Youth making a fresh foray into politics: पिछले कुछ वर्षों में भारत का राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। खासकर, युवा वर्ग की भागीदारी और उनकी धारणा ने इस बदलाव को और तेज़ कर दिया है। यह बदलाव केवल चुनावी नतीजों या राजनीतिक भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवा मनोवृत्तियों, उनकी प्राथमिकताओं, और उनकी सोच में भी स्पष्ट झलक रहा है। इन बदलावों का सबसे बड़ा उदाहरण जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए युवाओं के आंदोलन और उसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने दिखाया है कि भारत के युवा, विशेष रूप से जेन Z, अब अपनी आवाज़ को मजबूती से उठा रहे हैं और राजनीतिक व्यवस्था को अपनी समझदारी और जागरूकता का संदेश दे रहे हैं।
जंतर-मंतर का आंदोलन
पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवा वर्ग का आंदोलन देखने को मिला। यह आंदोलन उन छात्रों और युवाओं का था, जिन्होंने अपने भविष्य को लेकर चिंता जताई और सरकार से अपनी बात रखने का साहस दिखाया। इस आंदोलन का नेतृत्व एक नए विचारधारा के साथ हुआ, जिसमें युवा अपने अधिकारों, शिक्षा, रोजगार, और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर मुखर हुए। इस आंदोलन ने यह साबित कर दिया कि भारत की जेन Z पूरी तरह से जागरूक है और अपनी बात को उठाने में पीछे नहीं है।

इस आंदोलन के बाद, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया, तो यह संकेत था कि सरकार को युवा की आवाज़ का महत्व समझना पड़ा। यह एक संकेत था कि युवा वर्ग अब राजनीति की मुख्यधारा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है और अपनी चिंताओं को सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर रहा है।
सोशल मीडिया का प्रभाव
आज का युवा वर्ग सोशल मीडिया के माध्यम से न केवल अपनी बात रखता है, बल्कि वह राजनीतिक, सामाजिक, और आर्थिक मुद्दों पर अपने विचार साझा करता है। सोशल मीडिया ने जेन Z को एक ऐसा मंच प्रदान किया है, जहां वे अपनी चिंताओं, उम्मीदों और असंतोष को बिना किसी मध्यस्थता के सीधे व्यक्त कर सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई बार युवा आंदोलन सोशल मीडिया पर वायरल होकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन जाते हैं।
सोशल मीडिया ने न केवल युवा वर्ग को जागरूक किया है, बल्कि यह राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए भी एक चुनौती बन गया है। उन्हें अब अपनी नीतियों और कार्यशैली को युवा वर्ग की उम्मीदों के अनुरूप बनाना पड़ रहा है, नहीं तो वे चुनाव हार सकते हैं या उनकी छवि को नुकसान पहुंच सकता है। इस संदर्भ में, सोशल मीडिया का प्रभाव इतना व्यापक है कि यह युवाओं की राय बनाने, उनके मुद्दों को उजागर करने और राजनीतिक विचारधाराओं को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
C-Voter का नया सर्वेक्षण
हाल ही में किए गए एक सी-वोटर (CVoter) के स्नैप पोल ने भारत के युवा वर्ग की राजनीतिक प्राथमिकताओं और उनके विचारधारा को समझने में नई रोशनी डाली है। इस सर्वे में लगभग 1270 युवाओं को शामिल किया गया था, जिनकी उम्र 18 से 35 वर्ष के बीच है। इस सर्वे के परिणामों ने उन धारणाओं को तोड़ दिया है, जिनमें माना जाता था कि युवा वर्ग राजनीति में कम रुचि रखता है या उसकी चिंताएं राजनीतिक दलों के एजेंडों से मेल नहीं खातीं।
मुख्य बातें सर्वे के परिणामों की
राजनीतिक पार्टियों की समझदारी पर संदेह देता है कि लगभग 58.7% युवा मानते हैं कि राजनीतिक पार्टियां जेन Z की चिंताओं को नहीं समझती हैं। केवल 20.7% युवा ही ऐसा मानते हैं कि पार्टियां उनकी बातों को समझती हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि युवा वर्ग में राजनीतिक दलों के प्रति भरोसा कम हो रहा है। पार्टी आधारित मतभेद इस सर्वे में यह भी पता चला कि समर्थन करने वाली पार्टी चाहे बीजेपी की एनडीए हो या कांग्रेस, दोनों ही वर्ग में युवा अपनी चिंताओं को लेकर असंतुष्ट हैं। भाजपा समर्थक में लगभग 54% युवा मानते हैं कि सरकार उनके मुद्दों को नहीं समझती, जबकि कांग्रेस समर्थक युवाओं का यह आंकड़ा करीब 64% है।
शिक्षा और स्वास्थ्य का महत्व सर्वे में शामिल युवा अपने रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य को सबसे बड़े मुद्दे मानते हैं। करीब 53% युवाओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ये मुद्दे चुनाव के दौरान सबसे अहम हैं। यह दिखाता है कि युवाओं का प्राथमिकता क्रम अब आर्थिक और सामाजिक मुद्दों की ओर अधिक हो रहा है। मतदान का निर्णय मतदान के फैसले में युवाओं के लिए मुद्दे अहम हैं, जिनमें से लगभग 33.3% युवाओं ने कहा कि चुनाव में मतदान करने का निर्णय मुद्दों के आधार पर होता है। नेता या पार्टी का नाम उनके लिए दूसरे स्थान पर है, जबकि उम्मीदवार का व्यक्तित्व भी उनकी प्राथमिकता में शामिल है।

युवा वर्ग का नजरिया: शिक्षा, रोजगार और राष्ट्रवाद
भारत में युवाओं की सोच को समझने के लिए यह जरूरी है कि हम उनके मुख्य मुद्दों को समझें। इस सर्वे से पता चलता है कि जेन Z के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य जीवन की बुनियादी जरूरतें हैं। युवाओं का मानना है कि यदि उनके पास अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और रोज़गार के अवसर होंगे, तो वे अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।
वहीं, महंगाई और भ्रष्टाचार भी उनके मुख्य मुद्दों में शामिल हैं। यह दिखाता है कि युवा वर्ग आर्थिक स्थिरता और पारदर्शिता को लेकर भी जागरूक है। इस जागरूकता का परिणाम यह है कि वे अपने वोट का प्रयोग इन मुद्दों पर विचार कर करते हैं।
युवाओं का वोटिंग व्यवहार
रोज़ाना जीवन की चुनौतियों को समझते हुए, भारत के जेन Z का वोटिंग व्यवहार भी बदल रहा है। सर्वे में यह पता चला है कि लगभग 33.3% युवा चुनाव में अपने निर्णय का आधार मुद्दे होते हैं। यह एक सकारात्मक संकेत है कि युवा अब अपने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर जागरूक हैं और वोट डालने से पहले पूरी जानकारी हासिल करते हैं।
इसके अलावा, नेता और पार्टी का चुनाव उनके लिए दूसरे नंबर पर है, जबकि उम्मीदवार का व्यक्तित्व और उनकी छवि भी उनके वोटिंग निर्णय में भूमिका निभाती है। यह बदलाव दर्शाता है कि युवा वर्ग अब superficial बातों से ज्यादा गहरे मुद्दों को महत्व दे रहा है।























