UP News:पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भाजपा (BJP) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल के लंबे शासन का सफाया करते हुए 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटों पर शानदार बहुमत हासिल किया है। इस ऐतिहासिक जनादेश पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा संदेश दिया है।
सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा कि जो भी जनता की उपेक्षा करेगा, सनातन का अपमान करेगा, उसका सूपड़ा साफ होना तय है। बंगाल की जनता ने ये करके दिखाया है। उन्होंने कहा कि यह नतीजा उन दलों के लिए एक कड़ी चेतावनी है, जो सत्ता में आकर विकास के संसाधनों का दुरुपयोग करते हैं, अपराधियों को संरक्षण देते हैं और सनातन परंपरा का अपमान करते हैं।
मजबूत नेतृत्व ने बदली बंगाल की तस्वीर: योगी
मीडिया को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि अच्छी नीतियों और साफ नीयत वाली सरकार ही बेहतर परिणाम दे सकती है। कमजोर शासन व्यवस्था का नतीजा पश्चिम बंगाल में जैसा दिखा, वैसा ही कभी उत्तर प्रदेश में भी था। उन्होंने 2017 के बाद यूपी, खासकर गोरखपुर में हुए विकास का जिक्र करते हुए कहा कि मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट नीतियों से विकास की गति तेज होती है। उन्होंने भरोसा जताया कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य ‘सोनार बांग्ला’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
राजड़हाट में आखिरी दौर का रोमांच
मंगलवार को मतगणना के अंतिम चरण में एक और रोमांचक मोड़ आया। राजड़हाट-न्यू टाउन निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार पीयूष कनोडिया ने टीएमसी के मौजूदा विधायक तापस चटर्जी को महज 309 वोटों के करीबी अंतर से पराजित किया। 18 राउंड की गिनती के बाद कनोडिया को 1,06,564 वोट मिले, जबकि चटर्जी 1,06,255 वोटों पर सिमट गए। इस सीट पर जीत के साथ भाजपा का आंकड़ा 207 पर पहुंच गया और टीएमसी को 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा।
भाजपा की ऐतिहासिक जीत के 3 बड़े कारण
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बंगाल में इस भूचाल के पीछे तीन प्रमुख कारण रहे:
- मोदी-शाह की मैजिक रणनीति: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसंपर्क रैलियों और गृह मंत्री अमित शाह के सांगठनिक कौशल ने मिलकर राज्य में भाजपा की लहर पैदा की।
- वोट शेयर में भारी उछाल: भाजपा का वोट शेयर 2021 के 38% से बढ़कर 45% हो गया। वहीं, टीएमसी जिसका वोट शेयर 48% था, वह गिरकर 41% पर आ गया।
- क्षेत्रीय पैठ में बदलाव: उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे इलाकों में टीएमसी का पारंपरिक जनाधार पूरी तरह से भाजपा की ओर खिसक गया।
1972 के बाद पहली बार: केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी
1972 के बाद यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल में वही पार्टी सरकार बनाने जा रही है, जो केंद्र में सत्ता संभाले हुए है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं है, बल्कि बंगाल की विचारधारा और सांगठनिक ढांचे में एक गहरा बदलाव है।
अब सबकी नजरें नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण पर टिकी हैं। क्योंकि भाजपा ने पहली बार इस पूर्वी राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता की कमान संभाली है, ऐसे में मोदी कैबिनेट के फॉर्मूले और बंगाल के नए मुखिया के नाम पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
























