UP News: उत्तर प्रदेश के इटावा जंक्शन पर एक ऐसी तस्करी का रेलवे पुलिस ने पर्दाफाश किया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। तस्करी के लिए अक्सर स्लीपर या सामान्य बोगियों का सहारा लिया जाता है, लेकिन यहां एक युवक ने सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ‘एसी फर्स्ट क्लास’ में बैठकर शराब तस्करी को अंजाम दिया। रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने कोच में छापेमारी कर बिहार के बेगूसराय निवासी गौरव कुमार को गिरफ्तार किया है
प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर दबोचा गया आरोपी
मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर जीआरपी पुलिस इटावा जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर पहले से तैनात थी। जैसे ही सिक्किम महानंदा एक्सप्रेस रुकी, पुलिस ने सीधे एसी फर्स्ट क्लास कोच में प्रवेश किया। वहां बैठे 22 वर्षीय युवक गौरव कुमार से पुलिस ने उसके पास रखे सामान की जांच शुरू की।
गौरव के पास चार नए पिट्ठू बैग और एक बड़ा ट्रॉली बैग था। जब पुलिस ने इन बैगों की ज़िप खोली तो हड़कंप मच गया। सारे बैग अवैध शराब की बोतलों से भरे हुए थे। गिनती करने पर कुल 48 बोतलें बरामद हुईं। बताया जा रहा है कि गौरव नई दिल्ली से बेगूसराय जा रहा था।
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एसी कोच क्यों चुना?
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने स्लीपर क्लास की जगह महंगे एसी फर्स्ट क्लास में सफर करने की प्लानिंग केवल इसलिए की थी, ताकि चेकिंग के दौरान किसी को उस पर शक न हो। आमतौर पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी स्लीपर और सामान्य बोगियों पर ज्यादा नजर रखती है। एसी फर्स्ट क्लास में बैठे एक ‘पढ़ाई लिखाई करने वाले छात्र’ से शराब बरामद होने की कल्पना भी पुलिस के लिए चौंकाने वाली थी।
छात्र का दावा- “दोस्त ने फंसाया, मुझे कुछ नहीं पता था”
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने गौरव कुमार (मूल रूप से मटिहानी, बेगूसराय का रहने वाला) से कड़ाई से पूछताछ की। इस दौरान आरोपी छात्र ने खुद को बिल्कुल निर्दोष बताया।
गौरव ने पुलिस को बयान दिया, “मैं दिल्ली घूमने गया था। वापसी में मेरे एक दोस्त ने ही मेरा रिजर्वेशन कराया था। उसी ने मुझे ये बैग बेगूसराय पहुंचाने की जिम्मेदारी दी थी। ट्रेन में चार अज्ञात लोग आए थे, उन्होंने ही ये सामान मेरे बर्थ के पास रखा था। मैं सो रहा था और मुझे बैग में शराब होने की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी।”
कानूनी कार्रवाई
हालांकि, आरोपी के इन बयानों को पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस का मानना है कि यह पहले से ही एक शातिराना योजना के तहत किया गया काम है। जीआरपी ने तत्काल आरोपी छात्र के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 60/63 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है।
फिलहाल, पुलिस इस मामले में गौरव के उस ‘दोस्त’ और चार अज्ञात व्यक्तियों की तलाश में जुट गई है, जिन्होंने ट्रेन में शराब भरी बोतलें सप्लाई की थीं। इस मामले से यह भी साफ हो गया है कि तस्कर अब पुराने तरीकों को त्यागकर एसी कोच जैसे ‘सुरक्षित जोन’ का इस्तेमाल करने लगे हैं, जिसके लिए रेलवे सुरक्षा बल को अपनी रणनीति बदलनी होगी।























