दिल्ली में 700 रुपये का विवाद बना लैब टेक्नीशियन की मौत

उत्तरी दिल्ली के रोहिणी इलाके में स्थित बेगमपुर विहार का है। यहां रहने वाले मुकेश यादव पेशे से एक लैब टेक्निशियन थे, जो अपने परिवार का गुजारा ईमानदारी से करते थे। रविवार की शाम/रात को जब मुकेश का भाई सतीश किसी काम से बाहर था, तब उससे आरोपी सचिन मिला।

700 रुपये के लिए खूनी खेल, बीच-बचाव करने वाले की हत्या

HIGHLIGHTS

  • भाई को बचाने पहुंचा युवक, 700 रुपये ने ले ली जान
  • 700 रुपये के कर्ज ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, हत्या से सनसनी
  • दिल्ली में 700 रुपये को लेकर चाकूबाजी, निर्दोष भाई की मौत
  • कर्ज था सिर्फ 700 रुपये, विवाद में चली गई युवक की जान

Delhi News: दिल्ली के रोहिणी सेक्टर में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। राजधानी में अपराधों का ग्राफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है, लेकिन इस बार वारदात को अंजाम देने वालों की क्रूरता और वजह की नगण्यता हर किसी के होश उड़ा देने वाली है। एक ऐसा मामला जहां सिर्फ 700 रुपये के बकाया पर इतना सैरातुन हमला हुआ कि एक निर्दोष व्यक्ति की जान चली गई। दिलचस्प और दुखद बात यह है कि जिस व्यक्ति ने पैसे उधार लिए थे, उसकी जान बाल-बाल बची, जबकि बीच-बचाव करने वाले उसके भाई को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

घटना का भयावह सिलसिला

यह पूरा मामला उत्तरी दिल्ली के रोहिणी इलाके में स्थित बेगमपुर विहार का है। यहां रहने वाले मुकेश यादव पेशे से एक लैब टेक्निशियन थे, जो अपने परिवार का गुजारा ईमानदारी से करते थे। रविवार की शाम/रात को जब मुकेश का भाई सतीश किसी काम से बाहर था, तब उससे आरोपी सचिन (जो ई-रिक्शा चलाकर अपनी रोजी-रोटी कमाता है) मिला। सूत्रों के अनुसार, सतीश ने कुछ समय पहले सचिन से 700 रुपये उधार लिए थे। आर्थिक तंगी के चलते सतीश उस छोटी सी रकम को चुका नहीं पा रहा था।

रविवार को जब दोनों का आमना-सामना हुआ, तो सचिन ने अपने 700 रुपये की मांग कर डाली। इसी बात को लेकर शुरू हुई बहस तेजी से झड़प में बदल गई। इसी बीच, मुकेश को जब इस विवाद की भनक लगी, तो वह तुरंत मौके पर पहुंचा। एक भाई के नाते उसकी प्राकृतिक प्रतिक्रिया थी कि वह अपने छोटे भाई को सचिन के गुस्से से बचाए। लेकिन मुकेश को शायद अंदाजा नहीं था कि उसका यह पहला कदम उसकी जिंदगी का आखिरी कदम साबित होगा।

चाकू की धार ने ली जान

झगड़ा बढ़ता देख सचिन ने अपना आपा खो दिया और अचानक से उसने अपनी जेब से एक तेज चाकू निकाल लिया। बीच-बचाव कर रहे मुकेश पर उसने लगातार हमले करने शुरू कर दिए। इस हमले के दौरान मुकेश के दाएं कंधे पर गहरी चोटें आईं। चाकू इतनी ताकत से लगा कि मुकेश लहूलुहान होकर जमीन पर गिर गया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी सचिन और उसके दो अन्य साथी मौके से फरार हो गए।

अस्पताल में भर्ती कराने के बाद भी नहीं बची जान

घायल अवस्था में मुकेश को तत्काल नजदीकी अग्रसेन अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसकी हालत देखते ही नाबालिग होने के कारण उसे तुरंत दिल्ली के सबसे बड़े अस्पताल एम्स (AIIMS) ट्रामा सेंटर में रेफर कर दिया। हालांकि, काफी खून बहने और गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण सोमवार की सुबह लगभग 2 बजकर 18 मिनट पर डॉक्टरों ने मुकेश को मृत घोषित कर दिया।

सूचना मिलते ही बेगमपुर थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल पर सड़क पर खून की धाराएं बह रही थीं, जिसे देखकर आसपास के लोगों में दहशत का माहौल था। पुलिस ने तुरंत आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू किया और स्थानीय लोगों से पूछताछ की। पुलिस के सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए कई टीमें बनाई गईं।

कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस को वारदात के मात्र कुछ ही घंटों के भीतर बड़ी सफलता मिली। मुख्य आरोपी सचिन उर्फ सागर (29 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसके बयान के आधार पर पुलिस ने उसके दो अन्य साथियों— पंकज उर्फ भूरा (23 वर्ष) और अभिषेक उर्फ अटल (22 वर्ष) को भी पकड़ लिया। तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है।

आरोपी का चौंकाने वाला आपराधिक इतिहास

जब पुलिस ने मुख्य आरोपी सचिन की पैरवी खंगाली, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सचिन कोई आम बेरोजगार युवक नहीं था, बल्कि वह दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड में एक हिस्ट्रीशीटर (आदतन अपराधी) के रूप में दर्ज था। इससे पहले वह चोरी और अन्य संगीन धाराओं के कम से कम 10 मामलों में पहले से शामिल रह चुका है। हालांकि, उसके साथी पंकज और अभिषेक का कोई पहले से आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन गलत संगत ने उन्हें भी सलाखों के पीछे धकेल दिया है।

मुकेश की मौत ने उसके परिवार की दुनिया ही उजड़कर रख दी है। मुकेश एक लैब टेक्निशियन था, जो दिन-रात मेहनत करके अपने परिवार का पेट पालता था। उसके पीछे उसकी पत्नी और दो छोटे मासूम बच्चे रह गए हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया है। पोस्टमार्टम की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है, लेकिन परिवार में मातम का माहौल है। सबसे बड़ा दुख इस बात का है कि मुकेश की जान उसकी गलती नहीं, बल्कि किसी और के 700 रुपये के कर्ज की सजा के तौर पर चली गई।

बढ़ती असहिष्णुता और कानून व्यवस्था के लिए चुनौती

यह मामला दिल्ली जैसे महानगरों में बढ़ती असहिष्णुता और छोटी-छोटी बातों पर खून खराबे को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। सिर्फ 700 रुपये जैसी नगण्य रकम के लिए किसी की जान लेना समझ से परे है। यह दर्शाता है कि लोगों में धैर्य और बातचीत से मसला सुलझाने की क्षमता लगातार खत्म होती जा रही है। पुलिस की तेज गिरफ्तारी ने भले ही इस मामले में एक राहत देने वाला कदम उठाया हो, लेकिन मुकेश जैसे ईमानदार नागरिकों को सुरक्षा देने के लिए समाज और प्रशासन को मिलकर एक बड़ा कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में कोई भी निर्दोष इस तरह की मूर्खतापूर्ण वजहों से अपनी जान न गँवाए। वर्तमान में पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है ताकि पूरी साजिश और वारदात के हर पहलू का पर्दाफाश किया जा सके।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now