UP News: उत्तर प्रदेश में मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कई जिलों में तेज बारिश और ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं। खासतौर पर गेहूं, सरसों और दलहन जैसी फसलें, जो कटाई के लिए तैयार थीं, अब नुकसान की चपेट में आ गई हैं।
हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत प्रशासन को अलर्ट मोड पर कर दिया है। उन्होंने सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DMs) से विस्तृत जमीनी रिपोर्ट मांगी है, ताकि नुकसान का सही आकलन किया जा सके।
प्रशासन से मांगी गई जमीनी रिपोर्ट
सीम योगी ने हालात की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजें। यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि रिपोर्ट सिर्फ औपचारिक न हो, बल्कि जमीनी सच्चाई को दर्शाने वाली हो।
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संयुक्त सर्वे का निर्णय
फसल नुकसान के सही आंकलन के लिए सीम योगी ने संयुक्त सर्वे कराने का फैसला लिया है। इस सर्वे में राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों की टीम मिलकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करेगी। इससे नुकसान का सटीक आकलन हो सकेगा और राहत कार्यों को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा।
मुआवजा देने की तैयारी
सीम योगी ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही सर्वे पूरा होगा, मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भुगतान में किसी भी तरह की देरी न हो और किसानों के खातों में समयबद्ध तरीके से सहायता राशि पहुंचाई जाए।
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संवेदनशीलता के साथ काम करने के निर्देश
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और उन्हें अनावश्यक परेशानियों से बचाएं। जिलास्तरीय अधिकारी खुद फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि राहत कार्य पारदर्शिता और तेजी से पूरे हों। सीम योगी का कहना है कि किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संकट की घड़ी में उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

























