बॉलीवुड के सुपरस्टार रणबीर कपूर, सनी देओल और साउथ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित और मेगा बजट फिल्म ‘रामायण’ को लेकर इन दिनों चर्चा का बाजार गर्म है। निर्देशक नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को इस वर्ष दिवाली के मौके पर देश और दुनिया भर में धमाकेदार रिलीज करने की तैयारी है। हालांकि, रिलीज से पहले ही यह फिल्म एक बड़े विवाद के घेरे में आ गई है। दरअसल, श्री रामलीला महासंघ ने फिल्म के मेकर्स को एक सख्त चेतावनी पत्र जारी करते हुए मांग उठाई है कि फिल्म को सिनेमाघरों में लगने से पहले उनके प्रतिनिधि मंडल को विशेष शो के जरिए दिखाया जाए।
श्री रामलीला महासंघ ने क्यों उठाई यह मांग?
श्री रामलीला महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार की ओर से जारी किए गए इस पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ और भगवान श्री राम की कथा से जुड़ी इस फिल्म में कोई भी ऐसा दृश्य या संवाद नहीं होना चाहिए जो सनातनियों की भावनाओं को आहत करे। अर्जुन कुमार ने बताया कि संघ को अपने सूत्रों से जानकारी मिली है कि फिल्म में कुछ ऐसे दृश्यों को शामिल किया गया है, जो भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। इसी डर के कारण वे फिल्म की पूर्व रिलीज स्क्रीनिंग चाहते हैं ताकि कोई विवादित हिस्सा समय रहते हटाया जा सके।
‘आदिपुरुष’ का बदला अभी तक नहीं भुला बॉलीवुड
पत्र में सबसे ज्यादा जोर फिल्म ‘आदिपुरुष’के हवाले से दिया गया है। अर्जुन कुमार ने नितेश तिवारी और प्रोडक्शन हाउस को याद दिलाया कि कैसे भूषण कुमार के निर्माण में बनी प्रभास और सैफ अली खान स्टारर फिल्म आदिपुरुष ने सनातनी समाज को गहरा ठेस पहुंचाई थी। उस फिल्म में स्वर्ण लंका को काला-कर्कश दिखाने, महाज्ञानी रावण को मंगोल लुटेरों जैसा रूप देने और राक्षसों की सेना के चित्रण को लेकर रामलीला मंचन से जुड़े कलाकारों और आम हिंदूओं ने कड़ा एतराज जताया था। नतीजा यह हुआ कि भले ही फिल्म पर करोड़ों खर्च हो गए हों, लेकिन दर्शकों ने इसका पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया और यह बॉक्स ऑफिस पर भारी फ्लॉप साबित हुई।
श्री रामलीला महासंघ ने साफ संदेश दिया है कि अगर रणबीर कपूर की ‘रामायण’ में भी ‘आदिपुरुष’ जैसी भूलें दोहराई गईं, तो इसके परिणाम भी उतने ही खराब होंगे।
सिनेमाघरों के बाहर धरने और प्रदर्शन की धमकी
अगर फिल्म निर्माताओं ने इस मांग को नजरअंदाज किया, तो इसके क्या हालात हो सकते हैं? इस पर अर्जुन कुमार ने साफ-साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि फिल्म रिलीज होने से पहले उनके मंच के प्रतिनिधियों को नहीं दिखाई गई और कोई आपत्तिजनक सीन रिलीज होता है, तो श्री रामलीला महासंघ और अन्य हिंदू संगठन मिलकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के अन्य राज्यों में जमकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि हजारों की संख्या में कार्यकर्ता सिनेमाघरों के बाहर धरना देंगे और फिल्म की स्क्रीनिंग को किसी भी हालत में नहीं होने देंगे।
धार्मिक विषयों पर सिनेमा का ‘क्रिएटिव लिबर्टी’ डिबेट
यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक फिल्म को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ है। पिछले कुछ समय से बॉलीवुड में मिथोलॉजी और इतिहास पर बनने वाली फिल्मों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। फिल्म मेकर्स अक्सर ‘क्रिएटिव लिबर्टी’ का तकिया लगाकर मौलिक कथाओं में बदलाव कर देते हैं, लेकिन अब दर्शक चाहते हैं कि जिस धर्म और भगवान से जुड़ी कहानी हो, उसमें किसी तरह का ट्विस्ट या भ्रम पैदा करने वाला दृश्य न हो। विशेषकर भगवान राम और रामायण जैसे विषय भारतीय समाज के लिए केवल एक कहानी नहीं, बल्कि जीवन का आदर्श और आस्था का केंद्र हैं।
अब नितेश तिवारी पर है बॉल
अब सबकी नजरें फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी और उनकी प्रोडक्शन टीम पर टिकी हैं। नितेश तिवारी अपनी फिल्मों की स्क्रिप्ट को लेकर हमेशा से ही काफी सजग रहे हैं और ‘दंगल’ और ‘चिच्चोरे’ जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी पकड़ साबित की है। लेकिन ‘रामायण’ एक ऐसा विषय है जहां स्क्रिप्ट से लेकर VFX, कैरेक्टर डिजाइन और संवादों तक हर चीज पर माइक्रोस्कोप से नजर रखी जा रही है।
क्या फिल्म के मेकर्स श्री रामलीला महासंघ की इस मांग को मानेंगे और रिलीज से पहले एक विशेष स्क्रीनिंग रखेंगे? या फिर वे अपने क्रिएटिव फैसले पर डटे रहेंगे? अभी यह कहना मुश्किल है। लेकिन एक बात साफ है कि अगर इस मुद्दे पर सही समय पर संवाद नहीं हुआ और निर्माताओं ने सनातन संगठनों की बात को नजरअंदाज किया, तो दिवाली पर रिलीज होने वाली इस मेगा बजट फिल्म की राह आसान नहीं रहने वाली है। सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन की धमकी ने फिल्म के बिजनेस पर भी एक गहरा सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि इस खींचतान का अंत क्या नतीजा देता है।





















