तनाव पर नजर गड़ाए हुए है। वार्ता के मेज पर बैठे नेताओं के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वे सैन्य कार्रवाइयों के बीच शांति का रास्ता कैसे निकालते हैं।
























