खुले नाले और गड्ढे: बारिश से पहले एलजी का आदेश

बैठक के दौरान सामने आए आंकड़े काफी सकारात्मक हैं। पिछले कुछ सालों में सतत प्रयासों के चलते दिल्ली में जलभराव के संवेदनशील स्थलों की संख्या में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है।

नालों की सफाई पूरी, गाद नहीं हटाई तो गिरेगी गाज

HIGHLIGHTS

  • लापरवाही करने वाले अधिकारियों को भुगतनी होगी सजा
  • सीएम रेखा गुप्ता ने लागू की जीरो टॉलरेंस
  • दिल्ली के जलभराव स्पॉट घटकर हुए 34
  • बाढ़ से बचाव का तैयार है मास्टरप्लान
  • बारिश में गिरने वाले खतरनाक पेड़ों को हटाने का आदेश

Delhi Monsoon Preparedness 2026: दिल्ली में मानसून के मौसम को लेकर हर साल जलभराव और यातायात जाम की समस्या एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है। हालांकि, इस बार दिल्ली में किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने अपने स्तर पर तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए एक अहम उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया।

इस बैठक की अध्यक्षता दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संयुक्त रूप से की। इस दौरान मानसून से पहले की तैयारियों, शहरी बाढ़ (अर्बन फ्लड) को रोकने की रणनीति और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के गठन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। वैश्विक जलवायु परिवर्तन, खासकर ‘El Nino’ के बदलते प्रभावों और अचानक भारी बारिश या सूखे की स्थिति को देखते हुए इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का साफ मानना है कि दिल्ली में जलभराव को शून्य के स्तर पर लाने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

दिल्ली में जलभराव वाले जोन में आई भारी कमी

बैठक के दौरान सामने आए आंकड़े काफी सकारात्मक हैं। पिछले कुछ सालों में सतत प्रयासों के चलते दिल्ली में जलभराव के संवेदनशील स्थलों की संख्या में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है।

  • वर्ष 2024: दिल्ली में जलभराव वाले कुल स्थलों की संख्या 194 थी।
  • वर्ष 2025: लगातार प्रयासों से यह आंकड़ा घटकर 169 रह गया।
  • वर्ष 2026 (वर्तमान डेटा): अब तक के काम के बाद यह संख्या मात्र 34 पर आ गई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

सबसे अहम बात यह है कि जिन इलाकों में बार-बार पानी भर जाता था (Recurring Waterlogging Spots), उनकी संख्या में भी कमी आई है। वर्ष 2024 से 2025 के दौरान 53 जगहों पर बार-बार जलभराव हुआ, लेकिन 2025 से 2026 के बीच यह आंकड़ा घटकर मात्र 8 रह गया है।

नालों की सफाई और सीवर लाइनों का काम

बारिश का पानी सही ढंग से निकलना इसकी पहली शर्त है। इसके लिए विभिन्न एजेंसियों द्वारा नालों की डी-सिल्टिंग (गाद निकालने की प्रक्रिया) का काम तेजी से किया गया है। बैठक में बताया गया कि:

  • एमसीडी, बाढ़ एवं सिंचाई विभाग, एनडीएमसी और डीडीए ने अपने नालों की सफाई के 100 प्रतिशत लक्ष्य को हासिल कर लिया है।
  • लोक निर्माण विभाग (PWD) ने लगभग 95 प्रतिशत सफाई पूरी कर ली है, हालांकि कुछ नालों पर अतिक्रमण के चलते काम में थोड़ी बाधा आई है।
  • दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की बात करें तो उसने ट्रंक सीवर लाइनों का 85.5%, पेरिफेरल सीवर लाइनों का 91.1% और ब्रांच सीवर लाइनों का 90.16% हिस्सा सफलतापूर्वक साफ कर लिया है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सख्त निर्देश

सफाई के काम पर संतोष जताते हुए भी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सिर्फ नालों से गाद निकालना काफी नहीं है, बल्कि निकाले गए सिल्ट (गाद) को तुरंत वहां से उठाकर निस्तारण भी किया जाना चाहिए। अक्सर देखा गया है कि नालों से निकाली गई मिट्टी सड़क के किनारे ही ढेर लगाकर छोड़ दी जाती है, जो फिर बारिश में वापस नाले में जाकर बंद हो जाती है। सीएम ने इस पर रोक लगाने के सख्त निर्देश दिए।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी नाला, सीवर लाइन या मैनहोल खुला नहीं छोड़ा जाएगा, क्योंकि इससे जानलेवा हादसे हो सकते हैं। सड़कों पर मौजूद गड्ढों को तत्काल भरने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाएगी।

खतरनाक पेड़ों की छंटाई और अधिकारियों की जवाबदेही

मानसून के दौरान तेज आंधी-तूफान और भारी बारिश के कारण पेड़ गिरने की घटनाएं आम हो जाती हैं, जिससे जान-माल का नुकसान होता है। इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई और मुख्यमंत्री ने वन विभाग तथा नगर निकायों को निर्देश दिए कि ऐसे पेड़ों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर काटा या छांटा जाए।

वहीं, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इस पूरी व्यवस्था में जवाबदेही सबसे ज्यादा जरूरी है। अगर किसी भी इलाके में कोताही बरती गई या सिस्टम फेल हुआ, तो उसके लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी तय करनी होगी। उन्होंने कहा कि जलभराव दिल्ली की एक पुरानी समस्या है, लेकिन अब दीर्घकालिक ड्रेनेज मास्टर प्लान के साथ-साथ अधिकारियों को अल्पकालिक उपायों को भी बिना किसी ढिलाई के लागू करना होगा।

एसडीआरएफ (SDRF) का गठन और विभागों के बीच समन्वय

आपदा के समय त्वरित राहत पहुंचाने के लिए उपराज्यपाल ने ‘स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स’ (SDRF) को जल्द से जल्द पूरी तरह से सक्रिय और मजबूत बनाने के निर्देश दिए।

दिल्ली में अक्सर एमसीडी, एनडीएमसी, पीडब्ल्यूडी और दिल्ली जल बोर्ड जैसी विभिन्न एजेंसियों के बीच ‘क्षेत्राधिकार’ को लेकर तकरार हो जाती है, जिससे राहत कार्य धीमा पड़ जाता है। एलजी और सीएम ने इस पर स्पष्ट कहा कि संकट के समय किसी भी तरह के अधिकार क्षेत्र के विवाद या भ्रम की कोई गुंजाईश नहीं होगी। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ मिलकर काम करेंगे।

रियल-टाइम मॉनिटरिंग और पड़ोसी राज्यों से तालमेल

बैठक के अंत में कई तकनीकी और रणनीतिक फैसले लिए गए:

  1. रियल-टाइम मॉनिटरिंग: जनता से मिलने वाले शिकायतों और फीडबैक पर नजर रखने के लिए एक रियल-टाइम सिस्टम लगाया जाएगा, ताकि जमीनी हालात का तुरंत आकलन हो सके।
  2. मोबाइल पंप्स: आपात स्थिति में तत्काल इस्तेमाल के लिए मोबाइल हेवी-ड्यूटी पंपों को पूरी तरह तैयार रखा जाएगा।
  3. पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय: यमुना नदी और अन्य नदियों के जलस्तर को देखते हुए हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित अन्य पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now