Eid-ul-Adha News: राजस्थान के सरहदी इलाके बाड़मेर में इस्लाम के पवित्र त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) की धूम इन दिनों चरम पर है। त्योहार से पहले यहाँ की बकरा मंडियां (Goat Markets) पूरी तरह से गुलजार हो चुकी हैं। खरीदारों की भाड़ और बिक्री के लिए आए हुए जानवरों की रौनक देखते ही बनती है। इस बाड़ के बीच बाड़मेर की ईदगाह मैदान स्थित बकरा मंडी में एक ऐसा ‘नवाब’ पहुंचा, जिसने सबकी निगाहें अपनी ओर खींचीं और अपनी शान से सबको परचून कर दिया।
हम बात कर रहे हैं ‘राजू’ की। जी हां, डेढ़ साल का यह सिंधी नस्ल का बकरा अपनी फिटनेस और शानदार शक्ल-सूरत के कारण इस बार मंडी का ‘सुपरस्टार’ बन गया। इसका वजन करीब 70 किलो है और इसे बाजार में तबरे से 41 हजार रुपये में बेचा गया, जो अब तक इस सीजन की सबसे महंगी डील साबित हुई है। इस बकरे को पालने वाले और इसे खरीदने वाले दोनों को ही इस ‘रॉयल’ डील पर काफी गर्व महसूस हो रहा है।
शाही खानपान: काजू-बादाम और हरी सब्जियां
आमतौर पर बकरों को हरा चारा, सूखा चारा या फिर दाना खिलाया जाता है, लेकिन ‘राजू’ कोई आम बकरा नहीं था। इसे पालने वाले बाड़मेर शहर निवासी अब्दुल कलाम ने इसे बचपन से ही एक शाही तरीके से पाला-पोसा है। अब्दुल कलाम के अनुसार, ‘राजू’ को सिर्फ आम चारा नहीं, बल्कि उसकी सेहत और शारीरिक बनावट को ध्यान में रखते हुए खास डाइट प्लान फॉलो करवाया जाता था।
उन्होंने बताया कि राजू की थाली में रोजाना पौष्टिक दाना, चना, और ताजी हरी सब्जियां शामिल होती थीं। लेकिन इसके अलावा उसे अपना वजन बढ़ाने और चमक लाने के लिए काजू और बादाम भी खिलाए जाते थे। इस ‘ड्राई फ्रूट डाइट’ का असर यह हुआ कि महज डेढ़ साल की उम्र में ही इस बकरे का कद-काठ इतना मजबूत हो गया कि वह मंडी में भीड़ में भी सबसे ऊपर दिखाई देता था। यही वजह रही कि इस बकरे को मंडी में लाते ही खरीदारों की भीड़ इसके पास लग गई।
70 किलो वजन और दिलचस्प कहानी
‘राजू’ की खासियत सिर्फ इसका शाही खानपान नहीं, बल्कि इसकी शारीरिक बनावट भी है। अब्दुल कलाम ने बताया कि उन्होंने राजू को बचपन से ही डॉक्टर की तरह देखभाल किया। सुबह-शाम उसकी नियमित खुराक पर खास ध्यान दिया जाता था। इसकी सेहत को लेकर कोई कोताही नहीं बरती गई।
इसका परिणाम यह सामने आया कि डेढ़ साल की उम्र में ही इस सिंधी नस्ल के बकरे का वजन करीब 70 किलो पहुंच गया। चौड़ा सीना, लंबी पैर और मजबूत शरीर वाला यह बकरा किसी को भी आकर्षित करने के लिए काफी था। अब्दुल कलाम का कहना था कि जब वे इसे मंडी में लेकर आए, तो उन्हें पूरा विश्वास था कि उनकी मेहनत रंग लाएगी और ऐसा ही हुआ।
41 हजार में हुआ सौदा
बाड़मेर की ईदगाह मैदान में सजी बकरा मंडी में जब ‘राजू’ को प्रदर्शन के लिए खड़ा किया गया, तो कई खरीदार इसकी कीमत जानने आए। अंततः कादर खान नाम के एक खरीदार ने इस बकरे की क्वालिटी और नस्ल को देखते हुए 41 हजार रुपये की बोली लगाई और यह सौदा पक्का हो गया। कादर खान ने भी इस बकरे को खरीदकर काफी खुशी जताई। ईद के इस पावन मौके पर एक अच्छे और सेहतमंद पशु की कुर्बानी के लिए उन्होंने इस पर मोटी रकम खर्च की।
बाड़मेर की मंडी में सिंधी नस्ल की धूम
इस साल बाड़मेर की बकरा मंडियों में सिंधी नस्ल के बकरों की मांग सबसे अधिक देखने को मिल रही है। व्यापारियों का कहना है कि खरीदार अब ज्यादा वजन और अच्छी नस्ल को तरजीह दे रहे हैं। इस बार मंडियों में सिंधी के अलावा नागौरी और अजमेरी नस्ल के बकरे भी बिक्री के लिए पहुंचे हैं।
बाजार के जानकारों के अनुसार, सिंधी नस्ल के बकरे अपने वजन और मांस की गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि इनकी कीमत अन्य नस्लों की तुलना में ज्यादा है। वजन और आकार के आधार पर कीमतों में काफी अंतर है। बाजार में छोटे आकार के बकरे 5 हजार से लेकर 15 हजार रुपये के बीच बिक रहे हैं। वहीं, अगर बात मध्यम श्रेणी या भारी वजन वाले बकरों की की, तो उनकी कीमत 30 से 50 हजार रुपये तक जा पहुंची है।
त्योहारी सीजन में मंडी में उमड़ी भीड़
ईद-उल-अजहा के चलते पूरे बाड़मेर जिले में उत्साह का माहौल है। लोग अपने परिवार के साथ मंडियों में पहुंच रहे हैं और अपनी पसंद का पशु चुनने में लगे हुए हैं। मंडी में न केवल स्थानीय खरीदार, बल्कि आस-पास के गांवों और शहरों से भी लोग खरीदारी करने आ रहे हैं। बकरियों के साथ-साथ बकरे भी इस बाड़ की वजह से अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
अब्दुल कलाम द्वारा पाला गया यह बकरा ‘राजू’ इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अगर पशुओं के साथ अच्छा व्यवहार और पौष्टिक आहार दिया जाए, तो वे न केवल सेहतमंद होते हैं, बल्कि बाजार में अच्छी कीमत भी कमा सकते हैं। 41 हजार रुपये का यह सौदा बाड़मेर की इस ईद की मंडी में अब तक की सबसे चर्चित डील बन चुका है। आने वाले कुछ दिनों में त्योहार करीब आते ही इस तरह की और भी डील देखने को मिल सकती हैं, लेकिन ‘राजू’ का नाम इस बाड़मेर की बकरा मंडी में देर तक याद रखा जाएगा।
























