कॉकरोच जनता पार्टी चींटी जनता पार्टी
---Advertisement---

कानपुर देहात: वायरल वीडियो ने यूपी पुलिस की कार्यशैली पर छेड़ी बहस

Kanpur Dehat Viral Video:वीडियो के आगे बढ़ने पर CO संजय सिंह एक कदम और आगे बढ़ते हुए दिखाई देते हैं। उन्होंने पुलिसकर्मियों को यह आश्वासन दिया कि यदि बवाल के दौरान कोई गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है, तो वे उन्हें बचा लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए कथित तौर पर "अमूल वाहन चालक मारपीट मामले" को याद किया।

कानपुर देहात CO का वायरल वीडियो बना विवाद का कारण

HIGHLIGHTS

  • “दूर से खड़े होकर देखो” – CO के निर्देश से मचा हड़कंप
  • पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े करता वायरल वीडियो
  • CO संजय सिंह के बयान से जनता में भारी नाराजगी
  • कानून-व्यवस्था पर विवादित टिप्पणी से घिरे CO संजय सिंह
  • “मैं बचा लूंगा” वाले बयान पर CO की बढ़ीं मुश्किलें

Kanpur Dehat Viral Video: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और जिम्मेदार अधिकारियों की भाषा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यहां तैनात सर्किल ऑफिसर (CO) संजय सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो कथित तौर पर एक ‘पीस कमेटी’ (शांति समिति) की बैठक के दौरान का है, जिसमें CO द्वारा पुलिसकर्मियों को दिए गए निर्देश न सिर्फ हैरान करने वाले हैं, बल्कि पुलिस विभाग की मूल भूमिका के विपरीत भी माने जा रहे हैं।

वायरल वीडियो में CO ने क्या कहा?

वायरल वीडियो में CO संजय सिंह अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए नजर आ रहे हैं। उनके शब्द हैं- “पब्लिक को जो बवाल करना है करने दो, पुलिस को वहां नहीं जाना चाहिए। दूर से खड़े होकर देखो, तभी लोग सुधरेंगे।”  एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के मुख से यह बातें सुनकर न सिर्फ स्थानीय लोग हैरान हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर यूजर्स भी सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर अगर पुलिस ही दूर से देखेगी, तो कानून-व्यवस्था कौन मेंटेन करेगा? पीस कमेटी की बैठक, जिसका मुख्य उद्देश्य तनाव की स्थिति में समाज के लोगों के बीच सौहार्द और शांति बनाए रखना होता है, में इस तरह के आक्रामक और उदासीन बयान देना स्वयं में एक विरोधाभास है।

‘मैं बचा लूंगा’ का दावा और अमूल मामले का जिक्र

वीडियो के आगे बढ़ने पर CO संजय सिंह एक कदम और आगे बढ़ते हुए दिखाई देते हैं। उन्होंने पुलिसकर्मियों को यह आश्वासन दिया कि यदि बवाल के दौरान कोई गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है, तो वे उन्हें बचा लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए कथित तौर पर “अमूल वाहन चालक मारपीट मामले” को याद किया।

CO ने दावा किया कि उस दौरान उन्होंने संबंधित पक्ष को बचाया था और भविष्य में भी ऐसी स्थिति आने पर वे अपने जवानों की मदद के लिए खड़े रहेंगे। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि “मैं बचा लूंगा” के दावे से पुलिसकर्मियों को तो शायद थोड़ी राहत मिले, लेकिन इससे यह संदेश भी जा रहा है कि पुलिस को प्रो-एक्टिव (सक्रिय) नहीं रहना चाहिए, बल्कि रिएक्टिव (प्रतिक्रियावादी) रहना चाहिए।

सोशल मीडिया पर भड़की जनता की नाराजगी

इस वीडियो के सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (X, फेसबुक और इंस्टाग्राम) पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई यूजर्स ने इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी से कतई विपरीत बताया।

लोगों का कहना है कि अगर कोई आपराधिक तत्व या भीड़ किसी निर्दोष के साथ मारपीट कर रही हो और पुलिस “दूर से देख” रही हो, तो इसे लोकतंत्र में पुलिस की भूमिका कहना कहां तक उचित है? एक यूजर ने लिखा, “अगर पुलिस दर्शक बन जाएगी, तो आम आदमी किसे भरोसा करे?” वहीं, कुछ लोगों ने इस बयान को अनुशासनहीनता करार देते हुए उच्चाधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

पुलिस बल के मनोबल और जनता के विश्वास पर पड़ा असर

जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों की भाषा का असर सीधे दो स्तरों पर देखने को मिलता है—पहला, पुलिस बल का मनोबल और दूसरा, जनता का विश्वास। जब एक CO अपने जवानों से कहता है कि “तुम सिर्फ देखो”, तो इससे निचले स्तर पर काम करने वाले दरोगा और सिपाहियों के मन में भ्रम पैदा होता है। वे समझ नहीं पाते कि तत्काल स्थिति में उन्हें कार्रवाई करनी है या आदेश का इंतजार करना है। दूसरी ओर, जनता के मन में यह बात बैठती है कि पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए गंभीर नहीं है। यह विश्वास का टूटना लंबे समय तक पुलिस-जनता के रिश्तों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

क्या यह किसी नई ‘कार्यशैली’ का संकेत है?

कुछ लोगों का मानना है कि शायद CO जनता के गुस्से को भड़काने से बचने की रणनीति के तहत ऐसा बोल रहे हों, लेकिन पुलिसिंग के मानकों के अनुसार यह तर्क किसी भी स्थिति में मान्य नहीं हो सकता। पुलिस की उपस्थिति ही अपराधियों और बवालियों के लिए सबसे बड़ा डिटरेंट (हतोत्साहक) होती है। पुलिस को पीछे हटकर दूर से देखने का निर्देश देना, बवालियों को खुली छूट देने जैसा है, जो स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

अभी तक नहीं आया कोई आधिकारिक बयान

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस वीडियो के तेजी से वायरल होने और चहुंओर आलोचना होने के बावजूद, अभी तक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (जैसे SP या SSP) या जिला प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

न ही इस वीडियो की पुष्टि की गई है और न ही इसके संदर्भ को लेकर स्पष्टीकरण दिया गया है। इस चुप्पी को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। स्थानीय स्तर पर इस मामले की चर्चा जोरों पर है और लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या वरिष्ठ अधिकारी इस तरह की ‘कार्यशैली’ को मान्यता देते हैं?

पुलिस विभाग एक अनुशासित संगठन है, जहां हर शब्द और हर निर्देश का व्यापक प्रभाव पड़ता है। कानपुर देहात के CO का यह वीडियो केवल एक विवाद तक सीमित नहीं रह सकता; यह पूरे प्रदेश में पुलिस की छवि को धूमिल करने की क्षमता रखता है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि उच्चाधिकारी इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराएं और स्थिति स्पष्ट करें कि क्या वीडियो में दिखाई दे रहा संदर्भ सही है? और यदि सही है, तो क्या इस तरह के बयान देने वाले अधिकारी को बख्शा जा सकता है? जनता के विश्वास और कानून के राज को बनाए रखने के लिए इस मामले में पारदर्शिता बहुत आवश्यक है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now