भारतीय राजनीति में अक्सर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गतिविधियों का प्रभाव देखने को मिलता है। हाल ही में, आप पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बड़ा बयान देते हुए अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के बंद होने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर मेटा, जो कि फेसबुक और इंस्टाग्राम का स्वामित्व रखता है, पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
केजरीवाल ने कहा है कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है, और इस कदम के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि आपने मेरा अकाउंट क्यों बंद किया है? भारत में आपके कार्यालय से मुझे बताया गया है कि मेरा अकाउंट प्रतिबंधित कर दिया गया है। आखिर क्यों? इसकी कोई वजह नहीं बताई गई है। यह बेहद खेदजनक है।”
सोशल मीडिया पर केजरीवाल का आरोप और प्रतिक्रिया
अरविंद केजरीवाल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इंस्टाग्राम अकाउंट ब्लॉक की तस्वीर शेयर की है। उनके संदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मेटा कंपनी ने बिना कोई स्पष्ट कारण बताए उनके अकाउंट को बंद कर दिया है। उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी चेतावनी दी है कि यदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उनकी बात नहीं सुनेंगे, तो वे उनके खिलाफ कठोर कदम उठाने के लिए तैयार हैं। केजरीवाल ने कहा कि अगर हम झुक गए, तो कल को पीएम मोदी के आगे ही झुकना पड़ेगा।
यह कदम उस समय आया है जब केजरीवाल ई20 इथेनॉल ईंधन को लेकर सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार को कठोर शब्दों में टारगेट किया है और आरोप लगाया है कि ई20 पेट्रोल के प्रयोग से वाहनों को नुकसान पहुंच सकता है। उनके अनुसार, यह ईंधन आसानी से वाहन की इंजीनरी को नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि इसमें क्लोराइड और नमी की मात्रा अधिक होती है।
ई20 ईंधन पर विवाद: सरकार और उद्योग के बीच मतभेद
अरविंद केजरीवाल का आरोप है कि केंद्र सरकार ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (सियाम) को दबाव डालकर उस रिपोर्ट को वापस लेने के लिए मजबूर किया है, जिसमें ई20 ईंधन पर चिंता जाहिर की गई थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि ई20 में क्लोराइड और नमी की मात्रा अधिक होने से वाहनों को नुकसान पहुंच सकता है। इस रिपोर्ट को ऑटोमोबाइल उद्योग के विशेषज्ञों द्वारा व्यापक अनुसंधान के बाद तैयार किया गया था।
हालांकि, सरकार और सियाम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। केजरीवाल का मानना है कि यह कदम उद्योग को नुकसान पहुंचाने के मकसद से उठाया गया है, ताकि ई20 ईंधन का प्रयोग लागू किया जा सके। उनका कहना है कि यह फ्यूल देश के वाहन उद्योग और पर्यावरण दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।
पीएम आवास मार्च और विरोध प्रदर्शन
वहीं, इससे पहले केजरीवाल ने बीते दिनों पीएम आवास तक मार्च किया था, जिसमें उन्होंने ई20 पेट्रोल के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इस मार्च में उनके साथ लगभग 100 लोगों ने भाग लिया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने उन्हें फिरोजशाह मार्ग पर ही रोक दिया। केजरीवाल ने इस घटना को सरकार की शोषणकारी नीति का उदाहरण बताया और कहा कि उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि वे ई20 ईंधन के प्रयोग को रोकना चाहते हैं, तो अधिक से अधिक संख्या में इस विरोध में भाग लें।
उनका मानना है कि यह कदम देश के पर्यावरण और जनता के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि ई20 ईंधन का प्रयोग जल्दबाजी में और बिना उचित अध्ययन के शुरू किया जा रहा है, जो भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकता है।
सोशल मीडिया का विवाद और राजनीतिक प्रभाव
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर केजरीवाल का यह कदम राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। उनके समर्थक उनके पक्ष में खड़े हैं और उनका मानना है कि सरकार और बड़ी टेक कंपनियां आलोचनात्मक आवाज को दबाने का प्रयास कर रही हैं। वहीं, कुछ आलोचक इस कदम को केजरीवाल की राजनीति का हिस्सा मान रहे हैं, जो अपने विरोध को मीडिया और जनता के सामने मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
यह मामला केवल सोशल मीडिया के स्वच्छता और स्वतंत्रता का ही नहीं, बल्कि ईंधन और पर्यावरण की सुरक्षा का भी विषय बन गया है। सरकार का तर्क है कि ई20 ईंधन से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और पर्यावरण को लाभ पहुंचेगा। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इसका परीक्षण और तैयारी बिना पर्याप्त अध्ययन के किया जा रहा है, जिससे जनता और वाहन उद्योग दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।






















