संध्या समय न्यूज
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में साइबर अपराधियों ने दोस्ती का जाल बुनकर एक नया तरीका अपनाया है। रोहिणी जिले की साइबर पुलिस ने ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के एक चर्चित मामले का खुलासा करते हुए दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने ट्रेन में यात्रा के दौरान एक महिला से दोस्ती का नाटक कर उसका मोबाइल फोन हथियाया और फिर तकनीकी चालबाजी से सिम पोर्टिंग कर उसके बैंक खाते से 48 हजार रुपये की ठगी की।
कैसे हुई घटना?
पुलिस के अनुसार, रोहिणी सेक्टर-6 निवासी महिला जनवरी 2026 में अपने बेटे के साथ कानपुर से दिल्ली लौट रही थीं। ट्रेन में सफर के दौरान सचिन गुप्ता नामक युवक और एक युवती ने महिला से दोस्ती की। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी और आरोपियों ने महिला और उसके बेटे का भरोसा जीत लिया। इसी दौरान आरोपियों ने अपने मोबाइल से बात करने का बहाना बनाते हुए महिला और उनके बेटे के मोबाइल फोन कुछ देर के लिए ले लिए। फोन मिलते ही उन्होंने महिला की नजरों से बचकर उसके सिम का UPC (Unique Porting Code) कोड देख लिया और फोन वापस कर दिए। अगले ही दिन महिला और उसके बेटे के मोबाइल नंबर अचानक बंद हो गए। इससे अनजान महिला को तब झटका लगा जब उन्हें पता चला कि उनके क्रेडिट कार्ड से तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 48 हजार रुपये निकाल लिए गए हैं।
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JIO स्टोर का अनुभव बना आपराधिक हथियार
पुलिस ने तकनीकी जांच और मनी ट्रेल का पीछा करते हुए नाथूपुरा, बुराड़ी इलाके पर छापा मारा और 26 वर्षीय सचिन कुमार गुप्ता और 23 वर्षीय नितिन कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आश्चर्यजनक खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी सचिन पहले एक JIO स्टोर पर काम करता था। उसे सिम पोर्टिंग की पूरी प्रक्रिया और तकनीकी जानकारी थी। ट्रेन में जब उसने महिला का फोन लिया, तो उसने UPC कोड हासिल कर लिया। इस कोड की मदद से उसने महिला का नंबर फर्जी तरीके से दूसरे नेटवर्क पर पोर्ट करा दिया और नया सिम जारी करवा लिया। सिम उसके पास आते ही उसे बैंकिंग ऐप पर आने वाले OTP मिल गए और उसने आसानी से पैसे ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में प्रयुक्त एक मोबाइल फोन और एक ATM कार्ड बरामद किया है। फिलहाल, पुलिस ठगी की रकम को बरामद करने की कोशिश में जुटी है और मामले की आगे जांच जारी है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अजनबियों के साथ अपनी निजी जानकारी या मोबाइल फोन साझा न करें, क्योंकि साइबर अपराधी अब दोस्ती का रास्ता अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।

























