उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में राम मंदिर और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दलों के नेता आमंत्रण मिलने के बावजूद प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं हुए, क्योंकि उन्हें अपने वोट बैंक की चिंता थी। योगी ने कहा कि उन्हें डर था कि समारोह में जाने से उनकी “जालीदार टोपी” छिटक सकती है।
मुख्यमंत्री रविवार को लखनऊ में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। वीएचपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन, राम मंदिर विरोध और अयोध्या को लेकर विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल उठाए।
राम मंदिर आंदोलन को लेकर विपक्ष पर आरोप
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर का विरोध करने वाले कुछ लोग अब खुद को रामभक्त बताने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह वीएचपी के वैचारिक प्रयासों की जीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथी दलों ने मंदिर के पक्ष में माहौल बनने से रोकने की कोशिश की और आंदोलन के खिलाफ गलत तथ्य प्रस्तुत किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान ऐसे तर्क दिए गए, जिनमें भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे हिंदू समाज की आस्था को ठेस पहुंची। योगी ने कहा कि आज वही लोग राम मंदिर और रामभक्तों पर सवाल उठा रहे हैं, जो पहले मंदिर निर्माण का विरोध करते थे।
‘रामकाज में कालनेमि से सावधान रहें’
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने वीएचपी कार्यकर्ताओं और बजरंगियों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने रामायण के पात्र कालनेमि का उल्लेख करते हुए कहा कि रामकाज में ऐसे लोग भी प्रवेश कर सकते हैं, जिनका उद्देश्य आंदोलन को बदनाम करना हो। योगी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग भीतर से आंदोलन को नुकसान पहुंचाने और समर्थकों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को ऐसे लोगों की पहचान करनी चाहिए और उनकी कथित साजिशों को सफल नहीं होने देना चाहिए। योगी ने यह भी आरोप लगाया कि राम मंदिर आंदोलन का विरोध करने वाले अब अलग-अलग तरीकों से अयोध्या और मंदिर से जुड़े मुद्दों को विवादित बनाने का प्रयास करते हैं।
प्राण प्रतिष्ठा के निमंत्रण पर क्या बोले CM योगी?
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा और मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम का जिक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विपक्षी नेताओं को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे समारोह में नहीं पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि इसका कारण राजनीतिक वोट बैंक का डर था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, विपक्षी नेताओं को आशंका थी कि समारोह में शामिल होने पर उनके समर्थकों का एक वर्ग नाराज हो सकता है।
योगी ने कहा कि विपक्ष का आचरण जनता के सामने है और राम मंदिर को लेकर उसका पुराना रुख भी लोगों को याद है। हालांकि, उनके ये आरोप राजनीतिक बयान हैं; सपा और कांग्रेस की ओर से इन दावों पर प्रतिक्रिया इस कार्यक्रम के विवरण में शामिल नहीं है।
अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी पर आयोजित
लखनऊ में आयोजित यह कार्यक्रम वीएचपी के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी के अवसर पर हुआ। सिंघल राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं की भूमिका का उल्लेख किया और मंदिर निर्माण को लंबे संघर्ष का परिणाम बताया।
मुख्यमंत्री के भाषण का बड़ा हिस्सा राम मंदिर आंदोलन के इतिहास, विपक्ष की भूमिका और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर केंद्रित रहा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि मंदिर आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर सतर्क रहें और किसी भी ऐसी गतिविधि से बचें, जिससे आंदोलन या उसके समर्थकों की छवि को नुकसान पहुंचे।
बयान से गरमाई सियासत
राम मंदिर और प्राण प्रतिष्ठा को लेकर योगी आदित्यनाथ का यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सपा और कांग्रेस की भूमिका को चर्चा में लाता है। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में दोनों दलों पर मंदिर आंदोलन का विरोध करने और राजनीतिक कारणों से समारोह से दूरी बनाए रखने का आरोप लगाया। उनके बयान का केंद्र यह दावा रहा कि विपक्षी नेताओं ने धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के बजाय अपने वोट बैंक को प्राथमिकता दी।
राम मंदिर पर राजनीतिक दलों के रुख को लेकर बहस पहले भी चुनावी और सार्वजनिक मंचों पर उठती रही है। लखनऊ में अशोक सिंघल जन्मशताब्दी कार्यक्रम के दौरान योगी के संबोधन ने इस बहस को फिर हवा दी है। **राम मंदिर पर CM योगी का बयान** अब सपा-कांग्रेस की मंदिर आंदोलन से जुड़ी भूमिका और प्राण प्रतिष्ठा समारोह में उनकी गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
























