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जलवायु की मार के बीच भी खूबसूरती का जादू—हिम्बा महिलाओं की कहानी

The Himba Tribe of Southwestern Africa: नामीबिया के कुनैन प्रांत में रहने वाली हिम्बा जनजाति की आबादी लगभग 20 से 50 हजार के बीच है। यहां का माहौल कठोर रेगिस्तानी है और पानी की भारी किल्लत है। ऐसे में पानी का उपयोग सिर्फ पीने और पशुओं के लिए किया जाता है।

हिम्बा महिलाओं की अनोखी सुंदरता का रहस्य: जानवरों की चर्बी का जादू

HIGHLIGHTS

  • बिना नहाए भी खूबसूरत कैसे दिखती हैं हिम्बा महिलाएं?
  • नामीबिया की हिम्बा जनजाति की प्राकृतिक जीवनशैली का खुलासा
  • ओटजिज: हिम्बा महिलाओं का प्राकृतिक सौंदर्य राज़
  • पानी की कमी में भी स्वच्छता का अद्भुत तरीका—हिम्बा महिलाओं का रहस्य
  • धुआं स्नान से कैसे रहती हैं हिम्बा महिलाएं साफ-सुथरी?

The Himba Tribe of Southwestern Africa: दुनिया भर में खूबसूरती के मायने अलग-अलग हैं। कहीं गोरापन खूबसूरती माना जाता है तो कहीं आकर्षक व्यक्तित्व। लेकिन दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका के नामीबिया में रहने वाली ‘हिम्बा जनजाति’ की महिलाओं ने खूबसूरती की परिभाषा ही बदल दी है।

ये महिलाएं पानी से नहाती नहीं हैं, शरीर पर जानवरों की चर्बी लगाती हैं, फिर भी उन्हें दुनिया की सबसे आकर्षक महिलाओं में गिना जाता है। आइए जानते हैं इस रहस्य के पीछे का सच।

पानी की कमी और बेजोड़ जीवनशैली

नामीबिया के कुनैन प्रांत में रहने वाली हिम्बा जनजाति की आबादी लगभग 20 से 50 हजार के बीच है। यहां का माहौल कठोर रेगिस्तानी है और पानी की भारी किल्लत है। ऐसे में पानी का उपयोग सिर्फ पीने और पशुओं के लिए किया जाता है। लेकिन सवाल उठता है कि बिना स्नान के वे स्वच्छ कैसे रहती हैं? इसका जवाब है उनकी प्राचीन और प्राकृतिक जीवनशैली।

ओटजिज (Otjize): खूबसूरती का वो राज़ जो आश्चर्यचकित करे

हिम्बा महिलाओं की खास पहचान उनके शरीर पर चढ़ा ‘लाल रंग’ है। दरअसल, यह लाल रंग कोई मेकअप नहीं, बल्कि एक विशेष प्रकार का लेप ‘ओटजिज’ है। यह लेप जानवरों की चर्बी, ओक्रे (लाल मिट्टी/पत्थर) और खुशबू के लिए जड़ी-बूटियों की राल मिलाकर बनाया जाता है।

यह लेप केवल सौंदर्य का अहसास नहीं कराता, बल्कि एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है। तेज धूप और शुष्क मौसम में यह त्वचा को जलने से बचाता है, नमी बनाए रखता है और कीड़े-मकोड़ों को दूर भागता है। इसी वजह से बिना नियमित स्नान के भी उनकी त्वचा मुलायम और चमकदार बनी रहती है।

धुएं से स्नान की अनोखी परंपरा

साफ-सफाई के लिए हिम्बा महिलाएं ‘स्मोक बाथ’ (धुआं स्नान) का सहारा लेती हैं। इस प्रक्रिया में वे एक बर्तन में विशेष लकड़ियां और जड़ी-बूटियां जलाती हैं। इससे निकलने वाले धुएं को अपने शरीर पर लगाकर वे शरीर की दुर्गंध और बैक्टीरिया को दूर करती हैं। यहां तक कि वे अपने कपड़ों को भी इसी धुएं से साफ करती हैं ताकि उनमें ताजगी बनी रहे।

बालों में छुपे हैं सामाजिक संकेत

हिम्बा महिलाओं की खूबसूरती का दूसरा पहलू उनके बाल हैं। वे बालों को सजाने के लिए उसी लाल लेप और बकरी के बालों का उपयोग करती हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनके हेयरस्टाइल उनकी सामाजिक स्थिति बयान करते हैं। अविवाहित लड़कियां बालों को चेहरे के आगे गिराकर रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं उन्हें सिर के पीछे बांधती हैं।

पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र

हिम्बा जनजाति की यह अनोखी जीवनशैली आज पूरी दुनिया को आकर्षित करती है। हर साल हजारों पर्यटक और फोटोग्राफर उनके गांवों में पहुंचकर आधुनिक दुनिया से अलग इस संस्कृति को देखने आते हैं। हालांकि बदलते समय के साथ आधुनिकता का असर इस जनजाति पर भी दिख रहा है, लेकिन फिर भी वे अपनी परंपराओं को मजबूती से थामे हुए हैं और प्रकृति के साथ अपना अनूठा संबंध बनाए हुए हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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